Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यशायाह 49:26 का स्पष्ट उद्धारक-आह्वान
मुख्य interpretive बिंदु: आत्म-उद्धार का दायरा एक मोड़ पर तात्त्विक रूप से समर्थन देता है—क्योंकि परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के शत्रुओं को भी अनुकूल बनाने के लिए पूर्ण प्रभुत्व दिखाते हैं। यहाँ उद्धारकर्ता यहोवा का कान्तारूप है जो कभी-भी परास्त नहीं होता; अपना सम्मान और न्याय बनाए रखते हुए वह दुष्टों को भी अपने निर्णय के अधीन कर देता है ताकि सब प्राणी ईश्वर की प्रभुता को मान लें।
कूट-वाचनिक संदर्भ और साहित्यिक पृष्ठभूमि
यह चिह्नित उद्धारक-उक्तियाँ यशायाह के गूढ़ भविष्यवाणी-कार्य में आती हैं जहाँ परमेश्वर के दुर्व्यवहारों के विरुद्ध न्याय और उद्धार एक साथ प्रकट होते हैं। परमेश्वर अपने लोगों के लिए भय का नहीं, वरन् विजय का संदेश देते हैं। यह दलाई-वाद के साथ भी संगत है कि परमेश्वर अपने शत्रुओं को भी दंड दे कर अपनी महिमा को प्रकाशित करते हैं ताकि कभी-भी किसी को ईश्वर के उद्धार के मार्ग से भटकने का अवसर न मिले।
धर्मशास्त्रीय महत्व
इस पद में दो बातें स्पष्ट हैं: (1) जो तुझ पर अंधेर करते हैं उन्हें तेरे भोजन के रूप में देना—यह प्रतीक है कि दुष्टों की शक्तियाँ भी अंततः उनके अपने नुकसान का कारण बनेंगी, वे अपनी नीति के फलस्वरूप पीड़ित होंगे। (2) “तब सब प्राणी जान लेंगे कि tera उद्धारकर्ता यहोवा”—यह सार्वभौम दृष्टि है कि हर घड़ी में परमेश्वर का उद्धार और छुड़ाने की शक्ति निर्द्वंद्व रूप से प्रमाणित होती है, न कि केवल एक जाति के लिए bounded है।
Cross-references और उनका छोटा संक्षेप
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि उद्धार और दंड का क्रम एक-दूसरे के पूरक हैं—परमेश्वर अपने लोगों के लिए सुरक्षित और न्यायपूर्ण मार्ग बनाकर सबके सामने अपनी महिमा प्रकट करते हैं।
जीवन-परिसर के लिए विचारणीय प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यशायाह 49:26 हमें यह याद दिलाता है कि परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के लिए इतनी पूर्ण और विश्वसनीय सुरक्षा देता है कि दुष्टों की चाल भी उनके उद्धार में बाधक नहीं बनती। वह एक ऐसा उद्धारकर्ता है जो समस्त सृष्टि के लिए प्रभुता और चंगाई की घोषणा करता है, ताकि सभी जानें कि यहोवा ही हमारा मजबूत छुड़ानेवाला है।
पूर्व-ग्रंथीय चर्चा के अनुसार, इस पाठ के लिए मैथ्यू हेनरी, आल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के कुछ संक्षिप्त उद्धरण (यदि उपलब्ध) नीचे रखे जा रहे हैं: हमें उनके द्वारा उद्धृत पूर्ण टेक्स्ट की प्रत्यक्ष-वाक्यों की पुनरावृत्ति नहीं करनी चाहिए, पर यह संकेत दिया गया है कि उनकी टिप्पणियाँ उद्धार-न्याय के इन आयामों को स्पष्ट करती हैं।