व्यवस्थाविवरण 32:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि यहोवा का अंश उसकी प्रजा है; याकूब उसका नपा हुआ निज भाग है।

व्यवस्थाविवरण 32:9 पद-दर-पद बाइबल टीका

reader-friendly overview

व्यवस्थाविवरण 32:9 में परमेश्वर अपने लोगों के प्रति अपने विवेकपूर्ण चयन को स्पष्ट करते हैं। यह वचन यह दर्शाता है कि यहोवा की निजीय प्रजा के रूप में इज़राइल का एक विशिष्ट भाग है, जिसका भाग्य और संरक्षण परमेश्वर के हाथों में है। यह आयत परमेश्वर की इच्छा, अधिकार, और उनके भक्तों के लिए उनकी निष्ठा की पुष्टि करती है।

verse in its chapter

इस अध्याय में मोशे द्वारा मतीन गीतवृत्ति के रूप में यहोवा की महिमा, उसकी न्याय-निष्ठा और चमत्कारपूर्ण पुराने अनुभवों के स्मरण की रचना की जाती है। 32:9 का केंद्र यह है कि याकूब (इस्राईल) परमेश्वर के उद्देश्य के अनुसार उसका निज भाग है, जबकि अन्यजातियों के बीच उनका आदान-प्रदान नहीं होता। यह एक संचित दावा है कि प्रभु ने इस जाति को अपने विधान और आशीषों के लिये चुना है, ताकि वे उसकी महिमा में जीवन पाते रहें।

main spiritual lesson

मुख्य आध्यात्मिक पाठ यह है: परमेश्वर अपने लोगों के अस्तित्व और भविष्य के बारे में पूर्ण नियंत्रण रखता है; वे उसका भाग हैं, इसलिए उनका सम्मान, सुरक्षा और मार्गदर्शन उसी से निर्भर है। यहूदियों के साथ-साथ हर वे व्यक्ति जो परमेश्वर पर विश्वास रखते हैं, उनके लिए यह सच प्रेरणा देता है कि उनका पहचान और भाग्य परमेश्वर की कृपा से निर्धारित है, न कि अपने प्रयासों से।

cross-references with brief explanations

  • निर्ग 19:5 – परमेश्वर बताता है कि यदि वे उसकी वाणी मानकर रहते हैं, तो वह उनका देश और उनकी प्रजा होंगे; यह यहाँ के भाग्य-सम्बन्धी विश्वास का पूर्व-संकेत है।
  • यहीश 41:8-9 – इस्राएल की निष्ठा और चयनित स्थिति की पुष्टि जो यहोवा ने उनके लिए निर्धारित की है; वे उसका किनारा बन जाते हैं।
  • मरकुल 12:28-31 – पहला और महान आदेश प्रेम परमेश्वर से और दूसरे अपने पड़ोस से; यह प्रतिनिधि है कि परमेश्वर की निवास-संरचना कैसे सामाजिक-आत्मा में प्रवाहित होती है।

careful application

1) अपनी पहचान को परमेश्वर के साथ बाँधें: आप अपनी पहचान को न केवल सामाजिक या पारिवारिक आधारों से न करें, बल्कि परमेश्वर के चयन और वादे से जोड़ें।

2) भरोसे की सक्रियता: निश्चय करें कि आप हर परिस्थिति में परमेश्वर की शिक्षा और प्रेरणा के अनुसार चलेंगे, ताकि आपका जीवन उसकी महिमा में बढ़े।

3) समुदाय का सम्मान: यह आयत बताती है कि परमेश्वर ने एक सामाजिक-आयाम में अपने लोगों को रखा है; इस कारण से भाईचारा और नैतिक उत्तरदायित्व बनते हैं—एक दूसरे के लिये सहायता और मार्गदर्शन।

concise summary

इस आयत के अनुसार यहोवा का अंश और याकूब का निज भाग उनके प्रेम और वचन से निर्धारित है। यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए संरक्षित, मार्गदर्शित और आशीषित योजना बनाते हैं; लोग उसी योजना में जीवन बिताते हैं।

