नहूम 2:13 बाइबल पद की व्याख्या
नहूम 2:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, मैं तेरे विरुद्ध हूँ, और उसके रथों को भस्म करके धुएँ में उड़ा दूँगा, और उसके जवान सिंह सरीखे वीर तलवार से मारे जाएँगे; मैं तेरे आहेर को पृथ्वी पर से नष्ट करूँगा, और तेरे दूतों का बोल फिर सुना न जाएगा।।
नहूम 2:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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नहूम 2:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 21:13 (HINIRV) »
“हे तराई में रहनेवाली और समथर देश की चट्टान; तुम जो कहते हो, 'हम पर कौन चढ़ाई कर सकेगा, और हमारे वासस्थान में कौन प्रवेश कर सकेगा?' यहोवा कहता है कि मैं तुम्हारे विरुद्ध हूँ।

भजन संहिता 46:9 (HINIRV) »
वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है!

नहूम 3:5 (HINIRV) »
सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, देख, मैं तेरे विरुद्ध हूँ, और तेरे वस्त्र को उठाकर, तुझे जाति-जाति के सामने नंगी और राज्य-राज्य के सामने नीचा दिखाऊँगा।
नहूम 2:13 — तत्कालीन संदर्भ से দেবत्व की चेतावनी और विश्वास की प्रतिक्रिया
इस पद में यहोवा सेनाओं की वाणी है, जो नहूम के समय नबियों के संदेश को दर्शाती है कि नीनवे के विरोधियों के विरुद्ध परमेश्वर सक्रियता से कदम उठा रहा है। यह शासकीय दमन और आक्रमण के अंधकारपूर्ण दिनों में भी, ईश्वरीय न्याय और शासन की स्पष्ट महिमा को उद्घाटित करता है। कहा गया है कि वह “रथों को भस्म करके धुएँ में उड़ा देगा” और “युद्ध के वीर तलवार से मारे जाएँगे”; साथ ही नाश होगा “तेरे आहेर” का और “तेरे दूतों का बोल” सुना नहीं जाएगा। इन तस्वीरों से यह संकेत मिलता है कि परमेश्वर अधर्म के विरुद्ध निर्णायक क्रोध और विजय का निर्धारक है, तथा असत्य पर सत्य की सत्ता बनी रहती है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में खुलासे
यह वाणी परमेश्वर की स्वायत्त शक्ति और निष्ठुरता के साथ न्याय करने की करवट है। वह दुष्ट शासन को ठेस पहुँचाकर विश्व में पुण्य की स्थापना करता है। साथ ही यह संदेश भी देता है कि परमेश्वर अपने लोगों की रक्षा और उद्धार में पूर्णतः सक्षम है, भले ही परिस्थितियाँ क्यों न कठिन हों। यह भरोसा देता है कि परमेश्वर का निर्णय पवित्रता और सत्य पर आधारित है, न कि मानवीय आकार-प्रकार और बल के अनुरोध पर।
महत्त्वपूर्ण शब्दों व चित्रों की व्याख्या
क्रॉस-रेफरेंस (संदर्भ) और उनके संक्षिप्त अर्थ
- यशाय 34:2-3: परमेश्वर के क्रोध और न्याय का व्यापक चित्रण; यह दिखाता है कि दुष्टों के लिए वही एक निर्णायक उद्देश्य है।
- दानिएल 2:44: परमेश्वर के राज की अटलता— मनुष्यों के समर पर भी वह शासन करता है और असत्य को ध्वस्त करता है।
- प्रकाशित1:5: आरम्भ से अंत तक ईश्वर के योजना के माध्यम से विजय का संदेश, जो विश्वासियों को आश्वस्त करता है कि विजयी परमेश्वर उनके साथ है।
आज के लिए लागू बातें
1) परमेश्वर की सत्ता हमारे भय-घनी परिस्थितियों में भी स्थिर है; वह अत्याचार के विरुद्ध न्याय दिखाने में सक्षम है।
2) हमें अपनी सुरक्षा और उद्धार के लिए परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखना चाहिए, न कि शक्ति-संस्थाओं पर।
3) कठिन समय में विश्वासी अपने भीतर दयालु और नम्र आचरण बनाए रखें, क्योंकि न्याय के दिन परमेश्वर के सामने प्रमाण-पत्र देंगे।
संक्षिप्त स्रोत-सार
ईश्वर की अदालत, न्याय और उद्धार की निर्बाध शक्ति का संदेश यह नहूम 2:13 में स्पष्ट है। यह बताता है कि परमेश्वर सत्य और पवित्रता के लिए खड़ा रहता है और तब भी जब मानव इतिहास अंधकार में हो, उसकी क्रिया से अंधकार छट जाएगा।
उद्धृत विचार (संरचित सार):
कथन स्रोतों से संचित संकेत: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के टिप्पणियों से उपलब्ध सामान्य धारा—परमेश्वर का न्याय और उद्धार का संयोजन, स्वार्थी शक्तियों के विरुद्ध परमेश्वर की विजय की गवाही।