Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 13:14 का ठोस संदर्भ और पाठ का अर्थ
पद का तात्पर्य: यह वाणी यहोवा की है कि वह लोग एक दूसरे से टकरा दिये जाएँगे—बाप बाप से, और बेटा पिता से—यानी पारिवारिक रिश्ता भी विखण्डित हो जाएगा। यह चेतावनी न केवल व्यक्तिगत पतन की ओर इशारा है बल्कि सामाजिक और धार्मिक टूटन को भी उद्घाटित करती है, जहाँ जन-जन का भरोसा, नैतिकता और अनुशासन टूट जाते हैं। परमेश्वर आगे कहता है कि वह उन पर दया नहीं करेगा, न उन्हें बचाने के लिए तरस खाएगा; उनका नष्ट होना उनके पथ के परिणामस्वरूप होगा।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ सेमुख्य बिंदु
यह वचन दिखाता है कि परमेश्वर की धर्मनिष्ठा और न्याय एक साथ चलते हैं। जब लोग अपने धर्म से विरुद्ध चल पड़ते हैं, तो परिणामात्मक प्रभाव समाज में फैलते हैं—खासकर परिवार और समुदाय के बीच की स्थिरता बिखर जाती है। परमेश्वर का यह अनुमानित कठोर विकल्प यह नहीं कि वह प्रेम से रहे बिना हर चीज को भुगतवाए, बल्कि यह दिखाता है कि पथभ्रष्ट व्यक्ति और समाज के लिए व्यापक दायरा-परिणाम कैसे होते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों/छबियों की स्पष्टता
अन्य उद्धरणीय पाठ और उनका संक्षिप्त संदर्भ
यिर्मयाह के पाठ में यह चेतावनी स्थिर रहती है कि जब इजराइल धर्म-आचरण से विमुख होता है, तो सामाजिक, पारिवारिक और धार्मिक ढांचे छिन्न-भिन्न हो जाते हैं। इस प्रकार के विचारMatthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के टिप्पणियों के अनुसार, विशुद्ध पाप से प्रेरित परिणाम एक क्रमबद्ध न्याय है जिसमें ईश्वर अपने दंड के साथ साथ अवलोकन भी करते हैं।
क्रॉस-रेफरेंस और उनका छोटा विवरण
- यिर्मयाह 11:15: विश्वास-भंग के परिणाम और राज्य की व्यवहारिक अस्थिरता का संकेत देता है।
- यिर्मयाह 19:9: अस्थिरता और पतन के दृश्य के साथ नष्ट होने की चेतावनी को भरपूर दर्शाता है।
- देन 28:53-57: प्रतिफल एवं दंड की गम्भीरता के साथ सामाजिक-आर्थिक विघटन का चित्रण करता है।
आज के संदर्भ में आवेदन
हम कैसे उत्तर दें जब समाज, परिवार, या समुदाय में विश्वासपथ से विचलन होता है? यह पाठ हमें स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर के अनुसार पथभ्रष्ट लोगों के व्यवहारी परिणाम न केवल व्यक्तिगत, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी स्पष्ट होते हैं। परन्तु दया और सुधार की दिशा में भी रास्ते खुले रहते हैं—यानी विश्वास, पश्चाताप और निष्ठा के साथ पुनः स्थिरता लौट सकती है। अपने जीवन में परिवार और समुदाय के लिए प्रार्थना करें; न्याय और करुणा दोनों संतुलित रहते हुए सामाजिक स्वास्थ्य का मार्ग दिखाते हैं।
संक्षिप्त सार
यिर्मयाह 13:14 में परमेश्वर की न्याय-परक चेतावनी है कि पाप के कारण परिवारिक और सामाजिक रिश्ते टूट जाते हैं। यह संकेत देता है कि धर्म-आचरण और नैतिकता का संरक्षण नष्ट हो जाने पर दया तथा उद्धार के अवसर कम हो जाते हैं; परन्तु पथ-भ्रष्ट लोग भी सचेत होकर पलटें तो पुनः स्थिरता संभव है।
नोट: इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के नोट्स का संक्षिप्त उपयोग करते समय हमने उनके उद्धरणों के ठीक छोटे अंशों को ही शामिल किया है, ताकि मूल विचार स्पष्ट रहे।