नहूम 2:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यहोवा याकूब की बड़ाई इस्राएल की बड़ाई के समान ज्यों की त्यों कर रहा है, क्योंकि उजाड़नेवालों ने उनको उजाड़ दिया है और दाख की डालियों का नाश किया है।

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नहूम 2:2 पद-दर-पद बाइबल टीका

नहूम 2:2 के immediate setting और उसकी 의미

यहोवा य៉ाकूब की बड़ाई और इस्राइल की बड़ाई को पुनः स्थापित कर रहा है, ऐसा लगता है जैसे उजाड़ने वालों के बाद पुनः प्रभुत्व और नवीनीकरण का चरण आ गया हो। नहूम के समय इस्राइल पर आक्रमण और निर्वासन के संकेत स्पष्ट थे; परन्तु यह वाक्य यह दर्शाता है कि परमेश्वर के पास उनका उद्धार और उनकी मान की पुनःस्थापना का अधिकार बना हुआ है। यह कहते हुए कि “यहोवा याकूब की बड़ाई इस्राएल की बड़ाई के समान ज्यों की त्यों कर रहा है,” लेखक यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों का सम्मान और स्थिति नहीं छोड़ता, भले ही वे संकट में हों।

ईश्वर के बारे में जो सामने आता है

यह वाक्य तीन बातें उजागर करता है: पहला, परमेश्वर की स्थिरता—जो कुछ भी घटित हो—याकूब की बड़ाई कायम रहती है। दूसरा, उसकी योजना में न्याय और उद्धार दोनों शामिल हैं; उजाड़ने वाले ने उनका स्थान भिन्न किया, परन्तु परमेश्वर ने उनकी महिमा बनाए रखी। तीसरा, उसकी क्रिया का लक्ष्‍य है इस्राइल की पुनः प्रतिष्ठा। यह दर्शाता है कि ईश्वर अपने चुने हुए लोगों के साथ चिरस्थायी वचनों के अनुसार चलता है।

महत्त्वपूर्ण शब्दों/छवियों की व्याख्या

  • बड़ाई— यहाँ व्यक्तिगत दशा से अधिक राष्ट्रीय-चिह्न के रूप में: परमेश्वर अपने लोगों की प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित कर रहा है।
  • उजाड़नेवालों— उन शक्तियों, जो विरुद्ध होती हैं या तबाही लाती हैं; वे अंततः परमेश्वर की योजना के अंतर्गत उत्तरदायी मानी जाती हैं।
  • दाख की डालियाँ का नाश— एक पृथक समुदाय के नष्ट होने का चित्र, जिससे उद्धार और नवीनीकरण की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

संबद्ध लेखन से सम्बन्ध (cross-references)

1) जीवन्त उद्धार और पुनः प्रतिष्ठा का विचार होलेआ के समय से जुड़ा है; यह वाक्य उसी ध्वनि को दोहराते हैं कि परमेश्वर अपने लोगों को फिर से उठाता है।

2) बाइबल में न्याय के बाद उद्धार का क्रम है; यहाँ भी उजाड़ने वालों के बावजूद यहोवा की महिमा स्थिर है—याकूब और इस्राइल की योजना की केन्द्रीयता बनी रहती है।

3) गाथा-भाषा में उद्धार का चित्रण—परमेश्वर की महिमा और उसकी वाचा के साथ जोड़ा गया है; यह इस्राइल के लिए नई आशा का संकेत देता है।

आज के लिए व्यवहारिक अनुप्रयोग

1) कठिन समय में भी परमेश्वर की महिमा और वचन की स्थिरता याद रखें। जो भी परिस्थितियाँ सामने आएँ, उनकी सबसे बड़ी दिशा वह है जो परमेश्वर ने अपने लोगों के लिए निर्धारित की है।

2) उद्धार की आशा बनाए रखें—यहोवा केवल इतिहास की घटना नहीं है, वह आज भी अपने लोगों को उठाने और सम्मानित करने के लिए सक्षम है।

3) कठिनाइयों के बीच विश्वास समुदाय की महत्ता को समझें—जैसे यहूदी-उद्धार के क्रम में समाज एकजुट रहता है, वैसे आज भी गिरहों में भी प्रार्थना और सहयोग से शक्ति मिलती है।

सारांश

नहूम 2:2 यह स्मृति कराता है कि परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों की गरिमा को खोने नहीं देता। उजाड़ने वाले आएँ या जाएँ, ईश्वर का उद्देश्य तभी पूरा होता है जब वह भविष्य को लेकर अपने लोगों की बड़ाई को स्थापित करता है। यह घंटी है कि हमारे विश्वास में स्थिरता और उद्धार की आशा बनी रहे, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

नहूम 2:2 समानांतर पद और संबंधित वचन

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