यह commentary integrates insights from पुरातन सार्वजनिक-डायरी टिप्पणीकारों के सार से—यद्यपि किसी एक उद्धरण का पूरा पाठ यहाँ नहीं दिया गया है, पर उनकी प्रवृत्ति यह है कि परमेश्वर की निर्भरता, चयन और आशीष का बोध इस आयत के भीतर महत्त्वपूर्ण है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

व्यवस्थाविवरण 32:9 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

यिर्मयाह 10:16 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 10:16 (HINIRV) »
परन्तु याकूब का निज भाग उनके समान नहीं है, क्योंकि वह तो सब का सृजनहार है, और इस्राएल उसके निज भाग का गोत्र है; सेनाओं का यहोवा उसका नाम है।

1 पतरस 2:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 पतरस 2:9 (HINIRV) »
पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी, याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और परमेश्‍वर की निज प्रजा हो, इसलिए कि जिसने तुम्हें अंधकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। (निर्ग. 19:5-6, व्य. 7:6, व्य. 14:2, यशा. 9:2, यशा. 43:20-21)

निर्गमन 19:5 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
निर्गमन 19:5 (HINIRV) »
इसलिए अब यदि तुम निश्चय मेरी मानोगे, और मेरी वाचा का पालन करोगे, तो सब लोगों में से तुम ही मेरा निज धन ठहरोगे; समस्त पृथ्वी तो मेरी है।

व्यवस्थाविवरण 32 (HINIRV) Verse Selection

व्यवस्थाविवरण 32:1 व्यवस्थाविवरण 32:2 व्यवस्थाविवरण 32:3 व्यवस्थाविवरण 32:4 व्यवस्थाविवरण 32:5 व्यवस्थाविवरण 32:6 व्यवस्थाविवरण 32:7 व्यवस्थाविवरण 32:8 व्यवस्थाविवरण 32:9 व्यवस्थाविवरण 32:10 व्यवस्थाविवरण 32:11 व्यवस्थाविवरण 32:12 व्यवस्थाविवरण 32:13 व्यवस्थाविवरण 32:14 व्यवस्थाविवरण 32:15 व्यवस्थाविवरण 32:16 व्यवस्थाविवरण 32:17 व्यवस्थाविवरण 32:18 व्यवस्थाविवरण 32:19 व्यवस्थाविवरण 32:20 व्यवस्थाविवरण 32:21 व्यवस्थाविवरण 32:22 व्यवस्थाविवरण 32:23 व्यवस्थाविवरण 32:24 व्यवस्थाविवरण 32:25 व्यवस्थाविवरण 32:26 व्यवस्थाविवरण 32:27 व्यवस्थाविवरण 32:28 व्यवस्थाविवरण 32:29 व्यवस्थाविवरण 32:30 व्यवस्थाविवरण 32:31 व्यवस्थाविवरण 32:32 व्यवस्थाविवरण 32:33 व्यवस्थाविवरण 32:34 व्यवस्थाविवरण 32:35 व्यवस्थाविवरण 32:36 व्यवस्थाविवरण 32:37 व्यवस्थाविवरण 32:38 व्यवस्थाविवरण 32:39 व्यवस्थाविवरण 32:40 व्यवस्थाविवरण 32:41 व्यवस्थाविवरण 32:42 व्यवस्थाविवरण 32:43 व्यवस्थाविवरण 32:44 व्यवस्थाविवरण 32:45 व्यवस्थाविवरण 32:46 व्यवस्थाविवरण 32:47 व्यवस्थाविवरण 32:48 व्यवस्थाविवरण 32:49 व्यवस्थाविवरण 32:50 व्यवस्थाविवरण 32:51 व्यवस्थाविवरण 32:52

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