Old Testament
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होशे 2:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि भविष्य में मैं उसे बाल देवताओं के नाम न लेने दूँगा; और न उनके नाम फिर स्मरण में रहेंगे।
होशे 2:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
होशे 2:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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निर्गमन 23:13 (HINIRV) »
और जो कुछ मैंने तुम से कहा है उसमें सावधान रहना; और दूसरे देवताओं के नाम की चर्चा न करना, वरन् वे तुम्हारे मुँह से सुनाई भी न दें।

यहोशू 23:7 (HINIRV) »
ये जो जातियाँ तुम्हारे बीच रह गई हैं इनके बीच न जाना, और न इनके देवताओं के नामों की चर्चा करना, और न उनकी शपथ खिलाना, और न उनकी उपासना करना, और न उनको दण्डवत् करना,

भजन संहिता 16:4 (HINIRV) »
जो पराए देवता के पीछे भागते हैं उनका दुःख बढ़ जाएगा; मैं उन्हें लहूवाले अर्घ नहीं चढ़ाऊँगा और उनका नाम अपने होंठों से नहीं लूँगा*।
होशे 2:17 — बालदेवताओं के नाम न लेने दूँगा
पद का तात्पर्य यह है कि भविष्य में परमेश्वर अपनी प्रजा के worship में उन वस्तुओं के नाम भी स्मरण नहीं रहने देगा जिन्हें वे पहले पूजा करते थे। होशे ने इस संदेश के द्वाराIsraelite समाज में वापस ईश्वर की एकत्वपूर्ण आराधना की ज़रूरत को उजागर किया है और उनके अधर्मी कर्म के परिणामस्वरूप भक्ति के स्वरूप में परिवर्तन की माँग की है।
ईश्वर के बारे में दी जाने वाली खोजपूर्ण सीख
यह टेक्स्ट दिखाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के उद्धार और वचन के प्रति अपार वफादारी रखते हुए पवित्रता की मांग करता है। यदि लोग पाप से दूर न हों, तो वह प्रगणित रूप से उन सब स्मृतियों से भी उन्हें अलग कर देता है जो उन्हें ग़लत मार्ग की तरफ ले जाती हैं। इस वचन में यह संकेत है कि ईश्वर अपने स्मरणीय संबंध को पुनर्स्थापित करना चाहते हैं—जहाँ केवल वह सर्वोपरि हो और अन्य देवी-देवताओं के नाम महत्त्वहीन मान लिए जाएँ।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र स्पष्ट किए जाएँ
संबद्ध पाठ जिनसे मार्गदर्शन मिलता है
1) प्रेरितों के कार्यों में प्रत्यक्ष एकेश्वरवाद की महत्ता की चर्चा मिलती है, जहाँ प्रभु के समक्ष कोई अन्य देवता नहीं ठहरता।
2) यिर्मयाह/यिर्मयाह के संदेशों में भी लौट आओ—परमेश्वर के साथ नये सिरे से संबंध बनाने की urging मिलती है, जहाँ पाप के विरुद्ध स्पष्ट दूरी जरूरी है।
3) मक्खन-प्रकरणों में ईश्वर की वफादारी और सदैव लौट आने की उम्मीद दिखती है, किन्तु पवित्रता और एकत्व की माँग भी साफ़ होती है।
गत्कालीन टिप्पणीकारों के संकेत (संश्लेषण)
मैठ्यू हेनरी ने इस प्रकार के उल्लेखों को यह समझाने के लिए उद्धृत किया है कि ईश्वर अपने लोगों से आपातकालीन तपस्या और सच्चे रूप से परहेज़ की अपेक्षा करता है। ऐल्बर्ट बार्न्स ने कहा कि यहाँ का पहलू यह है कि मूर्तिपूजा से मोह हटना और एकेश्वरवाद को पुनः स्थापित करना परमेश्वर की इच्छा है। एडम क्लार्क ने इसे इस प्रकार समझाया कि पूर्व के आस्थागत क्रम को छोड़कर ईश्वर की ओर लौटना आवश्यक है, ताकि उनके उद्धार का अनुभव स्वच्छ और स्पष्ट हो सके।
कई प्रमुख दृष्टिकोणों के छोटे उद्धरण
- "ईश्वर केवल एक वास्तविक परमेश्वर हैं; अन्य देवताओं के नाम स्मरण योग्य नहीं।" (मैथ्यू हेनरी से सारगर्भित विचार)
- "पूर्व की प्रवृत्तियों से छुटकारा पाकर, नये सिरे से ईश्वर के साथ जीवित सम्बन्ध बनना चाहिए।" (ऐल्बर्ट बार्न्स के साहित्यिक संकलन के अनुसार)
- "पश्चाताप और विशुद्ध धर्म एक साथ चलें, तभी उद्धार की वास्तविक अनुभूति संभव है।" (एडम क्लार्क की टिप्पणी के अनुरूप)
आज के लिए अनुप्रयोग
- हमारे जीवन में किसी भी प्रकार की “सूत्रधार” प्रथाओं को हम कितनी सरलता से अपनाते हैं, यह देखने के लिए यह वचन सच्चा दर्पण है। एकेश्वरवाद को दृढ़ रखें: केवल परमेश्वर ही हमारे दिलों का केन्द्र बने।
- स्मृति और पूजा के रीति-रिवाजों में भी हमें प्रमाणित करना चाहिए कि हमारे प्रयोजन और हृदय के उद्देश्य एक हैं—ईश्वर की महिमा।
- नयी प्रेरणा के साथ पुराने पापों से दूरी बनाएं, ताकि जीवन में शांति और विश्वास की प्रगाढ़ता बनी रहे।