Old Testament
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होशे 2:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैं सदा के लिये तुझे अपनी स्त्री करने की प्रतिज्ञा करूँगा, और यह प्रतिज्ञा धर्म, और न्याय, और करुणा, और दया के साथ करूँगा।
होशे 2:19 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 2:19 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 कुरिन्थियों 11:2 (HINIRV) »
क्योंकि मैं तुम्हारे विषय में ईश्वरीय धुन लगाए रहता हूँ, इसलिए कि मैंने एक ही पुरुष से तुम्हारी बात लगाई है, कि तुम्हें पवित्र कुँवारी के समान मसीह को सौंप दूँ।

प्रकाशितवाक्य 21:2 (HINIRV) »
फिर मैंने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हन के समान थी, जो अपने दुल्हे के लिये श्रृंगार किए हो।

यशायाह 54:14 (HINIRV) »
तू धार्मिकता के द्वारा स्थिर होगी; तू अंधेर से बचेगी, क्योंकि तुझे डरना न पड़ेगा; और तू भयभीत होने से बचेगी, क्योंकि भय का कारण तेरे पास न आएगा।
होशे 2:19 का भीतर-बोध: धर्म, न्याय, दया से बनी वचन-प्रतिज्ञा
मुख्य interpretive बिंदु: यह वचन यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने प्रेम-सम्बन्ध की प्रतिज्ञा को स्थिर, पवित्र और क्रांतिकारी ढंग से प्रस्तुत करते हैं—धर्म, न्याय, करुणा और दया के साथ। यह संकेत करता है कि परमेश्वर के विवाह-बंध नेह परम-पवित्र सम्बन्ध बनकर रहता है, जहाँ वह अपने लोगों के साथ निष्ठा और सच्चाई बनाये रखता है, भले ही उनके व्यवहार ने उसे भटकाने के प्रयास किए हों।
साहित्यमय संदर्भ और पाठ-परिप्रेक्ष्य
होशे नबी के इस भाग में परमेश्वर का प्रेम, निष्ठा और क्योंकि उन्होंने प्रभु के साथ एक marital-शब्द-चित्र का प्रयोग किया है, ताकि यह स्पष्ट हो कि यह संबंध स्थायित्व और दायित्व-पूर्ण है। “तुझे अपनी स्त्री करने की प्रतिज्ञा” एक गूंज पैदा करता है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए एक स्थाई विवाह-प्रतीक के रूप में कुछ दे रहे हैं—प्रतिज्ञा के साथ संयत धर्म, न्याय, करुणा और दयायुक्त व्यवहार। यह नया गठान पुराने अनुभव-संदर्भ के भीतर है, जहाँ किसान-चिह्न, ईश्वर की मैत्री और व्यक्तिगत समर्पण एक साथ आते हैं।
धर्म, न्याय, करुणा, दया—क्यों ये चार शब्द सातत्य बनाते हैं?
- धर्म: परमेश्वर के चरित्र का मूल-आधार; वह अपने लोगों के साथ सही और पवित्र संबंध चाहता है। यह प्रतिज्ञा उसी दिशा-निर्देश का पक्का प्रमाण है कि वह मानवीय उन्नति के बजाय स्वयं की पवित्रता बनाए रखना चाहता है।
- न्याय: नीतिगत समता और सच्ची व्यवस्था का पहरा। परमेश्वर के साथ का विवाह-सम्बन्ध न्याय पर टिकता है, जहाँ विश्वास और कर्तव्य मिलकर सामाजिक और आध्यात्मिक सच्चाई को मजबूत करते हैं।
- करुणा और दया: यह व्यक्त करता है कि प्रेम के साथ संवेदना और सहायता की इच्छाशक्ति है; परमेश्वर अपने लोगों के लिए दयालु मार्ग चुनते हैं, भले ही वे चूकें।
शब्द-योजना और साहित्यिक संकेत
होशे के दृष्टिकोण में, विवाह-चित्र एक नयी भलाई का संकेत बनता है—जहाँ परमेश्वर अपने लोग–जैसे पति अपनी पत्नी के लिए—निष्ठा, संरक्षण और सुधार की प्रतिज्ञा करता है। यह उस समय के सामाजिक-धार्मिक संदर्भ में भी प्रकट होता है, जहाँ लोग गलत रास्तों पर चले जाते हैं; पर परमेश्वर की तरफ से यह प्रतिज्ञा एक नयी उम्मीद और पथ-निर्देशन प्रदान करती है।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेपित संदर्भ) और उनसे मिली सीख
- हबक्कु 2:4 के समान दावों के पीछे विश्वास की भूमिका—आस्था बिना कार्य के नहीं रहती; निरंतर निष्ठा से जीवन में धर्म-न्याय-करुणा-दय बने रहते हैं।
- यूहन्ना 1:9-11 का संकेत—ईश्वर की कृपा और सच्चे प्रेम की आवृत्ति, जो तोड़-फोड़ के बीच भी संकल्प बनाए रखती है।
इन संकेतो से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर का विवाह-आज्ञा-परिचय, केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि व्यवहारिक और सामाजिक दायित्वों के साथ जुड़ा है।
प्रेरणा के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
होशे 2:19-20 के इस वचन में परमेश्वर अपने लोगों के साथ एक सच्चे प्रेम-विवाह की प्रतिज्ञा दोहराते हैं—धर्म, न्याय, करुणा और दया के साथ। यह बताता है कि परमेश्वर अपने प्रेम को केवल कल्पना नहीं बनाते, बल्कि उसे व्यवहार में उतारते हैं—एक ऐसी जीवन-पद्धति जो समाज, परिवार और व्यक्तिगत आचरण तक प्रभावित करती है।
अनुवाद-टिप्पणी (उद्धरण संकेत)
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शब्द-सार के संक्षिप्त उद्धरण चाहते हैं, वे इस प्रकार के प्रकाश डालते हैं: “प्रेम के साथ निष्ठा का संयोजन” (संकेतक उद्धरण के रूप में सिस्टम-टिप्पणियाँ के भीतर उपयोगी)।