Old Testament
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यशायाह 49:15 का पाठ—माता का दूध और ईश्वर की अनमोल निष्ठा
यह पद उस समय का चित्र खींचता है जब इज़राइल भगवान से आहत होकर निराशा के क्षणों में है, फिर भी प्रभु उसे स्मरण और उद्धार के पाठ पढ़ाते हैं। यहाँ एक माता के प्रेम की तीव्रता को तुलना के रूप में इस्तेमाल किया गया है ताकि यह स्पष्ट हो कि परमेश्वर का अपने लोगों के प्रति प्रेम कितना स्थिर और अटल है।
पठ केImmediate Setting
यशायाह के पिछले भागों में परमेश्वर ने इस्राइल के लिए दया, उद्धार और फिर से बसाने की वादियाँ दी थीं। 49 वचन 15-16 में एकदम सहज, दार्शनिक-सी तुलना के माध्यम से कहा गया है कि भले ही दुनिया याददाश्त खो दे, पर परमेश्वर का स्मरण और प्रेम अक्षय है। यह न सिर्फ स्त्री-धारणा की कोमलता है, बल्कि एक प्रतिज्ञा है कि वह अपनी आश्रित संतान को कभी नहीं भूलेगा।
गुण और छवि—क्या बता रहा है?
यहाँ दो प्रमुख चित्र उभरते हैं:
आखिरकार वचन कहता है: मैं तुझे नहीं भूूल सकता—यह परमेश्वर की पक्की और अटूट दया का उद्घोष है, जिसमें उद्धार, सुरक्षा और भागीदारी शामिल है।
परिभाषित शब्दों और छवियों की स्पष्टता
— भूलना में अक्सर दर्शनीय स्मृति चूक नहीं, बल्कि प्रेम और जिम्मेदारी से हटना भी शामिल हो सकता है; पर यहाँ परमेश्वर का स्मरण रखा गया है।
— दया—कृपा जो स्थिर और निरंतर है, केवल परिस्थिति से नहीं, बल्कि स्वभाव से है।
संदर्भित बन्धन—अन्य समान विचारक पंक्तियाँ
यहाँ कुछ प्रचलित टिप्पणीकारों के विचार जिनसे पाठ की दृढ़ता बढ़ती है:
Matthew Henry: “God’s remembrance of his covenant and promises is stronger than the memory of natural affection; he will not forget his people.”
Albert Barnes: “Though maternal love may falter, God’s fidelity is constant; he has engraved His people on the palm of His hand.”
Adam Clarke: “The figure of a mother’s care is used to show the fierce and constant attachment of the Divine to His church.”
अन्य संबंधित पद-रेफरेंसेस
इन संदर्भों में दिखता है कि परमेश्वर का प्रेम सभी परिस्थितियों पर विजय पाता है और व्यक्ति-जीवन के हर मोड़ पर साथ रहता है।
आज के लिए उपयोगिता
इस वचन से हमारी प्रार्थना और विश्वास को दृढ़ता मिलती है कि कठिन समय में भी भगवान हमारे साथ है। वह अपनी स्मृति और वचन के अनुसार उद्धार का कार्य करता है, भले ही इंसानी भरोसे में कमी क्यों न हो जाए। आत्म-विश्वास और सुरक्षा की उस गारंटी को पकड़िए जो परमेश्वर देता है—कि वह हमें कभी नहीं भूलेगा, बल्कि अपनी करुणा से हमें संभाले रखेगा।