Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 51:23 पर टिप्पणी — एक योजना और साथ-साथ उद्धार का संकेत
यह अयत यिर्मयाह की बारीकी से धृत होती कथा में आती है जब परमेश्वर barbary के प्रतिशोध, सत्ता-व्यवस्था और राज्यों के प्रभुत्व पर अपने दिव्य न्याय की चिपकती मिसाल दिखाते हैं। यहाँ कहा गया है कि तेरे द्वारा मैं चरवाहे, किसान, अधिपति आदि सबको तितर-बितर कर दूँगा। यह शाब्दिक चित्र एक बड़े बदलाव की चेतावनी है: अविनाशी सत्ता के सामने सब कुछ क्षुद्र और अस्थिर हो सकता है, ताकि ईश्वर की योजना के अनुसार नया क्रम बन सके। यह वाक्य निरस्त नहीं करता—बल्कि परमेश्वर के न्याय की निष्पक्षता और उसकी योजना के पुनर्निर्माण को दर्शाता है।
पर्व—प्याले में यह पद कैसे स्थापित है
यिर्मयाह ने बाबुल के विरुद्ध भविष्यवाणी की जो देश-प्रदेश की सत्ता के ढांचे को चुनौती देती है। यहां एक कविता-सा स्वर है जिसमें शासन-व्यवस्था के प्रमुख अंग—चरवाहे, किसान, बैल-जोड़ा—तक सत्यापित नहीं रहते, क्योंकि परमेश्वर का निर्णय सर्वोपरि है। यह दर्शाता है कि सत्ता के मानक, सुरक्षा, और लाभ-हानि सब परमेश्वर के हाथ में हैं और वही परिवर्तन लाते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अन्य प्राचीन टिप्पणीकारों के संगत विचार
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे पुरालेख-व्याख्याकार इस पाठ को परमेश्वर की योजना के साथ जोड़ते हैं जहाँ राजनीतिक और सामाजिक ढांचे क्षणभर के लिए नहीं टिकते; परन्तु परमेश्वर के न्याय और उद्धार के लक्ष्य सतत रहते हैं। Henry ने यह संकेत किया है कि यह मारक- strategiya नहीं, बल्कि परमेश्वर के द्वारा जन-सत्ता केन्द्रीयता के ठहराव और पुनर्गठन का संकेत है। Barnes और Clarke ने यह समझाया कि यह वचन तब दिया गया जब बाबुल जैसे शक्तिशाली साम्राज्यों के विरुद्ध परमेश्वर की ताकत की पुष्टि होती है—न सिर्फ विनाश, बल्कि तबाही के पीछे उद्धार की भी संभावना रहती है।
संभावित उद्धरण संकेत
यदि आप इनके मौलिक विचारों के छोटे उद्धरण चाहते हैं, तो यह उल्लेखित है कि Henry, Barnes और Clarke ने साम्राज्य-नियंत्रण के दृष्टिकोण का संकेत दिया है; परन्तु इस पंक्ति के लिए सीधे पाठ के संपूर्ण उद्धरण शामिल नहीं हैं।
अनुकरणीय क्रॉस-रेफरेंसेज
1) दानियेल के समय के संदेश: सत्ता के परिवर्तन परमेश्वर के हाथों में हैं, और वह उन्हीं के अनुसार न्याय करता है।
2) यशायह 40-45: परमेश्वर एकमात्र समर्थ और स्थिर है; मनुष्यों की योजनाएं नश्वर हैं, पर उसकी योजना अजर-अमर है।
3) मत्त. 6:13: प्रभु के Kingdom में विश्वास और पवित्रता के साथ जीवन यापन करना—यही वास्तविक सुरक्षा है, भले ही सांसारिक सत्ता अस्थिर क्यों न हो जाए।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेप
यिर्मयाह 51:23 में शब्द सामर्थ्य और शासन-व्यवस्था के परित्याग की चेतावनी नहीं, बल्कि परमेश्वर के न्याय की सार्वभौमिकता का संकेत है। यह बताता है कि शक्तिशाली संस्थान भी परमेश्वर के हाथों में हैं और उनका क्षय उनकी अद्भुत योजना के लिए आवश्यक हो सकता है। इसलिए हमें आशा, नैतिकता और परमेश्वर की योजना के अनुरूप जीवन बिताने की शिक्षा मिलती है—जो उद्धार के मार्ग को स्पष्ट करता है।