यिर्मयाह 25:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वे उसे पीकर उस तलवार के कारण जो मैं उनके बीच में चलाऊँगा लड़खड़ाएँगे और बावले हो जाएँगे।”

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यिर्मयाह 25:16 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 25:16 का पाठ और उसका संदर्भ

यिर्मयाह द्वारा परमेश्वर के संदेश के भाग के रूप में यह verse उन लोगों के भाग्य का चित्र प्रस्तुत करता है जो परमेश्वर की इच्छा के अनुसार नहीं चलते। यहाँ तलवार का संकेत है, जिसे परमेश्वर उठाएगा ताकि असंतोष और आत्म-चूक के कारण युद्घ-क्षेत्र में उनका अभिशाप व्यक्त हो। वह बात जो नबी के समय से आज तक बचे तत्वों के रूप में उभरती है, वह है—अपने मन को माने बिना भाग्य-विधाता बनने की कुप्रवृत्ति की प्रतिक्रिया में ईश्वर का न्याय।

मुख्य विचार

यह वचन बताता है कि जब लोग ईश्वर के उपायों से भागते हैं और उनसे चूकते हैं, तो वे स्वयं अपनी प्रवृत्ति के अनुसार पीड़ित होते हैं। “वे उसे पीकर” कहना एक रूपक है कि वे असंतोष, अस्थिरता और परिपक्व निर्णय लेने की क्षमता खो बैठते हैं, क्योंकि तलवार उनके बीच में चलाने के कारण वे भ्रमित, अस्थिर और बावले हो जाते हैं। यह चेतावनी उन लोगों के लिए है जो ईश्वरीय नियमों को तिरस्कार करते हैं और परिणामस्वरूप सामाजिक-राजनीतिक अस्थिरता का सामना करते हैं।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • न्याय-तत्व और दण्ड: परमेश्वर के साथ कदमताल न करने पर न्याय आता है; यह वचन यह बताता है कि दंड नहीं एकत्रित होना है, बल्कि कारण-प्रभाव के तहत परिणाम स्पष्ट होता है।
  • अपनत्व और बावलापन: जब लोग सत्य को ठुकराते हैं, उनके भीतर आत्म-चेतना के साथ भ्रम और बेचैनी बढ़ती है—युद्ध-पीड़न और आंतरिक असंतोष का तसवीर उभरती है।
  • मानवीय निर्णय बनाम परमेश्वर की योजना: लोग अपनी योजनाओं को प्राथमिकता देते हैं, पर परमेश्वर की योजना अंततः सर्वोपरि रहती है।

संबंधित पद

• यिर्मयाह 25:15–17 में वही संदेश विस्तार से आता है कि राजा-राय और जातियों के लिए परमेश्वर का क्रोध कैसे प्रकट होता है जब वे उसके विरुद्ध जाते हैं।

• यिर्मयाह 9:26 और 25:34–38 उपरोक्त विचारों के साथ न्याय और दया के संयोगों को दिखाते हैं, जहाँ प्रभु का न्याय और अविराम दया दोनों का संतुलन बनता है।

• इब्रानी 10:36-39 भी विश्वास के चलते सहने और धैर्य से इन परीक्षणों को पार करने का आग्रह देता है।

Practical reflection (व्यावहारिक विचार)

जो लोग अपनी योजनाओं को परमेश्वर की योजनाओं के ऊपर रखते हैं, वे अक्सर भ्रमित हो जाते हैं और जीवन के संकटों में न छोड़ते हैं। इस verse से सीख मिलती है कि चरित्तर की विवेकशीलता, नम्रता और परमेश्वर के मार्ग पर चलने का प्रयास ही शांति की कुंजी है। यदि आप भी ऐसी स्थिति में हों जहां आपके निर्णय अस्थिर लग रहे हों, तो अपने दिमाग को शांति से परमेश्वर के वचन के मूल्य की तरफ मोड़ें और देखिए कैसे वह आपकी राहों को स्थिर बनाता है।

क्यों यह पाठ आज भी महत्वपूर्ण है

यह verse मानव-नियोजन की अति-स्पर्धात्मकता के बीच यह याद दिलाता है कि आत्म-चालित निर्णय अक्सर विफल रहते हैं, जबकि परमेश्वर के साथ मिलकर चलना ही स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करता है।

संक्षिप्त सार

यिर्मयाह 25:16 में कहा गया है कि जो लोग परमेश्वर की सीमा और आदेशों से भटकते हैं, वे न केवल अपनी सुरक्षा खोते हैं, बल्कि उनकी सामूहिक नष्टता भी दिग्भ्रमित होकर प्रकट होती है। यह एक स्मरण है कि ईश्वर की व्यवस्था के अनुसार चलना जीवन की स्थिरता और सत्य का मार्ग है।

क्रॉस-रेफ़रेंसेस (संक्षेपित)

यिर्मयय 25:15–17: परमेश्वर के क्रोध के कारण आने वाला दण्ड; यिर्मयय 9:26 और 25:34–38: न्याय और दया का संतुलन; इब्रानी 10:36-39: धैर्य एवं विश्वास के साथ परीक्षणों को पार करना।

मैथ्यू Henry, Barnes और Clarke से स्पष्ट उद्धरण केवल जहाँ उपलब्ध हों वहीं शामिल हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 25:16 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तू भी मतवाली होगी, तू घबरा जाएगी; तू भी शत्रु के डर के मारे शरण का स्थान ढूँढ़ेगी।

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बाबेल यहोवा के हाथ में सोने का कटोरा था, जिससे सारी पृथ्वी के लोग मतवाले होते थे; जाति-जाति के लोगों ने उसके दाखमधु में से पिया, इस कारण वे भी बावले हो गए। (प्रका. 14:8, प्रका. 17:2,4, प्रका. 18:3)

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परन्तु जब-जब वे उत्तेजित हों, तब मैं भोज तैयार करके उन्हें ऐसा मतवाला करूँगा, कि वे हुलसकर सदा की नींद में पड़ेंगे और कभी न जागेंगे, यहोवा की यही वाणी है।

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