Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 25:30 — तत्काल संदर्भ और आध्यात्मिक सन्देश
उक्त पदचिह्न यह संकेत देता है कि भविष्यद्वाणी की रीति से कहे गए शब्द तबाही के पूर्व चेतावनी-घोषणा के रूप में नहीं, बल्कि ईश्वर की आवाज और न्याय की गरज के रूप में आते हैं। यहाँ יהוה ऊपर से गरजता है, पवित्र धाम से अपना शब्द सुनाता है, और चराई के स्थान तथा पृथ्वी के निवासियों के विरुद्ध लपट-लहराते आह्वान के साथ हुकूमत का उद्घोष करता है। यह दृश्य एक शास्त्र-संगत आह्वान है कि लोगों के हृदय में ईश्वर की सर्वशक्तिमान सत्ता और न्याय का डर बसे।
क्या बताता है यह पाठ ईश्वर या विश्वास के बारे में
1) ईश्वर की प्रमुख सत्ता: ऊपर से गरजना और पवित्र धाम से शब्द सुनाने की मानवीय समझ से परे ईश्वर की उच्च सत्ता स्पष्ट होती है। यह बताता है कि भविष्यद्वाणी केवल मानव कल्पना नहीं, बल्कि परमेश्वर की आवाज है।
2) न्याय के दायरे में आना: “अपने शब्द सुनाएगा” और “अपने विरुद्ध ललकारेगा” दोनो मिलकर दिखाते हैं कि परमेश्वर उन ठहरावों को नहीं छोड़ते जिनमें दया-न्याय की मांग है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
- गरजना: यह सिर्फ डरावनी आवाज नहीं, परमेश्वर के समर्थ आह्वान का चित्र है, जो लोगों के दिलों में चेतना की लहरें उठाता है।
- पवित्र धाम: ईश्वर की स्थानिक और पवित्र सत्ता का प्रतीक; यहाँ से उनका शब्द और निर्णय आता है।
- पृथ्वी के निवासियों के विरुद्ध: व्यापक प्रभाव की चेतावनी—सभी की जवाबदेही और न्याय की सार्वभौमिकता।
संबंधित पद
- प्रेरिती 10:11: नबी की चेतावनी और ईश्वर की महिमा का अभिव्यक्ति—यही रीतियाँ यहाँ भी प्रकाशित होती हैं कि संदेश हर दिशाओं को प्रभावित करता है।
- प्रकाशितवाक्य 10:11: भविष्यवाणी की चेतावनी और उसकी सङ्कीर्तन की पुष्टि—समय के अंत तक न्याय का दरबार सक्रिय रहता है।
इन संदर्भों से संकेत मिलता है कि परमेश्वर की आवाज न केवल भविष्य की घटना की जानकारी देती है, बल्कि लोगों के बाह्य आचरण और आंतरिक परिवर्तन की मांग भी करती है।
आधुनिक जीवन में इसका अनुप्रयोग
सार-संक्षेप
यिर्मयाह 25:30 बताता है कि ईश्वर की महिमा और न्याय की गरज वैश्विक परिश्रम और व्यक्तिगत जीवन दोनों पर प्रभाव डालती है। नबी की आवाज से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर अपनी पवित्र धाम से सम्मेलन और निर्णय सुनाता है, और यह संदेश हर जगह पहुँचे—ताकि सभी लोग खुद को सच के सामने जवाबदेह समझें।
उद्धृत अंशों के संकेत
अगर आप किसी तात्कालिक उद्धरण की चाह रखते हैं, तो Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी में इस प्रकार के विचार मिलते हैं: वे अक्सर ईश्वर की ऐतिहासिक न्याय-विद्या, दया-न्याय और भविष्यवाणी के प्रभाव को संजोते हैं—परंतु यहाँ पूर्ण वाक्यों को उद्धृत नहीं किया गया है। आवश्यक संदर्भों के लिए वे स्रोतों में संक्षेपित टिप्पणी देते हैं ताकि पाठक वर्तमान पाठ के साथ गहराई से जुड़ सकें।