यिर्मयाह 51:29 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यहोवा ने विचारा है कि वह बाबेल के देश को ऐसा उजाड़ करे कि उसमें कोई भी न रहे; इसलिए पृथ्वी काँपती है और दुःखित होती है

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यिर्मयाह 51:29 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 51:29 पर विचार: बाबेल के देश की उजाड़ि की योजना और उसका प्रभाव

मुख्य interpretive बिंदु: परमेश्वर की योजना के अनुसार बाबेल के देश का विशुद्ध ह्रास और वन्य-उजाड़ण उसकी दीवारों के पीछे भी नहीं छिप सकता; यह वही पवित्र-निर्णय है जो सितारे भी गिनती हैं। यहाँ यह स्पष्ट है कि ईश्वर ने बाबेल की शासन-शक्ति के अंत की व्यवस्था कर दी है, ताकि संसार पर उसकी अत्याचारिता का गहराई से हिसाब हो और उसकी दुष्टता का अंत मानव इतिहास में दिखे। इसलिए पृथ्वी काँपती है और दुःखित होती है—क्योंकि साधारणता से देखा गया तंत्र टूट रहा है और न्यायदान का कदम ठहर नहीं रहा।

पाठ-संदर्भ: साहित्यिक संदर्भ और परमेश्वर के निर्णय की भाषा

यिर्मयाह में यह शास्त्र बाबेल के विनाश की भविष्यवाणी का भाग है, जहाँ उद्धारक भविष्य के भीतर राष्ट्र-राज्यों के नयूनिर्माण की ओर संकेत करते हैं। इस पद में बाबेल के स्थान की प्रकृति, उसकी दुष्टता की गहराई और परमेश्वर की न्याय-योजना एक साथ स्पष्ट होती है। शब्दावली में प्रकटन यह है कि प्रकृति- रूप से हर चीज उसके विरुद्ध व्यवस्थित है; पृथ्वी काँप उठती है और जलवायु, राजनीति और सभ्यता की संरचनाएं प्रभावित होती हैं।

कथासम्बन्धी महत्त्व (Theological significance)

यहाँ परमेश्वर के विरुद्ध चल रहे संघ के विरुद्ध उसका न्याय-संस्कार स्पष्ट है: जो शक्ति अन्याय के साथ मानवता पर शासन कर रही है, उसका अंत उसी ईश्वर के हाथ में है। दया और क्रोध दोनों एक साथ दिखते हैं—एक ओर उद्धार हेतु ना-ना करने वाला समय, अन्य ओर दुष्टत्व के परिणामों का भय। यह संदेश बताता है कि ऐतिहासिक घटनाओं के पीछे एक परम सत्ता का नियंत्रण है, जो समय-समय पर पाप के परिणामों को पलट देता है।

किताबों के बीच संपर्क (Cross-references)

  • यिर्मयाह 50–51 की संयुक्त घोषणा: बाबेल की हार और उसकी शक्तियों का अंत—यह एक दैवी न्याय की पुष्टि है।
  • दानियाल 2 और 7: संसार की राज-प्रणालियों का स्थायित्व नहीं, बल्कि परमेश्वर के राज का अटल स्थायित्व।
  • योशू 6 और इतिहास के शिक्षण: अन्यायपूर्ण नियमों के विरुद्ध ईश्वर की व्यवस्था का अनुशासन समय पर आ सकता है।

इन संदर्भों से एक सामान्य ध्वनि उभरती है: पृथ्वी-समुदाय की राजनीति और राष्ट्रों की सत्ता परमेश्वर के निर्णय से ही आकार लेती है; न्याय के समय से पहले न तो शक्ति स्थिर रहती है और न ही अत्याचार लंबे समय तक टिकता है।

चार-स्तरीय प्रतिबिंब (Questions for reflection)

  • क्या आज की समाजिक-आर्थिक शक्तियाँ भी परमेश्वर के न्याय से मुक्त हैं? कैसे मैं विश्वासपूर्वक सत्य के लिए खड़ा रह सकता हूँ?
  • कैसे हमारी चेतना बनी रहे कि ईश्वर के नियम समय पर चलते हैं, चाहे इंसानी सत्ता कितनी भी मजबूत हो?
  • मैं अपनी प्रार्थना में किस प्रकार बाबेल-सी दुष्टताओं के विरुद्ध न्याय के लिए रोक-थाम की मांग कर सकता/सकती हूँ?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यिर्मयाह 51:29 में दिखाया गया है कि परमेश्वर विशाल-इतिहास की धारा में भी अपनी योजना से बाबेल जैसी शक्तियों को समापन देता है। पृथ्वी का काँपना और दुःखित होना उसी निवारण-कार्य का संकेत है—न्याय और उद्धार की दिशा में एक निर्णायक मोड़। भय के समय में भी ईश्वर के विरुद्ध टिके हुए शासन का अंत निश्चित है, और यह सुरक्षा हमारे लिए आश्वासन है कि सत्य और पवित्रता के मार्ग पर ईश्वर ही अंतिम निर्णायक हैं।

महत्वपूर्ण उद्धरण (सूचित सीमाएँ)

यदि उपलब्ध हों, तो नीचे Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे शब्द (छोटे उद्धरण) उद्धृत किए जा सकते हैं:

“यहोवा ने विचारा है कि वह बाबेल के देश को ऐसा उजाड़ करे कि उसमें कोई भी न रहे”—यह विचार Hubukh ke अनुसार, न्याय के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है कि पाप की सत्ता अंततः नष्ट होगी।

नोट: उपरिलिखित उद्धरण केवल संकल्पना के संकेत हेतु हैं; पूर्ण पाठ तभी उद्धृत किया जाएगा जब स्रोत स्पष्ट हो।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 51:29 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उसके नगर उजड़ गए, उसका देश निर्जन और निर्जल हो गया है, उसमें कोई मनुष्य नहीं रहता, और उससे होकर कोई आदमी नहीं चलता।

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“उनके घोड़ों का फुर्राना दान से सुनाई देता है, और बलवन्त घोड़ों के हिनहिनाने के शब्द से सारा देश काँप उठा है। उन्होंने आकर हमारे देश को और जो कुछ उसमें है, और हमारे नगर को निवासियों समेत नाश किया है।

यिर्मयाह 50:45 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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इसलिए सुनो कि यहोवा ने बाबेल के विरुद्ध क्या युक्ति की है और कसदियों के देश के विरुद्ध कौन सी कल्पना की है: निश्चय वह भेड़-बकरियों के बच्चों को घसीट ले जाएगा, निश्चय वह उनकी चराइयों को भेड़-बकरियों से खाली कर देगा।

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