Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
व्यवस्थाविवरण 1 व्यवस्थाविवरण 2 व्यवस्थाविवरण 3 व्यवस्थाविवरण 4 व्यवस्थाविवरण 5 व्यवस्थाविवरण 6 व्यवस्थाविवरण 7 व्यवस्थाविवरण 8 व्यवस्थाविवरण 9 व्यवस्थाविवरण 10 व्यवस्थाविवरण 11 व्यवस्थाविवरण 12 व्यवस्थाविवरण 13 व्यवस्थाविवरण 14 व्यवस्थाविवरण 15 व्यवस्थाविवरण 16 व्यवस्थाविवरण 17 व्यवस्थाविवरण 18 व्यवस्थाविवरण 19 व्यवस्थाविवरण 20 व्यवस्थाविवरण 21 व्यवस्थाविवरण 22 व्यवस्थाविवरण 23 व्यवस्थाविवरण 24 व्यवस्थाविवरण 25 व्यवस्थाविवरण 26 व्यवस्थाविवरण 27 व्यवस्थाविवरण 28 व्यवस्थाविवरण 29 व्यवस्थाविवरण 30 व्यवस्थाविवरण 31 व्यवस्थाविवरण 32 व्यवस्थाविवरण 33 व्यवस्थाविवरण 34Verse
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सीधा अर्थ
व्यवस्थाविवरण 9:1 में कहा गया है कि इस्राएल को यरदन पार करके उनकी ताकत और बड़े नगरों से भयभीत नहीं होना चाहिए, क्योंकि ये जातियाँ और उनके शहर μεγάे हैं, परन्तु परमेश्वर उनका भाग्य तय कर चुका है और वे उसी सामर्थ्य से प्रभुत्व प्राप्त करने के लिए बुलाए गए हैं।
संदर्भ-परिप्रेक्ष्य
यह वचन इस्राएल के मोड़ पर हैं जब वे यरदन पार कर अंदर प्रवेश कर रहे थे। परमेश्वर ने उन्हें चेतावनी दी है कि उनकी विजय मात्र उनकी शक्ति से नहीं होगी, बल्कि देवत्व की योजना और उसकी कृपा से होगी। इस प्रसंग में यहूदियों को प्रेरित किया गया है कि वे उन्नत शक्तियों के कारण आत्मविश्वास न करें, बल्कि प्रभु के वचनों और आदेशों के अनुसार चलें।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटी थीम-सूची
अन्य संदर्भ और उनका संक्षिप्त प्रभाव
1) व्यवस्थाविवरण 7:1–2— परमेश्वर स्पष्ट करता है कि किस प्रकार वे जातियाँ रोकी जाएँगी और उन पर विजय की नीति कैसे चलेगी; इस क्रम में आक्रमण से पहले शांति और पूर्णता की तैयारी की जरूरत है।
2) व्यवस्थाविवरण 20:1–4— युद्ध की स्थितियों में परमेश्वर का साथ और सेनाओं की सुरक्षा के निर्देश; यह बताता है कि डर पर नहीं, बल्कि परमेश्वर के निर्देशों पर टिके रहना चाहिए।
3) जोश 1:6–9— साहस और दृढ़ता के लिए परमेश्वर की प्रेरणा; आत्म-विश्वास के बजाय ईश्वर के वचन को केन्द्र में रखना सिखाता है।
संदर्भ-उद्धृत विचार (सारगर्भित)
यह पंक्ति एक स्थिर धारणात्मक संदेश देता है: सफलता केवल भौतिक शक्ति पर नहीं, बल्कि परमेश्वर के अर्थो की आज्ञापालन पर निर्भर है। इस विचार को ध्यान में रखकर यहूदियों को हर परिस्थिति में निर्भय और वफ़ादार रहने को कहा गया है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
परिस्थितियाँ बड़ी हों या प्रतिरोध मजबूत—हम प्रायः नहीं जानते कि अगला पल कैसे होगा; फिर भी ईश्वर की वाणी और मार्गदर्शन पर भरोसा बनाये रखना चाहिए। अपनी क्षमताओं पर गर्व न करें, बल्कि परमेश्वर के वचन में स्थिर रहें।
योजित उद्धरण (पौराणिक टिप्पणीकारों से)
यदि आवश्यक हो, तो नीचे के प्रसिद्ध पवित्र-शास्त्र टिप्पणीकारों के विचारों से समर्थित निष्कर्ष साथ जोड़े जाते हैं: मार्फथो मेहरे (Matthew Henry), ऐल्बर्ट बार्न्स (Albert Barnes), आडम क्लार्क (Adam Clarke). इन लेखकों के स्पष्ट उद्धरण इस पंक्ति की व्याख्या को इतिहास-धर्मी ढाँचे में सजाते हैं; किन्तु सम्पूर्ण पाठ यहाँ संक्षेप में रखा गया है।
सार-सारिणी
यह पाठ यह स्मरण देता है कि संघर्ष की वास्तविकता परमेश्वर की योजना और उसकी सहायता पर आश्रित है। भरोसा, आज्ञापालन और धैर्य से ही विजय संभव है — भौतिक श्रेष्ठता से नहीं।