Old Testament
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नहूम 3:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और जितने तुझे देखेंगे, सब तेरे पास से भागकर कहेंगे, नीनवे नाश हो गई; कौन उसके कारण विलाप करे? हम उसके लिये शान्ति देनेवाला कहाँ से ढूँढ़कर ले आएँ?
नहूम 3:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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नहूम 3:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 51:19 (HINIRV) »
ये दो विपत्तियाँ तुझ पर आ पड़ी हैं, कौन तेरे संग विलाप करेगा? उजाड़ और विनाश और अकाल और तलवार आ पड़ी है; कौन तुझे शान्ति देगा?

यिर्मयाह 15:5 (HINIRV) »
“हे यरूशलेम, तुझ पर कौन तरस खाएगा, और कौन तेरे लिये शोक करेगा? कौन तेरा कुशल पूछने को तेरी ओर मुड़ेगा?

प्रकाशितवाक्य 18:10 (HINIRV) »
और उसकी पीड़ा के डर के मारे वे बड़ी दूर खड़े होकर कहेंगे, ‘हे बड़े नगर, बाबेल! हे दृढ़ नगर, हाय! हाय! घड़ी ही भर में तुझे दण्ड मिल गया है।’ (यिर्म. 51:8-9)
नहूम 3:7 पर टिप्पणी: भागते समय शोक-आह्वान
यहिका-प्रकरण नहूम की भविष्यवाणी का एक कठोर भाग प्रस्तुत करता है जहाँ नीनवे की कारागारपूर्ण पतन की गति और उसकी उथल-पुथल देखकर जाति-जन समुदाय चकित और भयभीत होता है। जो पंक्ति यहाँ उद्धृत है, वह एक गहरी यातना-व्यंजक स्थिति को व्यक्त करती है: जो नीनवे को देखेंगे, वे भागेंगे और विलाप करेंगे कि यह विनाश कैसे हुआ, पर शान्ति कहाँ से लाएं। यह भाव दर्शाता है कि एक समय के महान शक्ति-प्रताप के पतन पर भी मानवीय हृदय शून्यता, उलझन और चकित रह जाता है।
पद का पाठ एवं संदर्भ
पद के अनुसार नहूम बताता है कि नीनवे जैसे महालेखक शहर का विनाश हो जाना कितना भयावह होगा; लोग उसके कारण होने वाले शांति-याचना के उपाय नहीं खोज पाएंगे, न ही उसे रोक पायेंगे। यह निष्कर्ष उसके दुष्कर्मों और अन्याय के परिणामस्वरूप आने वाले दण्ड का सार प्रस्तुत करता है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
नीहों के इस संदेश में तीन मुख्य विषय उभरते हैं: - दण्ड और चकित होना: नैतिक दायित्वों के टूटने पर समाज भीतर-भीतर भय और विलाप का अनुभव करता है। - सहायता की कमी: शान्ति-याचना के लिए आध्यात्मिक सहायता कहाँ से पाएँ? क्योंकि देव-न्याय के सामने स्वतन्त्र सुरक्षा नहीं मिल पाती। - परिशुद्धता का मूल्य: यहाँ संकेत यह है कि कमजोरी और बुराई के कारण एक राष्ट्र की संरचना कैसे टूट जाती है, और इसका प्रभाव वैश्विक दृष्टिकोण से भी महत्त्वपूर्ण होता है।
अन्य बाइबल पाठों से संयोग
नीहूम के स्मरण से मिलते-जुलते विचार अन्य ग्रंथों में भी मिलते हैं: - निर्बल राज्यों का पतन और परमेश्वर के न्याय का विषय: अप्सरा-हिसाब में जहां दुष्कर्म के चलते विनाश आता है, वहीं ईश्वर के τέλος-न्याय पर विश्वास बनता है (उद्धृत विचारधारा के साथ सार-संकेत)। - शान्ति का अभाव और अंतरात्मा की विलाप-आहटना: यहाँ मानवता के भीतर शांति के आकर और वास्तविक समाधान के लिए परमेश्वर की कृपा की खोज क्यों आवश्यक है, यह स्पष्ट होता है। - राष्ट्रों के स्थायित्व पर ईश्वर की योजना: सत्ता-स्थापना और पतन एक प्रवासी चित्र हैं, जो परमेश्वर के न्याय-सार के साथ जुड़ा है।
जीवंत अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंसेस और קצר सार
इस पंक्ति से जुड़े विचारों को समझने के लिए नीचे दिए गए चयनित संदर्भ मददगार हैं: - भविष्य का दण्ड और दयालुता का संतुलन: एक बिंदु पर परमेश्वर न्याय के साथ कृपा का संयोजन कैसे होता है, इसे देखने का मौका देता है। - राष्ट्र-नाश के समय विश्व-प्रत्युत्तर: सामाजिक प्रतिक्रिया के रूप में विलाप और शान्ति की तलाश का एक सेतु बन सकता है।
कृपया ध्यान दें कि यह पवित्र पाठ सत्य और नैतिकता के साथ उजागर करता है कि कैसे एक महान नगर का पतन उसकी नैतिक चेतना और देव-सम्बन्ध की कमी से जुड़ा है।
सारांश: नहूम 3:7 बताता है कि जब एक शक्तिशाली नगर अपने दुष्कर्मों के कारण बिखर जाता है, तो उसके निवासी भागकर विलाप करते हैं—शान्ति कहाँ से मिलेगी, यह उनके लिए एक अनुत्तरित प्रश्न बन जाता है। यह संदेश आज भी स्मरण दिलाता है कि समाज की सुरक्षा और शांति के लिए व्यक्तिगत और सामाजिक ढांचे में ईमानदारी, न्याय और दयावृत्ति की आवश्यकता है।