Old Testament
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नहूम 3:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हाय उस हत्यारी नगरी पर, वह तो छल और लूट के धन से भरी हुई है; लूट कम नहीं होती है।
नहूम 3:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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नहूम 3:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहेजकेल 24:6 (HINIRV) »
“इसलिए प्रभु यहोवा यह कहता है : हाय, उस हत्यारी नगरी पर! हाय उस हण्डे पर! जिसका मोर्चा उसमें बना है और छूटा नहीं; उसमें से टुकड़ा-टुकड़ा करके निकाल लो*, उस पर चिट्ठी न डाली जाए।

यहेजकेल 22:2 (HINIRV) »
“हे मनुष्य के सन्तान, क्या तू उस हत्यारे नगर का न्याय न करेगा? क्या तू उसका न्याय न करेगा? उसको उसके सब घिनौने काम बता दे,

नहूम 3:1 पर टिप्पणी—Contextual उद्घाटन
नहूम की किताब नहेमे-प्रेषिताओं के समय बर्बिलोनिया के विरोधाभासी हठधर्म, अत्याचार और विनाश के बारे में है। यहाँ का संदर्भ नहूम एक हत्या-भरी और छल-लूट से भरी नगरतुल्य साम्राज्य पर न्याय का संदेश देता है। यह आयत specifically "हाय उस हत्यारी नगरी पर" कहकर जलन, दुष्कर्म और लोभ के कारण शहर की चपेट में आये लोगों के लिए चेतावनी देती है। यह न केवल राजनीतिक-स्तर पर बल्कि सामाजिक और धार्मिक स्थिति पर भी एक कटु दर्पण है।
मुख्य भावार्थ
यह verse निम्नलिखित संकेत देता है: परमेश्वर की अदालत अपरिहार्य है; जो लोग छल और लूट से जीवनयापन करते हैं, उनके पीछे अनिवार्य परिणाम आते हैं। नहूम शत्रु के रूप में न केवल युद्ध-वृत्ति की निंदा करता है, बल्कि एक ऐसी नगर के लिए कठोर-सी शब्दावली से चीत्कार उठाता है जहां हिंसा और धोखा व्याप्त है। इस आयत में हिंसा का गहरा चित्रण है—यह न सिर्फ एक इतिहासिक टिप्पणी है, बल्कि नैतिक चेतावनी भी है कि समाज कैसे कमजोर और भ्रष्ट बनता चला जाता है।
मुख्य विषय
अन्य आयतों से सम्बन्ध
यहाँ चारों ओर के दखल के साथ जुड़ाव दिखता है:
इन cross-references से स्पष्ट होता है कि नहूम 3:1 एक व्यापक न्याय-भाव का हिस्सा है, जो पाप के सामाजिक संरचनाओं को फूटकर देखता है और पवित्र समाज की पुनर्संरचना का आह्वान करता है।
व्यावहारिक चिंतन
व्यावहारिक रूप से हमें यह सीख मिलती है कि सामाजिक-व्यवस्था में नैतिकता और पारदर्शिता आवश्यक है। चाहे कोई भी क्षेत्र हो—व्यापार, अभिवाह, या सामुदायिक निर्णय—फरेब और लूट से खुद को दूर रखना तथा सच और न्याय के साथ चलना परमेश्वर के सामने संतोषजनक है। यह आयत हमें दोष-युक्त समाज के विरुद्ध एक नैतिक सचेतना बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है:
संक्षिप्त समापन
नहूम 3:1 स्पष्ट करता है कि हिंसा, छल और लोभ से भरी नगरों की कहानी परमेश्वर की न्याय-प्रणाली के भीतर एक अपरिहार्य अन्त तक जाती है। यह आयत न सिर्फ एक ऐतिहासिक टिप्पणी है, बल्कि स्वीकार्य नैतिक दिशा-निर्देश है—क्योंकि सत्य, दया और न्याय के मार्ग से ही समाज सुरक्षित और मनुष्य का जीवन प्रतिष्ठित रहता है।
छोटे संदर्भों की दिशा-निर्देश
यहाँ कुछ संक्षिप्त cross-reference संकेत हैं—जिन पर आप गहराई से विचार कर सकते हैं:
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि नहूम 3:1 एक व्यापक नैतिक और सामाजिक चेतावनी है जो पुरानी शिक्षा के कीर्तिमान को पुनः उजागर करती है।
उद्धरण संकेत: यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के समान विचारों के सीधे छोटे उद्धरण चाहते हैं, तो बताने पर मैं केवल उन्हीं के प्रकाशित छोटे पंक्तियों के उपलब्ध हिस्सों को उद्धृत कर सकता हूँ और उनके स्रोत-वाक्यों को संगत संदर्भित रूप में दे दूँगा।