Old Testament
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होशे 2:23 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैं अपने लिये उसे देश में बोऊँगा, और लोरुहामा पर दया करूँगा, और लोअम्मी से कहूँगा, तू मेरी प्रजा है, और वह कहेगा, 'हे मेरे परमेश्वर'।” (रोम. 9:25, 1 पत. 2:10)
होशे 2:23 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 2:23 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 9:25 (HINIRV) »
जैसा वह होशे की पुस्तक में भी कहता है, “जो मेरी प्रजा न थी, उन्हें मैं अपनी प्रजा कहूँगा, और जो प्रिया न थी, उसे प्रिया कहूँगा; (होशे 2:23)

1 पतरस 2:9 (HINIRV) »
पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी, याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और परमेश्वर की निज प्रजा हो, इसलिए कि जिसने तुम्हें अंधकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। (निर्ग. 19:5-6, व्य. 7:6, व्य. 14:2, यशा. 9:2, यशा. 43:20-21)

जकर्याह 13:9 (HINIRV) »
उस तिहाई को मैं आग में डालकर ऐसा निर्मल करूँगा, जैसा रूपा निर्मल किया जाता है, और ऐसा जाँचूँगा जैसा सोना जाँचा जाता है। वे मुझसे प्रार्थना किया करेंगे, और मैं उनकी सुनूँगा। मैं उनके विषय में कहूँगा, 'ये मेरी प्रजा हैं,' और वे मेरे विषय में कहेंगे, 'यहोवा हमारा परमेश्वर है'।” (1 पत. 1:7, भज. 91:15, यिर्म. 30:22)
क्यों यह वचन महत्वपूर्ण है
होशे 2:23 का शब्द-चित्र ईश्वर की अनुग्रहपूर्ण बहाली और पहचान की बहाली को संक्षेप में व्यक्त करता है। यह वचन ईश्वर की दया, चुनाव और लोगों के साथ सम्बन्ध स्थापित करने की प्रतिज्ञा को उजागर करता—वह केवल शारीरिक वापसी नहीं, बल्कि आध्यात्मिक नाम और पहचान की बहाली चाहता है। नव ग्रंथ के लेखकों ने भी इसी वचन को उद्धृत कर यह दिखाया कि परमेश्वर का यह कार्य अन्ततः ईसाई समुदाय पर भी लागू होता है।
मूल संदर्भ
होशे के पूरे भाग में पुनर्विवाह-प्रतीक का प्रयोग इज़राइल और परमेश्वर के बीच टूटे सम्बन्ध की व्याख्या के लिए है। 2:23 में बोलने वाला परमेश्वर है जो दूरस्थ और असम्बद्ध शृंखला के पश्चात् अपनी प्रजा को फिर से अपना बनाएगा। लो-रुहामा (लोरुहामा) का अर्थ है "उसे दया न की गई", और लो-अम्मी (लोअम्मी) का अर्थ है "वह मेरी जाति नहीं"—परन्तु परमेश्वर घोषणा करता है कि इन नामों का उल्टा होगा: दया फिर लौटेगी और वे अपनी पहचान पाएँगे। यह वचन न केवल सामाजिक-धार्मिक पुनर्स्थापन बताता है, बल्कि नामकरण के माध्यम से नई पहचान की घोषणा करता है।
मुख्य संदेश
1) ईश्वर बहाल करनेवाला है: जो खोया हुआ, कलंकित या परित्यक्त है, परमेश्वर उसे फिर से अपने अन्दर और समुदाय में स्थान दिलाएगा।
2) पहचान का परिवर्तन: नया नाम—"मेरी प्रजा" और "हे मेरे परमेश्वर"—यह बताता है कि यह बहाली केवल शास्त्रीय क्षतिपूर्ति नहीं, बल्कि सम्बन्ध और आत्मज्ञान की पुनर्स्थापना है।
3) अनुग्रह का सार्वत्रिक स्वरूप: इस वचन का उद्धरण रोमन 9:25 और 1 पतरस 2:10 में दिखता है जहाँ इसे यहूदियों के अलावा उन लोगों पर भी लागू किया जाता है जो अब "ईश्वर की प्रजा" हैं।
बाइबिलिक थीमों का समर्थन
उपयोगी क्रॉस-रेफरेंस
रोमियों 9:25 — पॉल यहाँ होशे के शब्द का हवाला देते हुए दिखाते हैं कि परमेश्वर की कृपा यहूदियों तक सीमित नहीं, बल्कि उन लोगों तक भी पहुँचती है जो पहले "अन्य" समझे जाते थे। यह वचन बहुल जातीय और आत्मिक विस्तार का संकेत देता है।
1 पतरस 2:10 — पतरस इस वच्च को अपनाकर बताता है कि नया वंश और दया का संघर्ष अब बताए गए लोगों पर पूरा हुआ है; वे अब "ईश्वर का लोक" कहे जाते हैं।
यिर्मयाह 31:3-4 — यहां भी प्रेम और वापसी की प्रतिज्ञा है; ईश्वर अपने लोगों को प्रेम के कारण बुलाता है और एक नए संधि का आश्वासन देता है।
म्याथ्यू हैनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क से संक्षिप्त उद्धरण
Matthew Henry का संक्षिप्त उद्धरण: "He will call them His people again, and they shall call Him their God." (संक्षेप उद्धरण स्वरूप)
Albert Barnes ने इस प्रकार टिप्पणी की कि यह वचन "नामों के परिवर्तन द्वारा सम्बन्ध की बहाली" को दर्शाता है।
Adam Clarke ने भी रेखांकित किया कि नाम बदलकर परमेश्वर का सामीपीकरण और आत्मिक पहचान स्पष्ट होती है।
एकीकृत समझ और अन्तिम चिंतन
होशे 2:23 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर का उद्देश्य केवल दण्ड नहीं, बल्कि सम्बन्ध की बहाली है। जब वह कहता है "मैं अपने लिये उसे देश में बोऊँगा" तो उसमें भूमि के साथ-साथ आत्मिक निवास और सुरक्षा की बात है। "लोअम्मी... तू मेरी प्रजा है" वाक्यांश हमें बताता है कि परमेश्वर नया समुदाय बनाता है—वे जो कभी 'विभाजित' या 'पराए' थे, अब उनका नाम और सम्बन्ध बदल जाता है।
व्यक्तिगत स्तर पर यह वचन आश्वस्त करता है कि कोई भी व्यक्ति या समुदाय परमेश्वर की इच्छानुसार पुनर्स्थापित और अपनाया जा सकता है। यह हमें दया अनुभव करने और दूसरों को भी वही दया दिखाने के लिए प्रेरित करता है—क्योंकि परमेश्वर ने पहले हमें बुलाया और अपना नाम दिया।