Old Testament
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नहूम 3:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तू भी मतवाली होगी, तू घबरा जाएगी; तू भी शत्रु के डर के मारे शरण का स्थान ढूँढ़ेगी।
नहूम 3:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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नहूम 3:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 2:10 (HINIRV) »
यहोवा के भय के कारण और उसके प्रताप के मारे चट्टान में घुस जा, और मिट्टी में छिप जा। (प्रका. 6:15, यशा. 15-16, लूका 23:30)

यशायाह 49:26 (HINIRV) »
जो तुझ पर अंधेर करते हैं उनको मैं उन्हीं का माँस खिलाऊँगा, और, वे अपना लहू पीकर ऐसे मतवाले होंगे जैसे नये दाखमधु से होते हैं। तब सब प्राणी जान लेंगे कि तेरा उद्धारकर्ता यहोवा और तेरा छुड़ानेवाला, याकूब का शक्तिमान मैं ही हूँ।” (प्रका. 16:6)

प्रकाशितवाक्य 6:15 (HINIRV) »
पृथ्वी के राजा, और प्रधान, और सरदार, और धनवान और सामर्थी लोग, और हर एक दास, और हर एक स्वतंत्र, पहाड़ों की गुफाओं और चट्टानों में जा छिपे; (यशा. 2:10, यशा. 2:19)
नहूम 3:11 के immediate setting
पद नहूम 3:11 में नहानमी की शक्तिशाली चकित कर देने वाली पराजय का चित्र है। नहेम के वचन विस्तार से उस सामಾನ್ಯ अंधविश्वास, अहंकार और असफल सुरक्षा से पर्दा उठाते हैं, जिसे राजसी ठाठ-बाट ने अपनाया था। जब शत्रु उसे घेरते हैं और भय उसे घेरते हैं, तब वह भी अपने भरोसे के स्थानों से भागने की चेष्टा करती है। यह सूक्ति एक सामान्य सत्य को उजागर करती है: दूसरे के डर से भी अधिक भय और पतन की स्थिति उन लोगों के लिए है जो अपनी सुरक्षा केवल मानव सामर्थ्य और सत्ता पर मानते हैं।
यह पंक्ति क्या बताती है—ईश्वर और विश्वास के बारे में
यह पाठ यह दिखाता है कि प्रभु के न्याय से बचना संभव नहीं, और शत्रु के भय से मुक्त रहने का उपाय केवल परमेश्वर की महिमामय योजना में है। यह एक प्रकार का संकेत है कि अत्यधिक आत्म-विश्वास और धारणाओं के कारण लोग परमेश्वर की सहायता की अनदेखी कर देते हैं। नहूम भविष्यवाणी कर रहा है कि दुष्ट राजा और उसकी सेना भी उसी भय में गिरेंगे जिसमें वे अन्य देशों को गिराते रहे हैं। यह भरोसा देता है कि परमेश्वर सत्ता-प्रधान है और उसके निर्णय से अंततः सब कुछ मिलता-जुलता है।
सारगर्भ शब्दावली और चित्र
मतवाली होगी—अपने-अपने शृंगार के पीछे शारीरिक और मनोवैज्ञानिक ऊँचाई की दिखावा करना; यहाँ यह दर्शाता है कि अभिमान और दर्प उन्हीं के पतन के कारण बनते हैं।
घबरा जाएगी—आत्मिक अस्थिरता और भय, जो गलत निर्णयों और भागदौड़ में परिणत होते हैं।
शरण का स्थान ढूँढ़ेगी—मान-सीमा से दूर जाकर अस्थिरता स्थान ढूंढ़ना; वे परम सुरक्षा कहाँ पाते हैं, यह स्पष्ट है कि केवल परमेश्वर के पास ही स्थिर आश्रय है।
उद्धृत पंक्तियों के साथ सीधे संदर्भ (Cross-references)
इन संदर्भों में दिखता है कि भय और अहंकार के विरुद्ध परमेश्वर पर निर्भर रहना ही सच्चे साहस का मार्ग है और शत्रु का भय भी उसी परास्त होता है।
अभी-का लागू दृष्टिकोण
आज के संदर्भ में यह पाठ हमें याद दिलाता है कि जीवन की आपात स्थितियों में भी हम किस स्थान पर टिके रहते हैं। जब संसार भय, अराजकता और अहंकार से घिरा दिखे, तब हमें निम्न बिंदुओं पर चलना चाहिए:
मूल विचार को सुगठित सार
नहूम 3:11 का संकेत है कि जो अपनी सुरक्षा मानवीय शान और शत्रुओं के भय पर टिकाते हैं, वे भी अंततः भयाक्रांत होंगे। पर परमेश्वर की न्याय-सीढ़ी पर आधारित आस्था ही स्थिर आश्रय है। यह संदेश आज भी प्रासंगिक है: भय के बजाय विश्वास, अहंकार के बजाय नम्रता, और भागदौड़ के बजाय परमेश्वर की योजना की खोज—यही वास्तविक सुरक्षा है।
पांडुलिपि उद्धरण: नीचे दिए गए पंक्तियों के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से जुड़ी संक्षिप्त दृष्टि मिलती है—परन्तु पूर्ण पाठ नहीं दिया गया है; केवल उनके विचारों के संगत निष्कर्ष यहाँ समाहित हैं:
Matthew Henry: इस प्रकार के भाग्य का तात्पर्य यह है कि दुष्टों की उच्च-कीर्ति भी उनकी पतन को जन्म देती है; भय के समय सचाई सामने आ जाती है।
Albert Barnes: अहंकार और भय व्यक्ति को परमेश्वर से दूर कर देता है; परमेश्वर के विरोधाभास में पूरी सुरक्षा नहीं मिलती।
Adam Clarke: इस प्रकार के लाइनें यह दिखाती हैं कि दुष्टों की योजनाएं उनकी ही चपेट में आ जाती हैं; शरण केवल नींव से मिलती है—यानी परमेश्वर के साथ।