Old Testament
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होशे 2:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसके बच्चों पर भी मैं कुछ दया न करूँगा, क्योंकि वे कुकर्म के लड़के हैं।
होशे 2:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 2:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 1:2 (HINIRV) »
जब यहोवा ने होशे के द्वारा पहले पहल बातें की, तब उसने होशे से यह कहा, “जाकर एक वेश्या को अपनी पत्नी बना ले, और उसके कुकर्म के बच्चों को अपने बच्चे कर ले, क्योंकि यह देश यहोवा के पीछे चलना छोड़कर वेश्या का सा बहुत काम करता है।”

यहेजकेल 8:18 (HINIRV) »
इसलिए मैं भी जलजलाहट के साथ काम करूँगा, न मैं दया करूँगा और न मैं कोमलता करूँगा; और चाहे वे मेरे कानों में ऊँचे शब्द से पुकारें, तो भी मैं उनकी बात न सुनूँगा।”

यिर्मयाह 13:14 (HINIRV) »
तब मैं उन्हें एक दूसरे से टकरा दूँगा; अर्थात् बाप को बेटे से, और बेटे को बाप से, यहोवा की यह वाणी है। मैं उन पर कोमलता नहीं दिखाऊँगा, न तरस खाऊँगा और न दया करके उनको नष्ट होने से बचाऊँगा।'”
होशे 2:4 का तात्पर्य और आधुनिक अनुप्रयोग
पद का तुरंत संदर्भ: होशे की किताब में परमेश्वर का प्रेमी-प्रेमिका जैसा रिश्ता चित्रित है, जहाँ इस्राइल के पापों के कारण उसे कठोर दंड की चेतावनी दी जाती है। उस पर भी मैं कुछ दया न करूँगा, क्योंकि वे कुकर्म के लड़के हैं। यह वाक्य दिखाता है कि परमेश्वर हर प्रकार के पाप से चकित होकर भी दया की राह खोलते हैं, परन्तु कुछ कुकर्मों पर कठोर दंड भी संभव है।
ईश्वरीय दयाभाव बनाम दंड की आवश्यकता
पद स्पष्ट करता है कि दया और निष्कासन एक साथ नहीं चलते। जब लोग पाप के रास्ते पर अड़ते रहते हैं, तब परमेश्वर अपनी योजनाओं के अनुसार दया रोक भी सकते हैं ताकि वे परिणामस्वरूप सुधार सकें। यह दृश्य हमें यह सोचने को बाध्य करता है कि ईश्वर का प्रेम केवल नरमपन नहीं है, बल्कि न्यायपूर्ण भी है।
कुंजियाँ शब्द और imagery
“कुकर्म के लड़के” से तात्पर्य उन संतान-समुदाय से है जिन्होंने व्यवहार में पाप को अपना स्वभाव बना लिया है। “दया न करूँगा” का अर्थ है कि नीतिगत दंड या कठोर परिणाम उनकी राह को रोकना नहीं है, ताकि वे अपनी चूक के परिणामों से सीखें। यहाँ परमेश्वर के पिएंट-एक्शन (पुनः निर्देश) का संकेत है, जो पाप के कारण अनुपस्थित नहीं रहता, बल्कि पवित्रता की दिशा में सुधार के लिए कदम उठाता है।
अनुसंगत उद्धरण और विचार
यह पाठ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रशिक्षित विचारों से संगत है: परमेश्वर का प्रेम चमत्कारी है, पर वह पाप के चक्र को तोड़ने के लिए आवश्यक कठिनाइयों को भी अपने उद्देश्य के अनुसार डालता है।
अन्य संबंधित पद
आज के ईसाई जीवन के लिए अनुप्रयोग
1) पाप के प्रति संवेदनशील रहें: परमेश्वर की चेतावनी पाप की घुसपैठ को रोकने के लिए है, न कि उसे दमन करने के लिए।
2) दया और न्याय दोनों के संतुलन: हमारा जीवन भी उसी संतुलन को दर्शाए—न्याय की चाह में करुणा को छोड़ना नहीं, और करुणा के पीछे अन्याय के रास्ते न अपनाना।
3) परिणामों से सीखना: कठिनाईयाँ कभी-कभी पथ को साफ करती हैं; उनसे सीख कर हम परमेश्वर की राह की ओर लौटें।
क्लोज-अप सार
होशे 2:4 में परमेश्वर पाप के कारण होने वाले बुरे परिणामों को टालने के बजाय उन्हें संकेत के रूप में प्रस्तुत करते हैं ताकि लोग बताए गए पाठ से सीखें। यह वाक्य आज भी हमें पवित्रता, और पाप के प्रति सचेत रहने की प्रेरणा देता है।