Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 51:40 का सरल अर्थ
इस पद में परमेश्वर कहता है कि वह बाबुल के विनाश के समय के लिए लोगों को भेड़ों के बच्चों, मेढ़ों और बकरों के समान घात करेगा। सरल शब्दों में, यह एक कठोर, पर न्यायपूर्ण के तौर परBabylon के विनाश का चित्र है; जो राज्यों के अत्याचार और विपत्ति का प्रतीक बनकर उन पर टूट पड़ेगा।
पृष्ठभूमि और सन्दर्भ
यिर्मयाह का यह भाग बाबुल के विरुद्ध भविष्यवाणी करता है जब इज़राइल और यहूदा अपनी अवसर-नुकसान थीं और विभाजन के समय से निरंतर भय और सत्ता-उत्पीड़न में थे। यह वचन न केवल राजाओं के शासन-तंत्र की आलोचना है, बल्कि यह दर्शाता है कि परमेश्वर दोषी पर न्याय का घोर परिणाम थोपेगा। भेड़ों, मेढ़ों और बकरों के रूपक यहां दुष्ट शासन के कठोर दमन और विनाश को दर्शाते हैं—ऐसे समय में चीर-हरण, बिखराव और नेतृत्व की कमी होगी।
आधारभूत interpretive observations
छोटे थेमैटिक बिंदु
अन्य प्रासंगिक बाइबल संदर्भ
- यिर्मयाह 50–51 अध्याय बाबुल के विनाश की भविष्यवाणी से जुड़ा है; इनके भीतर दमन और उद्धार की एक साथ योजना बताई गई है। (संदर्भ के लिए सामान्य विचार) - दवाही के बराबर न्याय का प्रमाण: इज़राइल के इतिहास में जब भी सत्ता अत्याचार करती है, परमेश्वर दया और न्याय दोनों के साथ intervene करते हैं। - प्रेषितों के लेखन में दमन के बाद उद्धार की उम्मीद दिखाई देती है—युध्द के बाद शांति का आगमन।
नोट: ऊपर के संदर्भ सीधे शब्दों में नहीं उद्धृत करते; पाठ-रूप में इन verses के सामान्य संदेश को समझने के लिए एक संकेतमात्र हैं।
व्यावहारिक takeaway
सूक्ष्म उद्धरण संकेत
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के समानांतर टिप्पणी उद्धरण देखना चाहें, तो वे इस प्रकार के न्याय-निर्णय और दमन के समय की धारणा पर स्पष्टता देते हैं कि परमेश्वर अत्याचार के विरुद्ध क्रोध दिखाते हैं, ताकि न्याय के साथ उद्धार भी रहे।
संक्षेप में
यिर्मयाह 51:40 में परमेश्वर बाबुल की विनाश-योजना के माध्यम से शक्ति-राज्यों के दमन को न्याय की चाबी के तौर पर स्थापित करते हैं। यह संकेत देता है कि संकट-समय के भीतर भी ईश्वर की स्वतंत्र सत्ता और उद्धार की संभावना बनी रहती है, और लोगों को विश्वास बनाए रखना चाहिए।