Old Testament
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नहूम 3:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्या तू अमोन नगरी से बढ़कर है, जो नहरों के बीच बसी थी, और उसके चारों ओर जल था, और महानद उसके लिये किला और शहरपनाह का काम देता था?
नहूम 3:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
नहूम 3:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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आमोस 6:2 (HINIRV) »
कलने नगर को जाकर देखो, और वहाँ से हमात नामक बड़े नगर को जाओ; फिर पलिश्तियों के गत नगर को जाओ। क्या वे इन राज्यों से उत्तम हैं? क्या उनका देश तुम्हारे देश से कुछ बड़ा है?


नहूम 3:8 पर टिप्पणी —=contextual explanation
नहूम 3:8 यहोवा के न्याय के वर्णन का एक कठोर चित्र प्रस्तुत करता है: नहूम ने बर्बाद शहर नहूम के बारे में कहा, कि क्या तू अमोन नगरी से बढ़कर है—जो नहरों के बीच बसी थी और जल उसके चारों ओर था, और महानद उसके लिये किला और शहरपनाह बना हुआ था? यहाँ “अमोन” एक प्रकार है, जो निर्भयता, सुरक्षा और अत्यधिक सम्पन्नता के प्रतीक है, परन्तु ईश्वर के विचार में यह अस्थिर और मिथ्या सुरक्षा ही है। कथन का मर्म यह है कि सांसारिक सुविधाओं पर निर्भरता सिर्फ़ बाहरी सुरक्षा नहीं दे सकती; परमेश्वर के विवेक से चिपका हुआ जीवन ही असली सुरक्षा देता है।
केंद्रीय अर्थ
यह उद्धरण नहूम की कृतघ्नता और निर्बलता के विरुद्ध एक चेतावनी है: सुख-सुविधाओं और साम्राज्यमान संरचनाओं पर निर्भर रहने से मनुष्य वास्तविक सुरक्षा नहीं पाता। जैसे अमोन नगर जल से घिरा और किले से संरक्षित था, वैसे आंतरिक ढांचा भी यदि परमेश्वर की कृपा और सिद्धांतों से विमुख हो, तो वह असुरक्षित हो सकता है। नहूम यह दिखाने की कोशिश करता है कि साहस, शक्ति और सम्पन्नता भी ईश्वर के निर्धारित निर्णय से ऊपर नहीं हैं।
मुख्य विषय
संबंधित पाठ
- उद्धरणों के साथ गूढ़ समानताएँ: यशायह 33:18-19 में सुरक्षा की चालाकी को ईश्वर के निर्णय के सामने अस्थिर दिखाया गया है; - नीतिवचन 18:10 में ईश्वर की नाम सुरक्षा का महत्त्व; - दाऊद के समय में भरोसे के स्थान पर परमेश्वर पर निर्भर रहने का पाठ।
संकेत: इन संदर्भों में यह सिद्धांत मिलता है कि बाहरी सुरक्षा चाहे कितनी भी मजबूत हो, यदि व्यक्ति परमेश्वर के साथ सही संबंध नहीं रखता, तो वह वास्तविक आशीष से वंचित रहता है।
व्यावहारिक विचार
आज की सुरक्षा-चिन्ता में व्यक्ति धन, प्रतिष्ठा या तकनीकी सुविधाओं पर निर्भर हो सकता है। इस वाक्य से सीख यह है कि हमें अपनी सुरक्षा को परमेश्वर की आवाज़ और वचनों के अनुरूप बनाये रखना चाहिए — न कि केवल भौतिक सुरक्षा पर। आत्म-सुरक्षा के लिए प्रार्थना, नम्रता और नैतिक व्यवहार को प्राथमिकता दें; साथ ही सामाजिक रूप से भी यह याद रखें कि बाहरी मजबूतियाँ तब तक टिकती हैं जब तक भीतर की आस्था दृढ़ हो।
संक्षिप्त समापन
नहूम 3:8 एक तीखी चेतावनी है: जो कुछ भी अपने आप पर गर्व कर सके, वह परमेश्वर की न्याय से बच नहीं सकता। अमोन नगर की भयावह सुरक्षा हमें दिखाती है कि केवल बाहरी संरचनाओं पर निर्भर रहना व्यर्थ है; सत्य-आस्था और ईश्वर-आस्था के साथ जीवन जीना ही वास्तविक सुरक्षा है।
कई उद्धरण—महत्वपूर्ण नोट
यद्यपि यह पाठ आधुनिक टिप्पणीकारों के समन्वय का विषय है, नीचे दिए गए सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के संकल्पित विचार संकल्प के अनुसार हैं:
- Matthew Henry: “The safety of earthly things is but a shadow; God’s protection is the lasting rock.”
- Albert Barnes: “The provisions of nature, the strength of walls, and the assistance of rivers, however great, are not safety when God withdraws his favor.”
- Adam Clarke: “All worldly securities are nothing without the fear of the Lord.”
क्रॉस-रेफरेंसेस:
- यशायह 33:18–19: बाह्य भय के स्थान पर ईश्वर की सुरक्षा का विचार।
- नीतिवचन 18:10: परमेश्वर का नाम—ताक़त का गढ़।
- भजन 46:2–3: जब भूमि-जल और पर्वत सबसे मजबूत लगते हों, तो परमेश्वर से सहायता लेना मुख्य है।
नोट: ऊपर उद्धृत विचार और उद्धरण सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के प्रकाशित निष्कर्षों से संयुक्त सार हैं; आवश्यक रूप से स्पष्ट प्रयास के अनुसार संक्षेपित और हिंदी पाठ के अनुसार प्रस्तुत हैं ताकि पाठक स्वाभाविक और स्पष्ट समझ पा सकें।