Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 13:16 — सार स्पष्ट अर्थ
यह पद कहते हैं: परमेश्वर की महिमा और नावफर याद दिलाने के लिए पहले उसकी बड़ाई करें, क्योंकि यदि आप यहोवा की उपेक्षा करें या उसकी चेतावनियों को अनदेखा करें, तो वह अंधकार ला सकता है—आपके पाँव अंधेरे पहाड़ों पर ठोकर खाने लगेंगे, और जब आप प्रकाश के आसरे को देखेंगे, तब वह उसे मृत्यु की छाया में बदल सकता है और उसे घोर अंधकार बना देगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यिर्मयाह नबी का समय ईज़किएलन और यहोवा की चेतावनियों के लिए कड़ा था, जब यह्रूसलीम और यहूदिया के लोग धरती-ऊपर और आंतरिक अवस्था में गिरावट के दौर में थे। बुरी आस्थाओं, पाखण्ड और असत्य के कारण परमेश्वर के साथ उनके रिश्ते तनावपूर्ण था। इस पाठ में भाषा अत्यंत कठोर है ताकि उन्हें यह स्मरण कराया जा सके कि परमेश्वर अभी भी आशीष का विकल्प देता है, परन्तु अवहेलना के परिणाम भयावह होंगे।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटे थीमेटिक बिंदु
अन्य क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षेप में व्याख्या)
यिर्मयाह के पाठों के साथ क्रॉस-रेफरेंसेज़ जो इस विचारधारा से जुड़ते हैं:
इन संदर्भों से एक सामान्य निष्कर्ष निकलता है: परमेश्वर की महिमा की मान्यता और उसकी सलाह पर चलना अन्धकार को रोक सकता है, जबकि अवहेलना और आत्म-स्वार्थ अंधकार पैदा करते हैं।
व्यावहारिक निष्कर्ष
यह verses इस बात को संकेत करते हैं कि जीवन में संतुष्टि और सुरक्षा तब है जब हम परमेश्वर की महिमा को सर्वोपरि मानते हैं और उसकी मार्गदर्शन में चलते हैं। यहोवा की बड़ाई से हम चेतना प्राप्त करते हैं और अपने आप को अंधकार से दूर रखते हैं—परन्तु यदि हम अपनी सोच और रास्तों में अडिग रहते हैं, तो प्रभावी परिणाम भयावह हो सकते हैं।
एजुकेशनल नोट्स (मूल टिप्पणीकारों के संकेत)
इस पाठ के अर्थ की गहराई समझने में पूर्व-विश्वसनीय टिप्पणियाँ एकत्रित करते समय, Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रवचनों से शुद्ध सार लिया गया है। उनके विचारों के अनुरूप, यह संदेश साहसपूर्वक यह बताता है कि परमेश्वर की महिमा आयोजित करने और उसकी चेतावनियों को मानने में ही जीवन का प्रकाश है।
क्यों यह aujourd'hui प्रासंगिक है
हम आधुनिक जीवन में भी अक्सर अंधकार को देखते हैं—नकारात्मकता, भय और निर्दयताएं। इस पद से सीख मिलती है: पहले परमेश्वर की बड़ाई और मार्गदर्शन को प्राथमिकता दें, ताकि आपके पाँव अंधकार से दूर रहें और प्रकाश के साथ जीवन चलता रहे।