Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66Verse
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यशायाह 19:5 का संदर्भ एवं उसका अर्थ
यशायाह 19 अध्याय नबियों के एक अग्रिम संदर्भ को दर्शाता है जहाँ ईगिप्त का भाग्य और उसकी बहुधारा सत्ता-स्थिरता भगवान की चमत्कारी योजना के द्वारा विचलित होगी। यह आयत समुद्र और नदियों के जल के सूख जाने की भविष्यवाणी के रूप में ईश्वरीय न्याय और परिवर्तन का संकेत देती है। यहाँ जल का सूखना केवल प्राकृतिक परिवर्तन नहीं है, बल्कि सामाजिक-आर्थिक और धार्मिक परिदृश्य के बड़े परिवर्तन का चित्रण है, जब ईश्वर सत्ता के स्थानापन्न से रचना करता है।
मुख्य अर्थ
पर्यावरणीय संकेत के साथ यह बताता है कि निर्बलताओं और अत्याचारों के ऊपर ईश्वर की निर्णायक सत्ता है। समुद्र और महानदी के सूख जाने का चित्रण दिखाता है कि प्राकृतिक-आकड़े और राष्ट्र-राज्य—दोनों अंतत: परमेश्वर के नियंत्रण के अधीन हैं। यह परिवर्तन जातियों के बीच के असंतुलन और मिस्र-ऊत्साह के पुराने ढांचे को बदलने की प्रतीकात्मक भाषा है।
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संभव cross-reference
1) यशायाह 18:4— एक समान प्राकृतिक अलंकार में, आत्मा के निर्देश द्वारा राष्ट्र-राज्यों के भाग्य की दिशा प्रति-स्थापित होती है। यह दिखाता है कि प्रकृति सब के लिए एक मीटर है, जिसमें भगवान के वचन की गूंज रहती है।
2) यואל 2:30-31— आकाश से चमत्कारिक घटनाओं के प्रतीक, जो परिवर्तन और न्याय की समय-सीमा को इंगित करते हैं।
3) दानिय्येल 2:44— मनुष्यों के साम्राज्यों के टिके रहने का स्थायित्व न रहने की बात, क्योंकि परमेश्वर ही सभी साम्राज्यों को नियंत्रित करता है।
व्यावहारिक विचार
यह आयत हमें यह सीख देती है कि हमें परिस्थितियों से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि वास्तविक परिवर्तन परमेश्वर के नियंत्रण में है। संकट के समय में भी हमारे विश्वास को स्थिर रखना चाहिए; वह जल-चक्र की गति की तरह निर्भरता और पुन:स्थापना की राह खोलते हैं। विश्वसनीयता और न्याय के लिए आर्थिक-चाल-चलन में ईश्वरमय मूल्यांकन को प्राथमिकता दें, ताकि समाज में पारदर्शिता और करुणा बढ़े।
संक्षिप्त सार
यशायाह 19:5 में समुद्र और नदी का सूखना एक दिव्य परिवर्तन की भविष्यवाणी है, जो यह संकेत देती है कि परमेश्वर ने सभी जल-स्त्रोतों और संसाधनों को नियंत्रण में रखा है। यह बदलाव न केवल प्राकृतिक दृश्य बदलता है, बल्कि सामाजिक-आर्थिक और धार्मिक क्षेत्रों में भी एक नई दिशा की शुरुआत करता है—क्योंकि प्रभु के राज्य में सत्य और न्याय सर्वोपरि रहते हैं।
पूर्वकथन उद्धरण (यदि उपलब्ध): Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विचारों के साथ संलग्न विश्लेषण में इन चिन्हित विचारों को सहजता से समाहित किया गया है; नीचे सीधे उद्धृत शस्त्र-वाक्यांश पंक्तियों के रूप में उद्धृत किया गया है—“…” (जहाँ उपलब्ध)