Old Testament
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आमोस 1:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोवा यह कहता है: “एदोम के तीन क्या, वरन् चार अपराधों के कारण मैं उसका दण्ड न छोड़ूँगा; क्योंकि उसने अपने भाई को तलवार लिए हुए खदेड़ा और कुछ भी दया न की, परन्तु क्रोध से उनको लगातार फाड़ता ही रहा, और अपने रोष को अनन्तकाल के लिये बनाए रहा।
आमोस 1:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 1:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहेजकेल 25:12 (HINIRV) »
“परमेश्वर यहोवा यह भी कहता है : एदोम ने जो यहूदा के घराने से पलटा लिया, और उनसे बदला लेकर बड़ा दोषी हो गया है,

भजन संहिता 137:7 (HINIRV) »
हे यहोवा, यरूशलेम के गिराए जाने के दिन को एदोमियों के विरुद्ध स्मरण कर, कि वे कैसे कहते थे, “ढाओ! उसको नींव से ढा दो!”

आमोस 1:11 — संदर्भ में एक दृष्टिकोण
यह वाक्य एविडोमी के पड़ोसियों के बारे में इशारा करता है कि यहोवा उन राष्ट्रों के संदर्भ में किस प्रकार न्याय स्थापित करेगा जिन्हें उन्होंने अपने पड़ोसियों के विरुद्ध अन्यायपूर्ण व्यवहार किया। आमोस के समय उत्तराधिकार की सामाजिक असमानताएं, रक्त-क्रूरता और दया के अभाव से यह बात स्पष्ट होती है कि परमेश्वर अन्याय को सहन नहीं करता। उस ऐतिहासिक संदर्भ में एडोम के विरुद्ध दंड की घोषणा यह दर्शाती है कि आतंकित करने और भाई को तलवार से खदेड़ने जैसी क्रूरताओं के कारण न्याय अपरिहार्य है।
केंद्रीय अर्थ
कहावत यह है कि परमेश्वर उन लोगों की निंदा नहीं छोड़ता जो असत्य और द्वेष से अपने भाइयों पर अत्याचार करते हैं। एडोम ने अपने भाइयों के साथक्रूर व्यवहार किया और इसकी पाशविकता ने उसकी निंदा को बढ़ा दिया। यह बताता है कि दया एकाधिकार नहीं, बल्कि सत्ता और उत्पीड़न के विरुद्ध "न्याय के नियम" लागू होते हैं।
मुख्य विषय
प्रासंगिक अन्य बायबल संदर्भ
- संबन्धित पाठ: यूहन्ना 3:20-21 (अधर्म के कृत्यों पर प्रकाश), योब 34:10-12 (न्याय के सिद्धांत), मीका 6:12 (अधर्म के सामाजिक दुष्परिणाम)। ये दृष्टांत इंगित करते हैं कि न्याय और दया के बिना सामाजिक जीवन असंतुलित रहता है।
व्यावहारिक अभिविन्यास
व्यावहारिक रूप से यह संदेश हमें याद दिलाता है कि हमारे समाज में सत्ता के आयामों के साथ अन्याय के विरुद्ध चुप्पी सुरक्षित नहीं मानी जा सकती। क्रूरता और बहिष्कार के विरुद्ध साहसी खड़े होना परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप है। घर-परिवार और समुदाय में कमजोर वर्गों के प्रति दया और साहसपूर्ण नैतिकता को बनाए रखना चाहिए।
संक्षिप्त समापन
एदोम के विरुद्ध दंड की घोषणा इस बात का संकेत है कि प्रभु न्याय के नियमों से मुक्त नहीं रहते। विरोधी-निष्कर्ष और भाई-भाई के बीच की दुश्मनी के कारण भी परमेश्वर सत्य और दया के मार्ग पर ही चलता है। इस वचन में दी गई सीख, यह कि अन्याय की कोई सीमा नहीं होती, हमारे दिन-प्रतिदिन के आचरण में सत्य और दया के संतुलन की मांग करती है।
सीधे उद्धरण (चितावनी)
सार-संकेत: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-domain कार्यों से संचित विचारों के अनुसार इस पाठ की व्याख्या में उनका सामान्य संतुलन उद्धृत किया गया है; उनके पूर्ण उद्धरण यहां संक्षेप में नहीं दिए गए हैं, पर स्पष्ट प्रेरणा वही है कि दण्ड तब तक रुकता नहीं जब तक अन्याय का अंत न हो।