यिर्मयाह 13:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब दूसरी बार यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुँचा,

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यिर्मयाह 13:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 13:3 — संदर्भ के साथ अर्थ

यिर्मयाह परन्तु यह उस समय की परिस्थिति में हुआ जब ईशायतन-व्याकुलता के बीच परमेश्वर ने भविष्यवक्ता को संकेतों के माध्यम से अनुच्छेदित चिह्न दिखाने को कहा। इस वचन में यहोवा की वाणी एक बार फिर से भविष्यवक्ता के पास पहुँचती है, और यह संकेत देता है कि परमेश्वर अपने अपने दायित्ववान संदेशवाहक के साथ है, भले ही उनके अनुभव अकसर कठिन और विरोधी हो। यह द्रष्टव्य संदेश उनकी सेवा की निरंतरता को स्पष्ट करता है कि परमेश्वर का कहनाही प्रमुख है, और उसका आदेश आगे बढ़ता है।

मुख्य कहानी का केंद्रीय भाव

यह वचन दर्शाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ बोलना और उनका मार्गदर्शन करना नहीं भूलता। भविष्यवक्ता को बार-बार विभिन्‍न माध्यमों से यह वचन प्राप्त होता है, ताकि संदेश सदा जीवित और ताज़ा रहे। इस संदर्भ में हमारी प्रेरणा यह है कि परमेश्वर के शब्दों को सुनना और उन पर विश्वास करना जीवन जीने का वास्तविक तरीका है, भले ही सामाजिक या राजनीतिक हालात कितने भी कठोर क्यों न हों।

मुख्य विषय

  • आदेश और प्रश्न-समझ: परमेश्वर अपने संकेतों के माध्यम से मार्ग दिखाते हैं; मानव श्रद्धा उन्हें मानने के लिए विवेक से काम लेता है।
  • निष्ठा की परीक्षा: भविष्यवक्ता को बार-बार संदेश प्राप्त होते हैं, जो उसकी सेवा के प्रति स्थिरता को परखते हैं।
  • ईश्वर का नियंत्रण: भले ही परिस्थितियाँ विरोधी हों, परमेश्वर की योजना सुरक्षित रहती है और उसकी योजना समय पर पूरी होती है।

संबंधित भाग

1) यिर्मयाह 1:7-9 — परमेश्वर अपने संदेशवाहक को विश्वास के साथ भेजते हैं और मूर्त संकेतों के माध्यम से कर्तव्य निभाने का आह्वान करते हैं।

2) यिर्मयाह 29:11 — परमेश्वर के अच्छे उद्देश्य, स्थिरता और आशा का संदेश, विपरीत परिस्थितियों के बीच भी एक क्रम बनाये रखता है।

3) यिर्मयाह 31:33 — नया वचन और आंतरिक परिवर्तन का संकेत, इस भविष्यवाणी-संकेत के स्रोत के रूप में परमेश्वर की निष्ठा पर बल देता है।

व्यावहारिक विचार

हम भी यह देख सकते हैं कि परमेश्वर की बातों को सुनना और उनके अनुसार जीवन बनाना कठिन हो सकता है, किन्तु यह हमारे विश्वास की परीक्षा है। ईमानदारी से प्रार्थना करें कि हमारा मन खुला रहे, ताकि वे संदेश जो हमारे लिए विशेष रूप से बनाए गए हों, हमें मार्गदर्शन दें। संकट के समय भी स्मरण रहे कि परमेश्वर की वाणी स्थिर और भरोसेमंद है, और उसका उद्देश्य हमारे लिए उद्धार और आशा है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

यिर्मयाह 13:3 में दोबारा यहोवा की वाणी मिलना बताता है कि परमेश्वर अपने दायित्व के साथ जीवित संपर्क बनाए रखता है। यह संदेश केवल ऐतिहासिक घटनाएं नहीं बल्कि आज भी हमारे विश्वास-जगत के लिए प्रमाण है कि ईश्वर बोलते हैं और हम पर कृपा करते हैं, जब हम उनकी आवाज सुनते हैं और उनके मार्ग पर चलते हैं।

क्रॉस-रेफ़रेंस

• यिर्मयाह 1:9 — परमेश्वर अपने दूत के माध्यम से सन्देश भेजते हैं।

• यिर्मयाह 29:11 — भविष्य के लिए योजनाएँ और आशा के संदर्भ।

• यिर्मयाह 31:33 — नया वचन और हृदय परिवर्तन की आशा।

उद्धरण नोट: जैसा पाठ में है, Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के उद्धरण इष्टतम स्थानों पर संक्षेप में प्रयुक्त हैं। यह अनुभाग उनके स्पष्ट कथनों के संक्षिप्त, नि:शेष विचारों के अनुरूप है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 13:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुँचा, “यहोवा यह कहता है,

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