Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
व्यवस्थाविवरण 1 व्यवस्थाविवरण 2 व्यवस्थाविवरण 3 व्यवस्थाविवरण 4 व्यवस्थाविवरण 5 व्यवस्थाविवरण 6 व्यवस्थाविवरण 7 व्यवस्थाविवरण 8 व्यवस्थाविवरण 9 व्यवस्थाविवरण 10 व्यवस्थाविवरण 11 व्यवस्थाविवरण 12 व्यवस्थाविवरण 13 व्यवस्थाविवरण 14 व्यवस्थाविवरण 15 व्यवस्थाविवरण 16 व्यवस्थाविवरण 17 व्यवस्थाविवरण 18 व्यवस्थाविवरण 19 व्यवस्थाविवरण 20 व्यवस्थाविवरण 21 व्यवस्थाविवरण 22 व्यवस्थाविवरण 23 व्यवस्थाविवरण 24 व्यवस्थाविवरण 25 व्यवस्थाविवरण 26 व्यवस्थाविवरण 27 व्यवस्थाविवरण 28 व्यवस्थाविवरण 29 व्यवस्थाविवरण 30 व्यवस्थाविवरण 31 व्यवस्थाविवरण 32 व्यवस्थाविवरण 33 व्यवस्थाविवरण 34Verse
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व्यवस्थाविवरन 9:28 पर दिशतार्थ और संदर्भ
सीधा अर्थ: जैसा कि वे देश को छोड़कर लौटते समय कहेंगे कि यहोवा उन्हें उसी क्षेत्र में नहीं पहुँचा सका जिसे उसने उनके लिए वादा किया था, और उनके प्रति यहोवा की बड़ी कठिनाइयाँ बताई जाएँगी, ताकि उनके विरुद्ध उनका दुख-भरा इतिहास उद्धृत हो सके। दूसरे शब्दों में, परमेश्वर की वाचा और उनकी दशा के बीच के दूरी-निर्माण से वे यह कहने लगेंगे कि यह इतिहास उन्हें छोड़कर गया है, और वे परमेश्वर के विरुद्ध एक निंदात्मक उपाधि पाएँगे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह वह प्रसंग है जिसमें व्यवस्थाविवरण में मूसा के प्रेरित भाषणों के दौरान यहूदियों के भविष्य के परिणामों का उल्लेख है। परमेश्वर के उस वादे के पीछे जो उन्हें पहुँचाने का था, यदि वे उसकी आज्ञाओं का पालन नहीं करेंगे, तो उनके साथ क्या होगा, इसे यहाँ स्पष्ट किया गया है। यह पाठ यह सिखाता है कि परमेश्वर की वाचा और उनके लाभ-लाभान के बीच टूट-फूट के समय द्रोह-उल्लेख नहीं, बल्कि अनुशासनात्मक परिणामों के साथ गला-सीधा विवेचन है।
interpretive observations
कथन-उद्धरण (संयुक्त सार)
यहाँ के विचारMatthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन सूक्तों के संश्लेषण से निकलते हैं: परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के अनुरोध के साथ मानव इतिहास का साक्ष्य जुड़ा रहता है; जो दूरी बनती है, वह अविश्वास या अवहेलना से नहीं, बल्कि अनुशासनात्मक प्रक्रिया से जुड़ी होती है। यह पाठ यह बताता है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए उद्देश्यपूर्ण निर्णय लेते हैं ताकि वे अपने वादे को समझें और उनके पालन के लिए प्रेरित हों।
संक्षिप्त विषयसूची
अन्य क्लासिकल टिप्पणी-आइकनस
पाठ के भीतर नीचे दिए गए संदर्भों के साथ संक्षिप्त संकेत:
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त व्याख्या)
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम कैसे व्यवहार करें: परमेश्वर के वादों पर स्थिर भरोसा रखें, परन्तु उनकी आज्ञाओं के पालन में सक्रिय बनें। इतिहास के अनुभव हमें याद दिलाते हैं कि निर्भय होकर चलते समय भी एक विवेकशील इंसान की तरह उत्तरदायित्वपूर्ण रहने की आवश्यकता है।
उद्धृत या नकल-योग्य मौलिक टिप्पणी के लिए आवश्यक: इस पंक्ति में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के वास्तविक संक्षिप्त उद्धरण सीधे उद्धृत नहीं हैं; मैंने इन चिट्ठियों के सार्वजनिक-डोमेन विचारों को एकीकृत रूप से समाहित किया है ताकि बयान प्राकृतिक और हिन्दी पाठकों के लिए उपयुक्त बना रहे।