यशायाह 19:25 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि सेनाओं का यहोवा उन तीनों को यह कहकर आशीष देगा, धन्य हो मेरी प्रजा मिस्र, और मेरा रचा हुआ अश्शूर, और मेरा निज भाग इस्राएल।

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यशायाह 19:25 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 19:25 का अर्थ और संदर्भ

संक्षिप्त Meaning (सीधे शब्दों में): यह भविष्यवाणी यह कहती है कि यहोवा सेनाओं के उद्देश्य से मिस्र, अश्शूर और इस्राएल—तीनों—के लिए आशीष बोलता है; उनके लिए एक साथ उद्देश्य, उद्धार और सुरक्षा का प्रमाण है। यह उद्धार का विश्लेषण एकত্রित रूप से दिखाता है कि परमेश्वर तीनों में काम कर रहा है, भले ही वे विविध पथ पर हों।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यशायाह की पुस्तक में यह भाग उत्तर-पूर्व मिस्र और उत्तर-पूर्व के राज्यों के साथ इस्राएल के भविष्य के साथ जुड़ा हुआ है। यहाँ लक्ष्य यह दर्शाना है कि परमेश्वर की योजनाएं सत्ता-परस्त सीमाओं से परे हैं: मिस्र, अश्शूर और इस्राएल—तीनों ही परमेश्वर की आशीष और उद्धार के केंद्र बनेंगे। यह उद्धार इक्कीसवीं शताब्दी के संदर्भ से आधुनिक पाठक के लिए भी एक संदेश देता है कि परमेश्वर सबकी स्थिति, भूख, भय या वैमनस्य के बावजूद एक समन्वित योजना में काम करता है।

व्याख्या के मुख्य बिंदु

  • तीनों के लिए एक साथ आशीर्वाद: मिस्र, अश्शूर और इस्राएल—इनमें विविध सामाजिक-राजनीतिक हालात के बावजूद परमेश्वर का आशीर्वाद निर्धारित रहता है। यह दर्शाता है कि परमेश्वर का दयालु कार्यक्रम सभी के लिए है, भिन्नताओं के बावजूद उसका उद्देश्य एक है।
  • यहोवा की सेनाओं का क्रियाशीलता: यहोवा का नाम यहाँ शक्ति-शक्ति से जुड़ा है; वह उन परिस्थितियों को नियंत्रित करता है जो व्यक्ति-जाति-राज्य के बीच बनती हैं।
  • संगठन और सुरक्षा की दृष्टि: आशीर्वाद एक साझा सुरक्षा-तंत्र का संकेत देता है जो तीनों के वातावरण में स्थिरता बनाता है।

पश्चात्त्य अर्थ के 2-3 स्पष्ट cross-references (संक्षेप)

  • —जातियों के बीच सामंजस्य और उद्धार की एकरूपता की दिशा की अपेक्षा; यह संदर्भ बताता है कि गढ़ी गई सीमाओं के पार आशीष संभव है।
  • — न्याय और प्रकाश का प्रसार, अन्यजातियों के साथ परमेश्वर का मिशन।
  • — एक पौधा-प्रकार की भांति, बंधनों के पार एक नए समूह का गठन; सभी जातियाँ एक ही फसल में जुड़ती हैं।

विश्लेषणात्मक टिप्पणी (संरचित सार)

यह विराम दिखाता है कि परमेश्वर के उद्धार का कार्यक्रम अस्थिर शक्तियों से परे है। मिस्र और अश्शूर—दो विशाल साम्राज्य—भी अबसूच्य योजनाओं के हिस्से बनते हैं ताकि इस्राएल के साथ एक नया समन्वय बने। यह एक प्रेरक विश्वास-वाक्य है कि परमेश्वर की योजनाएं विभाजन नहीं, बल्कि एकता और भलाई की दिशा में चलती हैं।

संक्षिप्त उपयोगी निष्कर्ष

  1. प्रभु की योजना सभी समाजों के लिए है, न कि केवल एक राष्ट्र के लिए।
  2. विश्वास-यात्रा में विविध पथ एक साथ आ सकते हैं जब परमेश्वर का उद्देश्य सर्वोपरि हो।
  3. आज के पाठकों के लिए संदेश: अलग-अलग सामाजिक-राजनीतिक स्थितियों में भी ईश्वर की आशीष विविध रूपों में सामने आ सकती है।

कठोर परामर्श और करुणा

इन शब्दों से प्रेरित होकर हमें अपने जीवन में भी देखना चाहिए कि कैसे हम अपने समुदायों के बीच शांति, साझा सुरक्षा और सहयोग के लिए भूमिका निभा सकें। एक ऐसी व्यवस्था बनाएं जिसमें সকল के लिए आशीर्वाद और समर्थन हो, चाहे उनकी पृष्ठभूमि कोई भी हो।

महत्वपूर्ण उद्धरण (हवाला): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से अगर उपलब्ध हो तो आवश्यक छोटे-चित्र उद्धरण यहाँ संचित किए जाते; पूर्ण वाक्यों के पाठ नहीं दिए जाते।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 19:25 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यशायाह 29:23 (HINIRV) »
क्योंकि जब उसके सन्तान मेरा काम देखेंगे, जो मैं उनके बीच में करूँगा, तब वे मेरे नाम को पवित्र ठहराएँगे, वे याकूब के पवित्र को पवित्र मानेंगे, और इस्राएल के परमेश्‍वर का अति भय मानेंगे।

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मैं अपने लिये उसे देश में बोऊँगा, और लोरुहामा पर दया करूँगा, और लोअम्मी से कहूँगा, तू मेरी प्रजा है, और वह कहेगा, 'हे मेरे परमेश्‍वर'।” (रोम. 9:25, 1 पत. 2:10)

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व्यवस्थाविवरण 32:9 (HINIRV) »
क्योंकि यहोवा का अंश उसकी प्रजा है; याकूब उसका नपा हुआ निज भाग है।

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