Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66Verse
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यशायाह 29:23 का संदर्भ और संदेश
पद का आशय भीतर-बाहर से विचरता है: जिस समय परमेश्वर अपने काम को उनके बीच दिखाएगा, तब उनके संताने उसके नाम को पवित्र ठहराएँगे, याकूब के पवित्र को पवित्र मानेंगे, और इस्राएल के परमेश्वर का अति भय मानेंगे। ये शब्द अभिव्यक्ति हैं कि परमेश्वर की आशा औरHis पवित्रता देखने पर लोग कैसे प्रतिक्रिया करते हैं—उसकी महिमा से उनके हृदय झुकते हैं, और उनके जीवन में ईमानदारी की नई दिशा उभरती है।
ईश्वर और आस्था के बारे में पाठ का संकेत
यह पद यह बताता है कि परमेश्वर अपने उद्देश्य और कार्य को मजबूत तरीके से प्रस्तुत करेगा, ताकि लोगों की दृष्टि में उसकी पवित्रता स्पष्ट हो। जब वे देखेंगे कि उसका काम अपने बीच में है, तब उनके विश्वास की नींव और सम्मान उभरेंगे। यह आश्वासन है कि सभी प्रकार के भय, संशय और असंगतता के बावजूद ईश्वर अपने लोगों के बीच जीवंत रूप से कार्य कर रहा है, और लोग उसी कार्य को देखकर उसका सम्मान करने लगते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की व्याख्या
अन्य संबंधित पाठ
इन विचारों को समकालीन संदर्भ में समझने के लिए नीचे कुछ संदर्भ दिए जाते हैं, जिससे यह दिखता है कि परमेश्वर कैसे अपने लोगों के बीच पेश आता है:
आज के लिए अनुप्रयोग
इस Verses से प्रेरित होकर आज के विश्वासियों के लिए प्रमुख संदेश यह है कि परमेश्वर का काम हमारे जीवन में स्पष्ट रूप से प्रगट हो, ताकि हमारे विनय और आस्था में वृद्धि हो। जब हम देखते हैं कि वह हमारे बीच में है, तो हम उसके नाम के लिए अधिक सजग और समर्पित रहते हैं—आत्म-निष्ठा और नैतिकता के साथ। यह भी स्मरण रहे कि हर日चर्या में ईश्वर के साथ व्यवहार में पवित्रता की आहट बने, ताकि हमारे कृत्य और शब्द उसके महिमा के अनुरूप हों।
έως उद्धरण और सार
यह भाग Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकार के स्थूल विचारों से संगत है: वे तीनों परमेश्वर की पवित्रता और कल्याणकारी कार्य के महत्व को रेखांकित करते हैं कि जब लोग परमेश्वर के काम को सत्यापित कर लेते हैं, तो उनकी भक्ति और आस्था स्थिर बनती है। ध्यान दें कि यहाँ स्पष्ट उद्धरण नहीं बनाए हैं; आवश्यक मौन्य संकेतन के अनुसार, इन टिप्पणीकारों के चर्चित विचारों का सामान्य सार शामिल किया गया है।
क्रॉस-रेफरेंसेस से संकेतित विचार: