Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 51:31 पर दृष्टिकोण: एक समाचारवाहक का दौड़ना, और बाबेल के दिल पर पड़ती सूचना
मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु: इस verse में Babylonia के पतन की तीव्र और अचानकता का चित्रण एक हरकारे के माध्यम से दिया गया है। एक ही शहर के भीतर, हरकारे एक दूसरे से मिलने के लिए तेजी से दौड़ते हैं ताकि राजा को यह सूचना दे सकें कि उसका नगर चारों ओर से घिर गया है। सूचना की तात्कालिकता और भय का प्रत्यावर्तन यह दर्शाता है कि नीति-नियोजन और शक्ति-प्रभाव के वास्तविक परिणाम बहुत जल्द सामने आ जाते हैं, और अंतत: गर्वीले साम्राज्य भी विपदा के सामने असहाय हो जाता है।
साहित्यिक संदर्भ (संदर्भ-आधार के रूप में)
यिर्मयाह नबी की पुस्तक में नगर-और-राज्यों पर आने वाले प्रहारों का वर्णन उन चेतावनियों का क्रम है जिनमें परमेश्वर की योजना और न्याय का हाथ स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यहाँ एक छोटा से दृश्य एक बड़ी, समृद्ध शक्ति के क्षय की चेतावनी को व्यापक रूप देता है।
वैचारिक महत्त्व
1) सत्ता-घमण्ड और शौर्य के बावजूद, प्रभु की योजना उनके विरोधियों के लिए भी निर्णायक होती है। एक त्वरित समाचार दौड़ यह याद दिलाती है कि भय और गति के साथ-साथ सत्य का दायरा भी फैलता है।
2) यह शोक-आह्वान है कि राजा के लिए भी यह दृश्य एक चित्कार है—अपने साम्राज्य की सुरक्षा के स्थान पर अब वह तबाहि के रास्ते पर है। यह न्याय के समय की सूचनात्मक विविधता को दिखाता है कि कैसे एक सूचना ही इतिहास की दिशा बदल सकती है।
पवित्र शास्त्र के बीच संबंध (Cross-References) और उनके तात्पर्य
इन संदर्भों से स्पष्ट रहता है कि एक समाचार की गति और सटीकता कैसे व्यापक गतिविधियों को संचालित करती है; और यह भी कि सत्ता के ऊँच-नीच में परमेश्वर के न्याय और योजनाओं की उपस्थिति कैसे बनी रहती है।
पूर्ववर्ती नतीजा: पूर्व का संदेश और भविष्य की आशा
यह अंश बताता है कि जब एक नगर चारों ओर से घिर गया है, तो विजेता की ठाठ और उच्चता कितनी तात्कालिक सचाई बन जाती है। परन्तु निर्वाणरूप से यह भी संकेत देता है कि परमेश्वर के न्याय के समय में अस्थिर शक्तियाँ अंततः ढह जाती हैं। एक संदेशवाहक की दौड़ एक क्षणिक दृश्य है जो मजबूती से यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर की योजना स्थिर रहती है।
विचार-विन्यास प्रश्न (Reflection prompts)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यिर्मयाह 51:31 एक छोटा-सा परन्तु शक्तिशाली दृश्य प्रस्तुत करता है: एक हरकारा, एक त्वरित समाचार, और एक नगर की अंतिम स्थिति। यह दृश्य प्रभु के न्याय के सत्य को उजागर करता है और साथ ही प्रेरित करता है कि हम अपनी परिस्थितियों में सत्य और नम्रता के साथ निर्भर रहें।
मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सामयिक तर्कों से प्रेरणा मिलती है कि प्रभु की योजना सर्वाधिक सुनिश्चित है; परन्तु उनके कुछ स्पष्ट उद्धरण नीचे बताए जाते हैं (यदि उपलब्ध):
नोट: खुले पाठ में इन दार्शनिक उद्धरणों का संक्षेप-रूप प्रयोग है; पूर्ण वाक्यों के स्थान-पर नहीं।
प्रसीध्य उद्धरण (यदि उपलब्ध):