यशायाह 19:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और मिस्रियों की बुद्धि मारी जाएगी* और मैं उनकी युक्तियों को व्यर्थ कर दूँगा; और वे अपनी मूरतों के पास और ओझों और फुसफुसानेवाले टोन्हों के पास जा जाकर उनसे पूछेंगे;

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यशायाह 19:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 19:3 का महत्व और मौर्यसार

यह पद मिस्र के लिए एक निर्णायक चेतावनी है कि उनकी मानवी बुद्धि और युक्तियाँ सीमित हैं जब परमेश्वर का उद्घोष सामने आता है। मिस्र की सामर्थ्य, विद्वत्ता और ज्योतिष-ओझाओं के सम्मिलित प्रयासों पर यह कविता निशाना साधती है कि परमेश्वर के सामने सारी पृथ्वी की कलाकारी और माया फीकी पड़ जाती है। इस पद में यह स्पष्ट किया गया है कि भगवान अपनी योजना के अनुसार राष्ट्रों के शस्त्रों और रणनीतियों को कुचल सकता है, और उन पर भरोसा करने वालों को निराशा मिलती है।

ऐतिहासिक संदर्भ और मूल संदेशन

यशायाह ने असुर-राज तथा मिस्र जैसे शक्ति-केन्द्रों के समय में यह भविष्यवाणी दी थी। अस्थिर राजनैतिक परिदृश्य के बीच, मिस्र एक बड़े तंत्र के रूप में अनुभव शक्ति और ज्ञान का केंद्र था—फिर भी ईश्वर का निर्णय सर्वोपरि है। इस पाठ में मिस्रियों की बुद्धि मारी जाने की बात है—यानी उनके कूट-कथन, रणनीतियाँ और लाभ-हानि के गणित सब कुछ परमेश्वर के सामने तुच्छ लगेंगे। वे अपनी मूर्तियों और ओझाओं से सहायता माँगेंगे, पर नतिजा उनके लिए शून्य होगा; यह नयी वास्तविकता दर्शाता है कि प्रकृत बुद्धि से परे एक दिव्य मार्गदर्शक प्रत्यक्ष होता है।

मुख्य संदेश

1) मानव की समृद्ध बुद्धि भी परमेश्वर के सामने निर्भर है।
2) असत्य-विश्वास और दर्द-उद्धार के उपाय एक सीमित ढांचे में रहते हैं; परमेश्वर के साथ निर्भरता ही स्थायी समाधान है।
3) रीति-रिवाज, मूर्तिपूजा और ओझाओं पर भरोसा तब तक है जब तक उसे परमेश्वर की योजना से अलग रखा जाए; परंतु उसकी योजना जब आए तो सब कुछ भंग हो सकता है।

बाइबल की अन्य प्रवचनों से सम्बद्ध उद्गोष

- निर्बलता के समय भी परमेश्वर का भरण-पोषण भरोसे के योग्य होता है (यशायाह 41:10; 46:8-11)।
- विश्व के शक्तिशाली तंत्र भी एक दिन उनके भीतर की ध्वस्तियाँ देखते हैं, क्योंकि ईश्वर ही सिंहासन पर बैठा है (सभोपदेशक 5:8-9; दानियेल 4:34-35)।
- मूर्ति-पूजा और अंधेरे तंत्र मानव-योजनाओं के विरुद्ध चेतावनी हैं; परमेश्वर ही जीवन का वास्तविक स्रोत है (यूहन्ना 4:24; यूहन्ना 14:6)।

क्रॉस-रेफरंस और उनके अर्थ

  • यशायाह 8:19-20 — ओझाओं से पूछना निष्क्रियता का संकेत है; परमेश्वर के वचनों में स्थिरता।
  • यशायाह 46:9-10 — परमेश्वर की योजना और उसके कामों की निष्कर्षता; इतिहास की दिशा उसी के हाथों में है।
  • रेम 11:33-36 — उसकी योजनाओं की गहराई और ज्ञान का सम्मान; नमन और समर्पण।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की दूरी और मनस्वी बुद्धि के बावजूद उसकी प्रेरणा और मार्गदर्शन सबसे ऊपर है।

DEVOTIONAL विचार

हम किस प्रकार अपनी सुरक्षा के लिए मनुष्यों के उपायों पर अधिक निर्भर रहते हैं? इस पद से प्रेरित होकर स्वयं से पूछें: क्या मैं अपने जीवन के निर्णयों में परमेश्वर की राह को प्राथमिकता देता/देती हूँ, या अपने विशेषज्ञों और उपकरणों पर अधिक भरोसा कर रहा/रही हूँ? वास्तव में ईश्वर के सामने हमारी सबसे बड़ी सुरक्षा उनकी योजना में समर्पण है। जब हम उनसे मार्गदर्शन माँगते हैं, तब जीवन के कठिन क्षण आत्मबल और शांति से भर जाते हैं, क्योंकि येशु ने कहा, मैं मार्ग हूँ, सच्चाई और जीवन हूँ।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 19:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यशायाह 8:19 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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जब लोग तुम से कहें, “ओझाओं और टोन्हों के पास जाकर पूछो जो गुनगुनाते और फुसफुसाते हैं,” तब तुम यह कहना, “क्या प्रजा को अपने परमेश्‍वर ही के पास जाकर न पूछना चाहिये? क्या जीवितों के लिये मुर्दों से पूछना चाहिये?” (लैव्य. 20:6, 19:31)

दानिय्येल 2:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
दानिय्येल 2:2 (HINIRV) »
तब राजा ने आज्ञा दी, कि ज्योतिषी, तांत्रिक, टोन्हे और कसदी बुलाए जाएँ कि वे राजा को उसका स्वप्न बताएँ; इसलिए वे आए और राजा के सामने हाज़िर हुए।

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1 इतिहास 10:13 (HINIRV) »
इस तरह शाऊल उस विश्वासघात के कारण मर गया, जो उसने यहोवा से किया था; क्योंकि उसने यहोवा का वचन टाल दिया था, फिर उसने भूतसिद्धि करनेवाली से पूछकर सम्मति ली थी।

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