Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 9:4 का संदर्भ और उसका अर्थ
यशायाह के संदेश में यह वचन आशा के संकेत के साथ आता है। ब Psalm में कहने के बजाय, इस verse में भविष्यवाणी है कि मसीह के आशीष से लोगों के दुष्ट शत्रुओं के अत्याचार टूटेंगे। विशेषतः जैन-युग की दासता और असमानता के प्रतीक रूप में हिरण्य, भारी जूए और बाँस एक metaphor है जो शासन के वजन और बुराई के प्रभाव को दर्शाता है। यह संकेत देता है कि ईश्वर की योजना में सत्ता परिवर्तन और शांति का संदेश है।
केंद्रीय विचार: परमेश्वर की कृपा से उन जन्म-जात बंधनों पर कटौती होगी जो लोगों को बदहाली और शत्रुता में डालते हैं; न्याय और विश्वास के साथ सत्ता-तंत्र की चोट दूर होगी, ताकि लोग स्वतंत्र होकर ईश्वर की राह पर चल सकें।
मुख्य विषय
सम्बद्ध पवित्र ग्रंथों से संकेत
यशायाह के इस भाग को अन्यामियों में भी उद्धार की आशा से जोड़ा गया है:
संदर्भित पाठों से यह स्पष्ट होता है कि औपनिषदिक सत्ता-तनावों के टूटने के साथ एक उद्धारकारी आगमन का गह्वर है।
व्यावहारिक विचार
यह वचन आज भी हमें संयम, दया और न्याय की प्रेरणा देता है। जब हमारे व्यक्तिगत और सामाजिक बंधन अत्याचार या भय से भरे हों, तो ईश्वर की नीतियों को याद करें—जो स्वतंत्रता, क्षमा और सामाजिक शांति की यात्रा खुलती है।》
संक्षिप्त समापन
यशायाह 9:4 एक आश्वस्त-संदेश है कि परमेश्वर के उद्धार से दमन समाप्त होंगे, और यह प्रतीकात्मक रूप से मिद्यानियों के दिन की याद दिलाती है कि दमनकारी शक्तियों पर किस प्रकार प्रभु की सत्ता को मान्यता मिलेगी। यह वचन हमें भविष्य की विजय की उम्मीद देता है—एक ऐसी नई व्यवस्था जिसमें भय नहीं, बल्कि स्वतंत्रता और न्याय होगा।
छोटे cross-reference-नोट
यशायाह 9:4 के साथ निम्न cross-references विचारयोग्य हैं:
इन难 संकेतों से एक स्पष्ट नज़रिया मिलता है कि उद्धार केवल व्यक्तिगत लाभ नहीं, बल्कि समाज-निर्माण के लिए एक नई व्यवस्था का आगमन है।
टीका-सार: परमेश्वर की शक्ति से अत्याचार टूटते हैं; उद्धार और शांति का राज्य धीरे-धीरे स्थापित होता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke) मौजूद स्रोतों के अनुरूप नहीं हैं, क्योंकि आपूर्ति योग्य पूर्ण-पाठ उद्धरण यहाँ प्रस्तुत नहीं किया गया है; केवल उनके विचारधाराओं के आधार पर सामान्य सार संक्षेप किया गया है।