यशायाह 9:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मनश्शे एप्रैम को और एप्रैम मनश्शे को खाता है, और वे दोनों मिलकर यहूदा के विरुद्ध हैं इतने पर भी उसका क्रोध शान्त नहीं हुआ, और उसका हाथ अब तक बढ़ा हुआ है।

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यशायाह 9:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 9:21 पर दृष्टि: मनश्शे और एप्रैम का कुल मिलाकर यहूदा के विरुद्ध क्रोध निरंतर

मुख्य निष्कर्ष: यह पद यह दर्शाता है कि उत्तर-पश्चिमी दास्यता-युग में भी इस्राइल के भीतर विभाजन और बुराइयों के कारण दया के बावजूद परमेश्वर का क्रोध टूट नहीं पड़ा है; मनश्शे और एप्रैम एक दूसरे के सहयोग से यहूदा के विरुद्ध उठे, परन्तु परमेश्वर की सत्ता और हाथ अभी भी उठे हुए हैं। यह संकेत देता है कि असंगत आचरण के कारण न्याय आ सकता है, परन्तु प्रभु की दया और शासनका मार्ग भी अभी खुला है।

कला-गतिपरक साहित्यिक संदर्भ

यशायाह के इस भाग में उत्तरराष्ट्र के विभाजन के समय की सामाजिक-धार्मिक तल्खियाँ सामने आती हैं। ऐतिहासिक संदर्भ में मनश्शे (मनश्शे) और एप्रैम राज्यों के अंदर उनकी नफरत और भरोसेघर विरोध यहूदा के साथ गहरे राजनीतिक तनाव का कारण बनते हैं। यहाँ प्रभु की युक्ति स्पष्ट है: जब एकता टूटती है तो दया से भरे मार्ग भी उजागर होते हैं, लेकिन दंड और विवेचित कारणों की चोट भी रहती है। यह टेक्स्ट यह बताता है कि दया के साथ न्याय का संयोजन कैसे काम करता है—क्रोध इतना अधिक है कि अब भी उसका हाथ उठाए हुए है।

धार्मिक-आध्यात्मिक significance

यह अंश यहूदियों के लिए एक चेतावनी है कि आंतरिक भ्रष्टाचार, सत्ता-लालच और परमेश्वर की व्यवस्था से मोहभंग उनके लिए विनाशकारी हो सकता है। साथ ही, यह संकेत देता है कि परमेश्वर को यह शर्म नहीं कि वह अपने folk में विभाजन और दुराचार देखे, परन्तु वह न्याय के हाथ को कभी नहीं हटाते। नीतिगत यह भी है कि परमेश्वर के क्रोध की निरंतरता यहूदियों के सामाजिक-आर्थिक असंतोषों के परिणामस्वरूप दिखती है, और यह बताती है कि दया के मार्ग कैसे खुलते हैं जब जनता लौटती है।

Cross-references (छोटे संदर्भ-उद्धरण के साथ)

  • यशायाह 7:7–9 — यहूदियों के विरुद्ध दुष्कर अवस्थाओं में परमेश्वर की योजना और आस्था की कमी से जुड़ा चेतावनी संकेत।
  • यिर्मयाह 25:9 — राष्ट्र-प्रतिशोध के विरुद्ध न्याय और दया के समय की भूमिका।
  • होशे 10:4 — धर्मत्याग और राजकीय अन्याय से जन्मे प्रतिक्रियात्मक परिणाम।

इन संदर्भों में यह समझ आता है कि क्रोध और दया, न्याय और दावत, सब परमेश्वर की व्यवस्थित योजना का भाग हैं। दया की आशा तब भी बनी रहती है जब सामाजिक शीर्ष पर भ्रष्टाचार present हो।

ज्ञात उत्तर-अन्वेषण: प्रश्न-चिंतन

  • हम अपने सामाजिक-राजनीतिक दृष्टिकोण में कहाँ-जहाँ विभाजन को बढ़ाते हैं, और कैसे हम दया के साथ सच का स्थान बना सकते हैं?
  • क्या हमारी सामुदायिक-संबद्धता में न्याय के साथ करुणा का संतुलन है, या हम केवल दबाव देते हैं?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यशायाह 9:21 यह बताता है कि दो राज्यों—मनश्शे और एप्रैम—के अनुचित गठजोड़ से यहूदा पर विपत्ति की छाया पड़ी, पर परमेश्वर का हाथ अभी भी सक्रिय है। यह संदेश हमें याद दिलाता है कि विभाजन और अन्याय के बीच दया और न्याय के मार्ग खोले जा सकते हैं, जब लोग लौटकर परमेश्वर की योजना के अनुसार व्यवहार करें।

महत्वपूर्ण उद्धरण (यदि उपलब्ध हों) —Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke:

कहते हैं कि क्रोध तब तक रहता है जब तक परिवर्तन नहीं आता, और जो व्यवहारियों में घुली ग़लतियाँ हैं, उनके परिणाम भी बने रहते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 9:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यशायाह 5:25 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 5:25 (HINIRV) »
इस कारण यहोवा का क्रोध अपनी प्रजा पर भड़का है, और उसने उनके विरुद्ध हाथ बढ़ाकर उनको मारा है, और पहाड़ काँप उठे; और लोगों की लोथें सड़कों के बीच कूड़ा सी पड़ी हैं। इतने पर भी उसका क्रोध शान्त नहीं हुआ और उसका हाथ अब तक बढ़ा हुआ है।

यशायाह 9:12 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 9:12 (HINIRV) »
और उनके शत्रुओं को अर्थात् पहले आराम को और तब पलिश्तियों को उभारेगा, और वे मुँह खोलकर इस्राएलियों को निगल लेंगे। इतने पर भी उसका क्रोध शान्त नहीं हुआ और उसका हाथ अब तक बढ़ा हुआ है।

2 इतिहास 28:6 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 इतिहास 28:6 (HINIRV) »
रमल्याह के पुत्र पेकह ने, यहूदा में एक ही दिन में एक लाख बीस हजार लोगों को जो सब के सब वीर थे, घात किया, क्योंकि उन्होंने अपने पितरों के परमेश्‍वर यहोवा को त्याग दिया था*।

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