Old Testament
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यशायाह 9:6 का अर्थ और संदर्भ
इस वचन के अनुसार हमारे लिए एक बालक हुआ, एक पुत्र दिया गया है; और उसकी प्रभुता उसके काँधे पर होगी। इसका अभिप्राय परमेश्वर द्वारा प्रदत्त उद्धारकर्ता की विराट उपस्थिति और राजसी अधिकार से है, जो भविष्य में इजरायल और समस्त विश्व के लिए शांति का राज स्थापित करेगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह आयत बाइबल के ऐतिहासिक/भविष्यवाणी भाग का भाग है, जो असुरों के अत्याचार के बीच जो शांति और उद्धार की अपेक्षा थी, उसे उद्धृत करती है। यह भविष्यवाणी यहूदी समुदाय को यह स्मरण कराती है कि परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के लिए एक मार्गदर्शक राजा भेजेगा, जो हर बाधा पर विजय पाएगा और न्याय-शांति को स्थापित करेगा।
व्याख्या और प्रमुख बिंदु
सूक्ष्म क्रॉस-रेफरेंसेस
यूहन्ना 1:45-46— मसीह के पवित्र प्रकटन को पुराने अभिधारणाओं में पूरा करते हैं, जो कि एक शर्मीले राज्य नहीं, बल्कि ज्ञान-जीवन और प्रकाश का स्रोत है। इफिस्त 2:14— यूरोप-युग की देहरी पर शांति और एकता के लिए यीशु का मध्यस्थतत्व दिखाता है।
सूक्ष्म interpretive observations
यह पद यह बताता है कि उद्धारकर्ता का आगमन न केवल व्यक्तिगत उद्धार है, बल्कि सामूहिक राज्य-व्यवस्था में परिवर्तन की शुरुआत है। शांति-राज की अवधारणा यह संकेत करती है कि धार्मिक-राजनीतिक सत्ता का एक नया ढांचा आकार लेगा, जिसमें न्याय, करुणा और एकता एक दूसरे के पूरक होंगे।
छोटा थीमैटिक सूची
संबंन्धित उद्घोषणा (संक्षिप्त संबंधित पाठ)
यूहन्ना 1:45-46 संदर्भ में कहा गया है कि मसीहा के आगमन से पुराने प्रतीकों का आध्यात्मिक अर्थ स्पष्ट होता है। इफिसियों 2:14 यह बताता है कि यीशु शान्ति का निर्माण कर, विभाजन-रेखा को दूर करता है।
व्यावहारिक takeaway
हम यीशु के प्रभुत्व और शांति-राज की आशा के साथ जीते हैं। मुश्किल समय में भी उसकी उपलब्ध आशीष हमें धैर्य और साहस देता है। यह देखने की कोशिश करें कि अद्भुत-युक्ति करनेवाला के रूप में वह हमारे जीवन के निर्णयों, परिवार और समुदाय में शांति कैसे स्थापित कर रहा है।
कुछ शब्दों के अभिवचन
यहाँ मसीही-वाणी की एकता-बोध है: उद्धारक की महिमा एक साथ धर्म-न्याय और व्यक्ति की सेवा में प्रकट होती है।