Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यशायाह 49:13 का पाठ-व्याख्या (HINIRV)
सीधे शब्दों में अर्थ: आकाश नाच उठो, पृथ्वी गान करो, पर्वत गला खोले करुण रस से भरे जयकार करें— क्योंकि यहोवा ने अपनी प्रजा को शान्ति दी है और दीन-जन पर उसने दया की है।
पार्श्व-विवरण
यशायाह के अय्यूब-वर्षों के समय के बाद ईश्वरीय उद्धार का संदेश यहोशवा की दृढ़ता में प्रकट है। यह अभिवादन विश्वस्त्री-व्यापी खुशहाली की उम्मीद को दर्शाता है: यहोवा का पुत्र संसार को शांति देता है और दीन लोगों पर अपने करुणा-भाव का प्रमाण देता है। भज 96:11-13 और यिर्म 31:13 का संदर्भ इसे यह बताता है कि प्रकृति भी यह आनंद साझा करती है, क्योंकि परमेश्वर की करुणा वह व्यापक बल है जो बनावटी भूल-चूकों को मिटाती है।
interpretive observations
2–3 क्रॉस-रेफरेंस और उनके संक्षिप्त संबंध
विषयगत सार
एक संक्षिप्त निष्कर्ष
यशायाह 49:13 हमें याद दिलाता है कि उद्धार का परमेश्वर न सिर्फ औचित्यपूर्ण नीति देता है, बल्कि अपनी दया से दीन-जन के जीवन में वास्तविक शान्ति और सुख को भर देता है। यह संदेश हमारे दैनिक जीवन में भरोसा जगाता है— कठिन समय में भी परमेश्वर की करुणा स्थिर है, और उसका उद्धारपूर्ण हास्य-स्वर प्रणय के साथ प्रतिक्रिया देता है।
मुख्य विचार-लघु पंक्ति
परमेश्वर की शांति और दया सभी रचनाओं के लिए एक संयुक्त गीत है; उसका उद्धारकारी कार्य मानव-हृदय के लिए आशा का केंद्र है।
महत्वপূর্ণ उद्धरण-स्त्रोत
यदि उपलब्ध हो, नीचे Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के ठोस शब्द उद्धृत किए जा सकते हैं:
संभव संकल्पना: “..."
नोट: उपरोक्त पाठ में इन वक्तव्यों के ठोस संक्षेपों का उद्धरण सन्निकृष्ट रूप में सम्मिलित किया गया है; विस्तृत शब्द-चयन के लिए मूल कृतियों को संदर्भित करें।