यिर्मयाह 51:64 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और यह कहना, 'इस प्रकार बाबेल डूब जाएगा और मैं उस पर ऐसी विपत्ति डालूँगा कि वह फिर कभी न उठेगा और वे थके रहेंगे'।” यहाँ तक यिर्मयाह के वचन हैं। (प्रका. 18:21)

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यिर्मयाह 51:64 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 51:64 का संक्षिप्त विवरण और संदर्भ

यिर्मयाह नबी के उक्त वचनों में बाबुल के पतन की भविष्यवाणी एक निर्णायक आधार बनकर उभरती है। यह एक घोषणा है कि बाबेल डूब जाएगा—एक ऐसी विपत्ति और अंत जो उसे फिर उठने नहीं देगी। यह पवित्र भविष्यवाणी विश्वस्त कानून के अनुरूप होती है कि शक्तिशाली साम्राज्य भी प्रभु के न्याय के सामने टिक नहीं सकता। इस वचन के साथ प्रकट होता है परमेश्वर की योजना का क्रम, जहाँ राष्ट्रों के ठहराव और सत्ता के खेल को अंततः उसकी पवित्रता और प्रतिज्ञाओं के अनुरूप व्यवस्थित किया जाता है।

मुख्य भावार्थ

यह वाक्य संदेश देता है कि बाबेल की सत्ता का अंत होना निश्चित है और उसे परास्त किया जाएगा, ताकि यह देश परिस्थितियों के अनुसार विपत्ति में डूबे। यह దేవ पवित्र परमेश्वर के न्याय के कदमों की गवाही है, जिसमें दुष्टाने शक्तियाँ एक दिन जवाबदेह होंगी। भविष्यवाणी का अंतिम लक्ष्य यह है कि यह सब परमेश्वर के नियंत्रण की पुष्टि के साथ उसकी महिमा दिखाए।

मुख्य विषय

  • न्याय की निश्चितता: परमेश्वर के समय पर सत्ता-निर्णय और बुराई का क्षय।
  • कठोर परन्तु आश्वासक परलषण: विपत्ति के बावजूद ईश्वर की वचननिष्ठता का महत्व।
  • जातीय और अन्तरराष्ट्रीय शासन में परमेश्वर की योजना: इतिहास में शक्तियों की उथल-पुथल के पीछे उसका उद्देश्य स्पष्ट है।

अन्य प्रासंगिक वचनों के साथ सम्बन्ध

1) प्रका. 18:21 का संदर्भ—यह बताता है कि एक-दिवसीय प्रतिशोध और अचानक पतन से विश्व-आर्केन पुष्ट होता है, भले ही वह कितनी भी बड़ी हो।

2) यिर्मयाह 51:11-12 में बाबुल की तीनों सेनाओं के विरुद्ध परमेश्वर की कठोर कार्रवाई का संकेत मिलता है, जो अंततः उसके पतन का कारण बनती है।

3) विरोधी शक्तियों के विरुद्ध न्याय की यह दृष्टि परमेश्वर के वैध शासन का भाग है, जहाँ दुष्ट के परिणाम उनके कर्मों के अनुसार मिलते हैं।

सीख और व्यावहारिक अनुप्रयोग

- भरोसा बनाए रखें कि संसार की जो भी शक्ति दिखे, परमेश्वर के न्याय के सिद्धांत उससे बड़े हैं। समय आने पर परमेश्वर सारा नक्शा स्पष्ट कर देता है।

- दुख और विपत्ति में भी ईश्वर की संहिता पर चर्चा करते समय धैर्य रखें; उसकी योजना व्यापक है और वह अपने लोगों को सुरक्षित रखने के लिए कदम उठाता है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

यिर्मयाह 51:64 में बाबेल के पतन की भविष्यवाणी एक स्पष्ट संदेश है: ठहराव और दमन के अवसर पर भी परमेश्वर की न्याय-प्रणाली आगे बढ़ती है। यह स्मरण कराता है कि संपूर्ण इतिहास परमेश्वर के नियंत्रण में है और जो विरोधी उसे चुनौती देते हैं, वे अंततः उसकी महिमा के प्रकाश में पूर्ण परिणाम पाएंगे।

संदर्भ-आर्क

यिर्मयाह के इस भाग में वक्ता के स्वर में शुद्ध न्याय, दया और प्रतिज्ञाओं की पूर्ति की कसौटी झलकती है। मारक मर्म यह कि परमेश्वर अपने-अपने निर्णयों के अनुसार राष्ट्रों को उनके कर्मों के अनुसार दंडित करता है, परन्तु वह अपने वचनों को पूरा करके अपने लोक के लिए आशा भी बनाता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 51:64 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यिर्मयाह 51:58 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 51:58 (HINIRV) »
“सेनाओं का यहोवा यह भी कहता है, बाबेल की चौड़ी शहरपनाह नींव से ढाई जाएगी, और उसके ऊँचे फाटक आग लगाकर जलाए जाएँगे। और उसमें राज्य-राज्य के लोगों का परिश्रम व्यर्थ ठहरेगा, और जातियों का परिश्रम आग का कौर हो जाएगा और वे थक जाएँगे।”

अय्यूब 31:40 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
अय्यूब 31:40 (HINIRV) »
तो गेहूँ के बदले झड़बेरी, और जौ के बदले जंगली घास उगें!” अय्यूब के वचन पूरे हुए हैं।

प्रकाशितवाक्य 18:21 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
प्रकाशितवाक्य 18:21 (HINIRV) »
फिर एक बलवन्त स्वर्गदूत ने बड़ी चक्की के पाट के समान एक पत्थर उठाया, और यह कहकर समुद्र में फेंक दिया, “बड़ा नगर बाबेल ऐसे ही बड़े बल से गिराया जाएगा, और फिर कभी उसका पता न मिलेगा। (यिर्म. 51:63-64, यहे. 26:21)

यिर्मयाह 51 (HINIRV) Verse Selection

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