Old Testament
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होशे 2:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और यहोवा की यह वाणी है कि उस समय तू मुझे पति कहेगी और फिर बाली न कहेगी।
होशे 2:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 2:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 54:5 (HINIRV) »
क्योंकि तेरा कर्ता तेरा पति है, उसका नाम सेनाओं का यहोवा है; और इस्राएल का पवित्र तेरा छुड़ानेवाला है, वह सारी पृथ्वी का भी परमेश्वर कहलाएगा।

होशे 2:7 (HINIRV) »
वह अपने यारों के पीछे चलने से भी उन्हें न पाएगी; और उन्हें ढूँढ़ने से भी न पाएगी। तब वह कहेगी, 'मैं अपने पहले पति के पास फिर लौट जाऊँगी, क्योंकि मेरी पहली दशा इस समय की दशा से अच्छी थी।'

यिर्मयाह 3:14 (HINIRV) »
“'हे भटकनेवाले बच्चों, लौट आओ, क्योंकि मैं तुम्हारा स्वामी हूँ; यहोवा की यह वाणी है। तुम्हारे प्रत्येक नगर से एक, और प्रत्येक कुल से दो को लेकर मैं सिय्योन में पहुँचा दूँगा।
होशे 2:16 पर टिप्पणी — पति से संबंध के पुनःस्थापन की पहचान
सीधा अर्थ: यह वाणी यह कहती है कि यहोवा के संबंध मेंIsrael अपनी रुढ़ी या बहेल तक नहीं, बल्कि परमेश्वर से विवाह-संबंध की नई राह में लौटेगा—“तू मुझे पति कहेगी और फिर बाली न कहेगी।” यहाँ “पति” शब्द दर्शाता है एक पवित्र, स्थिर और एकমित्र संबंध; “बाली” से मोहवत, भेंट-चढ़ाव के विभ्रम और अज्ञात आशाओं से मुक्त होकर परमेश्वर के प्रति निष्ठा लौटना है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
होशे के पुस्तक में यहूदा-इस्रायल के वैवाहिक रूपक के जरिए परमेश्वर और उसकी लोक-जाति के रिश्ते का चित्रण है। होशे के विवाह-रिश्ते से भाषा में बारीकियाँ उठती हैं — ईश्वर प्रेम में अनन्यता चाहता है, जबकि लोग पत्थर के देवताओं और अन्य जातियों के धर्मों में फँसते चले जाते हैं। अब यह वाणी ऐसी उम्मीद जगा रही है कि भुलावे के बाद पुनः प्रतिज्ञा और एकत्व की एक नई शुरुआत होगी।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
• “पति” के रूप में देव-निष्ठा की वापसी का संकेत: यहोवा की इच्छा है कि उसकी प्रजा सीधे और दृढ़ विश्वास से उसे अपने आराध्य के रूप में चुने।
• “बाली न कहेगी” का तात्पर्य: पूर्व के व्यर्थ परस्त्रियों और भौतिक आशाओं को छोड़कर केवल परमेश्वर की मान्य नीति के साथ चलना।
• क्रिया-शब्द का नयापन: इस उद्धार-यात्रा में अच्छाई-विश्वास का पुनःस्थापना है—एक नया संबंध, निर्मलता, और आत्म-नैतिकता की प्रगाढ़ता।
होशे से जुड़े व्याख्या-उद्धरण (संक्षेप में, सार्वजनिक-डायमंड)
• मैथ्यू हेनरी के अनुसार यह वक्तव्य यह संकेत करता है कि परमेश्वर अपनी लोक-जातियों के साथ एक पवित्र विवाह-बंधन की रिक्तता भरना चाहता है; वे विविधताओं में फँसे रहने के बजाय एकतरफा निष्ठा का चयन करें।
• अब्राम क्लार्क (Adams Clarke) के विचार में यह् स्पष्ट किया गया है कि परमेश्वर प्रजा के भीतर विश्वास की पवित्रता लौटाने की चाह-पथ पर जोर देता है, ताकि उनका जीवन ईश्वर के से संबंध मजबूत हो।
• अलबर्ट बार्न्स के अनुसार यह उद्घोषणा इस बात का संकेत है कि युग-परिवर्तन में ईश्वर की पूजा-निष्ठा का केन्द्र फिर से वही रहेगा—उसके समर्पण और नियमों के अनुरूप चलना।
संक्षिप्त में थीमगत बिंदु
क्रॉस-रेफरेन्स और उनकी व्याख्या
• यशया 54:5-6: परमेश्वर के विवाह-बंध का दायरा, शांति और सुरक्षा की पुनर्प्राप्ति की दिशा दिखाता है—प्रजा का विश्वास फिर से मजबूत होगा।
• रोमियों 11:26-27: पुरानी व्यवस्था की जगह नई मरम्मत और प्रतिज्ञा के साथ ईश्वर की कृपा व्यापक रूप से फैलेगी।
• मत्ती 19:6: विवाह का परमेश्वर के निर्माण के साथ स्थायित्व—इसी स्थिरता से प्रजा को जीवन का पूर्ण ज्ञान मिलता है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम में से जो विश्वास में लौटना चाहते हैं, उन्हें अपने जीवन के उन हिस्सों को परमेश्वर के सामने सत्यापित करना चाहिए where पूर्व-धाराओं, वस्तुओं या आदतों की बकायदा परित्याग आवश्यक है। एक पवित्र, विश्वासपूर्ण निष्ठा से ही हमारी आस्था और जीवन का ढांचा पुनः बन सकता है—यही परमेश्वर की इच्छा है।