यशायाह 19:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और समुद्र का जल सूख जाएगा, और महानदी सूख कर खाली हो जाएगी;

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यशायाह 19:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 19:5 का संदर्भ एवं उसका अर्थ

यशायाह 19 अध्याय नबियों के एक अग्रिम संदर्भ को दर्शाता है जहाँ ईगिप्त का भाग्य और उसकी बहुधारा सत्ता-स्थिरता भगवान की चमत्कारी योजना के द्वारा विचलित होगी। यह आयत समुद्र और नदियों के जल के सूख जाने की भविष्यवाणी के रूप में ईश्वरीय न्याय और परिवर्तन का संकेत देती है। यहाँ जल का सूखना केवल प्राकृतिक परिवर्तन नहीं है, बल्कि सामाजिक-आर्थिक और धार्मिक परिदृश्य के बड़े परिवर्तन का चित्रण है, जब ईश्वर सत्ता के स्थानापन्न से रचना करता है।

मुख्य अर्थ

पर्यावरणीय संकेत के साथ यह बताता है कि निर्बलताओं और अत्याचारों के ऊपर ईश्वर की निर्णायक सत्ता है। समुद्र और महानदी के सूख जाने का चित्रण दिखाता है कि प्राकृतिक-आकड़े और राष्ट्र-राज्य—दोनों अंतत: परमेश्वर के नियंत्रण के अधीन हैं। यह परिवर्तन जातियों के बीच के असंतुलन और मिस्र-ऊत्साह के पुराने ढांचे को बदलने की प्रतीकात्मक भाषा है।

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  • ईश्वर की न्यायोचित सत्ता: प्राकृतिक चक्र और जल-स्त्रोतों का संतुलन भगवान के हाथ में है, न कि मनुष्यों के राजनीतिक प्रयासों में।
  • समाकलन और पुनःस्थापना: जल की कमी से सामाजिक-आर्थिक विकटता उजागर होती है; पर यही वेदना परिवर्तन की पहली कड़ी बनती है जो राष्ट्रों के लिए नई नयी दिशा खोलती है।
  • प्रभु के संदेश की सार्वभौमिकता: मिस्र के समान चिह्नों के माध्यम से यह दिखता है कि ईश्वर की महत्त्वाकांक्षा सभी देशों के लिए समान है, किसी एक देश के लिए विशेष नहीं।

संभव cross-reference

1) यशायाह 18:4— एक समान प्राकृतिक अलंकार में, आत्मा के निर्देश द्वारा राष्ट्र-राज्यों के भाग्य की दिशा प्रति-स्थापित होती है। यह दिखाता है कि प्रकृति सब के लिए एक मीटर है, जिसमें भगवान के वचन की गूंज रहती है।

2) यואל 2:30-31— आकाश से चमत्कारिक घटनाओं के प्रतीक, जो परिवर्तन और न्याय की समय-सीमा को इंगित करते हैं।

3) दानिय्येल 2:44— मनुष्यों के साम्राज्यों के टिके रहने का स्थायित्व न रहने की बात, क्योंकि परमेश्वर ही सभी साम्राज्यों को नियंत्रित करता है।

व्यावहारिक विचार

यह आयत हमें यह सीख देती है कि हमें परिस्थितियों से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि वास्तविक परिवर्तन परमेश्वर के नियंत्रण में है। संकट के समय में भी हमारे विश्वास को स्थिर रखना चाहिए; वह जल-चक्र की गति की तरह निर्भरता और पुन:स्थापना की राह खोलते हैं। विश्वसनीयता और न्याय के लिए आर्थिक-चाल-चलन में ईश्वरमय मूल्यांकन को प्राथमिकता दें, ताकि समाज में पारदर्शिता और करुणा बढ़े।

संक्षिप्त सार

यशायाह 19:5 में समुद्र और नदी का सूखना एक दिव्य परिवर्तन की भविष्यवाणी है, जो यह संकेत देती है कि परमेश्वर ने सभी जल-स्त्रोतों और संसाधनों को नियंत्रण में रखा है। यह बदलाव न केवल प्राकृतिक दृश्य बदलता है, बल्कि सामाजिक-आर्थिक और धार्मिक क्षेत्रों में भी एक नई दिशा की शुरुआत करता है—क्योंकि प्रभु के राज्य में सत्य और न्याय सर्वोपरि रहते हैं।

पूर्वकथन उद्धरण (यदि उपलब्ध): Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विचारों के साथ संलग्न विश्लेषण में इन चिन्हित विचारों को सहजता से समाहित किया गया है; नीचे सीधे उद्धृत शस्त्र-वाक्यांश पंक्तियों के रूप में उद्धृत किया गया है—“…” (जहाँ उपलब्ध)

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 19:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इसलिए यहोवा कहता है, “मैं तेरा मुकद्दमा लड़ूँगा और तेरा बदला लूँगा। मैं उसके ताल को और उसके सोतों को सूखा दूँगा; (प्रका. 16:12)

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मैं नदियों को सूखा डालूँगा, और देश को बुरे लोगों के हाथ कर दूँगा; और मैं परदेशियों के द्वारा देश को, और जो कुछ उसमें है, उजाड़ करा दूँगा; मुझ यहोवा ही ने यह कहा है।

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और यदि मिस्र का कुल वहाँ न आए, तो क्या उन पर वह मरी न पड़ेगी जिससे यहोवा उन जातियों को मारेगा जो झोपड़ियों का पर्व मानने के लिये न जाएँगे?

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