Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यशायाह 49:7 — सार ग्रंथीय अर्थ
इस पद में यहोवा बताता है कि जो मनुष्यों की दृष्टि में तुच्छ और घृण्य माना जाता है, जो दास-सी सेवक बनकर नेतृत्व के मानक से बाहर है, वही ईश्वर के उद्धारकर्ता के रूप में प्रतिष्ठित किया जाएगा। राजा उसे देखकर खड़े होंगे, हाकिम दण्डवत् करेंगे, क्योंकि यह उद्धारकर्ता यहोवा के निमित्त सच है और जिसने इस्राएल को चुना है।
पृस्थिभूमि और संदर्भ
यशायाह के कविता-ग्रंथों में यहोवा का दायित्वपूर्ण उद्धारक प्रस्तुत होता है जो दुखी और तुच्छ स्थितियों में भी आत्मविश्वास बनाए रखता है। इस चिह्नित पद में यहोवा अपने चुने हुए लोगों के लिए एक असामान्य रूपरेखा खोलते हैं: एक दास चरित्र जिससे समाज की सामान्य मान्यता का विरोध होता है, परन्तु वह परमेश्वर की देखरेख और उद्धार के केंद्र में है। यह उद्धारकर्ता विश्व-प्रेरणा के रूप में दिखता है—राजाओं के लिए प्रेरणा, और दीन लोगों के लिए आशा का केंद्र।
Interpretive observations (व्याख्यात्मक बिंदु)
धार्मिक सन्देश के 2-3 प्रमुख बिंदु
अनुसंगिक क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भ) और संक्षिप्त व्याख्या
1) यशायाह 42:4 — दया और न्याय की यह जो गतिशीलता है, वह उद्धारकर्ता के संदेश में क्रियाशील रहती है; प्राप्तकर्ता की स्थिति चाहे कैसी भी हो, परमेश्वर की योजना आगे बढ़ती है।
2) इब्रानियों 2:9 — मसीह के विषय में यह क्रिया उस दास-स्वरूप का निरसन नहीं करती, बल्कि यह दिखाती है कि दुख-संकट के बीच भी परमेश्वर की कृपा से वह ऊँचा किया गया है।
3) मत्तय 23:12 — जो अपने आप को ऊँचा करते हैं, वे नीचे गिरे जाते हैं, और जो नम होते हैं, वे ऊँचे किये जाते हैं; यह उद्धारकर्ता इस सिद्धान्त के अनुरूप है कि प्रभु की महिमा निम्नतम स्थितियों से प्रकट होती है।
कथा-सार और व्यावहारिक निष्कर्ष
यह पद हमें यह याद दिलाता है कि ईश्वर की उद्धार योजना मानवीय मानक से ऊपर है। तुच्छ दिखने वाला सेवक, जो दास की तरह व्यवहार करता है, वही महान उद्धारकर्ता बनता है क्योंकि वह यहोवा के निमित्त सच है। हमारी प्रतिक्रिया: कठिनाइयों में धैर्य रखें; प्रभु के चयन पर भरोसा करें; और सांसारिक शौर्य की बजाय परमेश्वर की सत्यता को महत्त्व दें।
यशायाह के संदर्भ से प्रेरित संक्षेप
यह संदेश यह बताता है कि ईश्वर का उद्धारक वर्ग-विपरीत स्थिति से प्रभु की महिमा उजागर करते हुए सभी जातियों के लिए रोशनी है। यहोवा द्वारा चुने जाने की पुष्टि से मानव-सम्प्रदाय के भीतर भी सम्मान और प्रतिपादन प्राप्त होता है, क्योंकि उद्धारकर्ता की सच्चाई और पवित्रता उच्चतम सत्ता का प्रदर्शन है।
इन उद्धरणों में सटीक अभिज्ञानात्मक पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं: “यहोवा के निमित्त होगा, जो सच्चा और इस्राएल का पवित्र है और जिसने तुझे चुन लिया है।” (य़शायाह 49:7, HINIRV)