Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 13:9 का यथार्थ अभिप्राय
इस वचन में प्रभु परमेश्वर यहूदियों के घमण्ड और यरूशलेम के अभिमान का दिन-पर-दिन नाश करने की संगति प्रकट करते हैं। घमण्ड और गर्व जहाँ आत्म-विश्वास को { परमेश्वर के हाथों में नीचे गिरने} के लिए उकसाते हैं, वहाँ परमेश्वर इन्हें विनष्ट करने की योजना बनाते हैं। यह संदेश एक ठहराव देता है: हमारी पहचान और सुरक्षा का आधार परमेश्वर के प्रति निर्भरता है, न कि सांसारिक गर्व में छुपे अहंकार में।
संदर्भ-परिप्रेक्ष्य
यिर्मयाह के समय परमेश्वर एक कठोर, पर सत्य व्यक्ति-स्वभाव के साथ इस्राइल की आड़ में बनी धार्मिक-आचरण-गंभीरता को उजागर कर रहे थे। यह शास्त्र-घटना गर्व और आत्म-त Benson नहीं, बल्कि दुष्प्रवृत्ति का फेर है; प्रभु अपने शप्त-प्रशंसक लोगों के भीतर के अंहकार को तोड़ देते हैं ताकि वे वास्तविक आध्यात्मिक परिवर्तन को प्राप्त कर सकें।
व्याख्यात्मक अवलोकन
लाइन-बद्ध संरोह (Theme at a glance)
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त अर्थ-सम्बन्ध)
यिर्मयाह के साथ नजदीकी संदेश: अन्य भागों में भी गर्व के परिणामों और दया के मार्ग स्पष्ट होते हैं—जैसे कि विश्वासयोग्य तुष्टीकरण और परिवर्तन की मांग। यह पाठ यह दिखाता है कि बाहरी धार्मिकता नहीं, बल्कि दिल की विनम्रता और परमेश्वर की इच्छा स्वीकारना अहम है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
1) दैनिक जीवन में घमण्ड से बचना: अपने स्वयं के अहंकार की पहचान करें और नम्रता से आचरण करें।
2) समुदाय के भीतर उद्धार की दिशा: सिर उठाकर नहीं, सेवा-भाव से समुदाय के लिए योगदान दें।
सार-संक्षेप
प्रभु यहूदियों के गर्व-गह्वर में प्रवेश करते हुए यह स्पष्ट करते हैं कि वास्तविक सुरक्षा और पहचान परमेश्वर की अनुकम्पा तथा श्रद्धा में है, न कि नगर की महिमा या व्यक्तिगत अभिमान में। यह चेतावनी समय के सदृश है: गर्व ठहर नहीं सकता; परन्तु विनम्रता और निष्काम सेवा से परमेश्वर का संरक्षण मिलता है।
नोट: नीचे दिया गया संदर्भ-भावना केवल सामान्य पंक्ति के लिए है; किन्तु यह ग्रंथ-परिभाषा में है।
एंट्री उद्धरण संकेत (जहाँ संभव)
यदि उपलब्ध हो, Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकीर्ण उद्धरणों के छोटे अंश स्पष्ट संदर्भ के साथ जोड़े जा सकते हैं, ताकि पाठक को पारंपरिक व्याख्या की दिशा मिल सके।