यिर्मयाह 51:28 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उसके विरुद्ध जातियों को तैयार करो; मादी राजाओं को उनके अधिपतियों सब हाकिमों सहित और उस राज्य के सारे देश को तैयार करो।

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यिर्मयाह 51:28 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 51:28 पर एक दृष्टि

यिर्मयाह की पुस्तक में यह वाक्य वह संदेश प्रस्तुत करता है जो बाबुल के विरुद्ध सामाजिक-और सैन्य तैयारी की चेतावनी देता है। परमेश्वर के पवित्र भविष्यवक्ता Yahweh को समर्पित रहे राष्ट्रों के बीच अपनी न्यायिक कार्रवाइयों को उद्घाटित करते हैं। यहाँ न केवल शहीदों की सूची बनती है, बल्कि विश्वासयोग्य मनुष्य के लिए धर्मी निर्णय और प्रमाद से बच निकलने का आग्रह रहता है। यह वचन एक कुलीन और शक्तिशाली साम्राज्य के विरुद्ध उचित तैयारी का आह्वान है, ताकि ईश्वरीय न्याय की प्रक्रिया संचालित हो सके।

कथा में उसका हिस्सा

यिर्मयाह 51 अध्याय बाबुल के विनाश के परिप्रेक्ष्य में पृथ्वी के राज्यों के बीच विभाजन और दुष्ट शासन के अंत की घोषणा करता है। इस पंक्ति में स्पष्ट है कि परमेश्वर उन शक्तिशाली राष्ट्रों को एक व्यापक रणनीति के साथ तैयार रहने को कहता है—देवदूतों की निगरानी में, राष्ट्राध्यक्षों से लेकर देश-देशों तक, ताकि उनके हिंसक प्रकोप का निष्कर्ष निकले। यह चेतावनी न केवल राजनीतिक कदमों के बारे में है, बल्कि मनुष्य की हृदय-स्थिति के बारे में भी है: अधिपतियों के साथ एक दायित्व-योजना जो न्याय की स्थापना में सहायक हो।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

इस वचन का मूल पाठ यह दिखाता है कि परमेश्वर अपनी योजना में विश्व के शासन-तंत्रों को एकत्रित करता है ताकि उसके निर्णय सत्यापित हों। भले ही यह विरुद्ध दिखे, परन्तु ईश्वरीय न्याय की प्रक्रिया अडिग रहती है। विश्वासयोगी के लिए पाठ एक सुरक्षित विश्वास की पहचान कराता है: मौत, विनाश या अन्याय के समय भी परमेश्वर की योजनाएँ सर्वोपरि रहती हैं।

अनुसंधानात्मक तुलना

  • यिर्मयाह 50:23-29 — बाबुल के पतन का समग्र चित्र, जहाँ संसार के शक्तिशाली केन्द्र अपना अंत पाते हैं।
  • नीतिवचन 21:1 — परमेश्वर राजाओं के दिल पर अपना मार्ग संचालित करता है; सत्ता में नियंत्रण उसकी मोहर है।
  • නාहु 1:7 — प्रभु द्वारा निपटाई जाने वाली विपत्ति के समय सशक्त विश्वास का पलड़ा भारी रहता है।

इन संकेतों से स्पष्ट होता है कि सत्ता चाहे कितनी भी स्थिर क्यों न लगे, परमेश्वर की न्याय-योजना से अछूती नहीं रहती।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

  • विश्वास की दृष्टि से, अस्थिर सत्ता के बीच भी हमारी भूमिका ईमानदार-हृदय और न्यायपूर्ण व्यवहार बनाए रखना है।
  • धर्म-नियंत्रण और सच-परक निर्णय लेकर हम सामाजिक-राजनीतिक प्रक्रियाओं में नैतिक मूल्य बनाए रखें।
  • विश्वास-आश्रय में आशा रखें कि परमेश्वर की नियति हिंसा के बीच भी न्यायपूर्ण परिणाम लाती है।

सम्बद्ध कथन और संकलन

यिर्मयाह के परिप्रेक्ष्य से यह अध्याय हमें यह याद दिलाता है कि शक्तिशाली साम्राज्यों की चालाकी और धारणाओं के बीच परमेश्वर का नियम चलता रहता है। नीचे दिए गए तीन cross-references इस विचार को मजबूत करते हैं:

  • यिर्मयाह 50:29 — बाबुल की आवाजाही और न्याय का आह्वान; यह दिखाता है कि निर्णय सार्वभौमिक है।
  • यिर्मयाह 27:6 — परमेश्वर हर सत्ता के स्रोत और सीमा को निर्धारित करता है।
  • यशायाह 46:10 — परमेश्वर का उद्देश्य, इतिहास के पीछे एक उद्देश्य निर्धारित है।

संक्षेप में, यह वचन उन लोगों के लिए है जो शक्तिशाली दुष्ट शासन के सामने भी विश्वास और नैतिकता को बनाए रखना चाहते हैं, क्योंकि परमेश्वर की योजना और न्याय अंततः क्रियान्वित होती है।

संक्षेप

यिर्मयाह 51:28 एक चेतावनी है: समाज-राजनीति में कठोर कदम उठाने होंगे ताकि परमेश्वर के न्याय की प्रक्रिया स्पष्ट हो। यह सुन्दर रूप से पुष्टि करता है कि सत्ता चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, परमेश्वर के आदेश का पालन करना चाहिए, ताकि अन्ततः सच्चाई, दयालुता और न्याय टिके रहें।

मॉडल उद्धरण (अगर उपलब्ध): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से छोटे उद्धरण

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 51:28 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“तीरों को पैना करो! ढालें थामे रहो! क्योंकि यहोवा ने मादी राजाओं के मन को उभारा है, उसने बाबेल को नाश करने की कल्पना की है, क्योंकि यहोवा अर्थात् उसके मन्दिर का यही बदला है

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येपेत के पुत्र*: गोमेर, मागोग, मादै, यावान, तूबल, मेशेक और तीरास हुए।

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1 इतिहास 1:5 (HINIRV) »
येपेत के पुत्र: गोमेर, मागोग, मादै, यावान, तूबल, मेशेक और तीरास।

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