Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीहोशे 2:14 बाइबल पद की व्याख्या
होशे 2:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“इसलिए देखो, मैं उसे मोहित करके जंगल में ले जाऊँगा, और वहाँ उससे शान्ति की बातें कहूँगा।
होशे 2:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
होशे 2:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

यहेजकेल 20:35 (HINIRV) »
और मैं तुम्हें देश-देश के लोगों के जंगल में ले जाकर, वहाँ आमने-सामने तुम से मुकद्दमा लड़ूँगा।

यशायाह 40:1 (HINIRV) »
तुम्हारा परमेश्वर यह कहता है, मेरी प्रजा को शान्ति दो, शान्ति! (भज. 85:8, 2 कुरि. 1:4)

प्रकाशितवाक्य 12:6 (HINIRV) »
और वह स्त्री उस जंगल को भाग गई, जहाँ परमेश्वर की ओर से उसके लिये एक जगह तैयार की गई थी कि वहाँ वह एक हजार दो सौ साठ दिन तक पाली जाए। (प्रका. 12:14)
होशे 2:14 — immediate setting
यहोवा के अभियोग के क्रम में इस मध्यावधि कथन में उद्धृत किया गया: “इसलिए देखो, मैं उसे मोहित करके जंगल में ले जाऊँगा, और वहाँ उससे शान्ति की बातें कहूँगा।” यह एक संकेतात्मक दृश्य है जिसमें ईश्वर अपनी प्रजा के प्रति कड़ी नीति के पीछे भी प्रेमपूर्ण दृष्टि का संकेत देते हैं। जंगल, यहाँ व्यक्तिगत अलगाव का प्रतीक है—उस समय जब इज़राइल अस्थिर और डांवाडोल था, तब यीशु-यहोवा स्वीकार्य दूरी बनाकर पुनः सम्बद्ध होने के लिए अवसर बनाते हैं।
ईश्वर का विश्वास और वचन की दृष्टि
इस वचन में देवता अपने लोगों को पुनः अपने पास बुलाते हैं, भले ही परिस्थितियाँ कठिन लगें। मोहित करने का वाक्य यहाँ परिवर्तन की गारंटी के रूप में लिया जाता है—यानी ईश्वर एक नये, निकट, और व्यक्तिगत संवाद के लिए रास्ता बनाते हैं। यह संकेत करता है कि परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के साथ केवल नियम-आदेश नहीं, बल्कि पिता की निकटता और सौजन्य से बात-चीत चाहते हैं।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
अन्य संदर्भ (Cross-references) — छोटा परिचय
1) यह्र का संकेत कि परमेश्वर कभी-कभी अस्थायी अलगाव के माध्यम से अपने बच्चों को पुनः मार्ग दिखाते हैं (यशायाह-होशे की समन्वय संरचना)।
2) परंपरागत भक्तिकाल के संदेशों से मिलती-जुलती धारणा कि परमेश्वर दयालु हैं और अपने लोगों को उद्धार के लिए पुनः बुलाते हैं, जब वे विपत्तियों में भी हों।
3) अन्य बाइबल संदर्भ जो आत्म-निरीक्षण और प्रतिशोधन की आवश्यकता पर बल देते हैं और परमेश्वर के साथ पुनः जुड़ाव का मार्ग दिखाते हैं।
पूर्व-आधार पाठ से मिलान
इस अंश की मानसिकता में पुराने नियम के उन उदाहरणों का सार है जहाँ परमेश्वर अपने विश्वासयोग्यों के साथ निकट संवाद को पुनः स्थापित करते हैं—जो कि होशे की कुल कहानी का केंद्र है: प्रेम का अनुराग, विश्वास की परीक्षा, और पुनःस्थापना की योजना।
आज के लिए अनुप्रयोग
आधुनिक पाठक के लिए यह संदेश स्पष्ट करता है कि कठिन हालात में भी परमेश्वर हमारे करीब आने, हमें शांति प्रदान करने और हमारी भलाई के लिए पुनः मार्ग दिखाने को तत्पर रहता है। अगर जीवन जंगल-सा भारी लगे, तो आत्मिक दूरी से मुक्त होकर परमेश्वर की आवाज़ में शान्ति की बातें सुनी जाती हैं। यह विश्वास का एक अभ्यास है: थोड़ा-थोड़ा पीछे हटकर सुनना, ताकि प्रेम और सुधार की बातें स्पष्ट हों।
सारूपण
होशे 2:14 का यह पदचिह्न देखाता है कि परमेश्वर अपनी निर्भरता-विहीन स्थिति में भी प्रेम के साथ निकट आकर शांति की बातचीत चाहते हैं। इससे विश्वासियों को यह सीख मिलती है कि कठिन समय में भी ईश्वर के साथ जागरूक and प्रेरित संचार संभव है, और वह हमें पुनः मार्गदर्शित करने के लिए तैयार रहता है।
Notes on quotes from classic commentators
इस पंक्ति के भाव के गहराई को स्पष्ट करने के लिए ऐतिहासिक प्रकाशनों के विचार नीचे संक्षेप में संगृहीत हैं, परन्तु पूर्ण उद्धरण यहाँ नहीं दोहराये जाते।