Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 25:20 पर टिप्पणी: संदर्भ और अर्थ
यिर्मयाह के ग्रंथ में ईश्वरीय प्रकोप और दण्ड की भविष्यवाणी क्रमशः चलती है। इस verse में विशेषकर उन सभी विदेशी Nations और उनके राजाओं का उल्लेख है जिन्हें परमेश्वर के दण्ड के समय दण्डित किया जाएगा। यह भागांतरिक क्रम “याजकों, नगरों, देशों” के दायरे से बाहर के समुदायों तक फैला है, ताकि यह दिखे कि बंधन और दुष्कर्म के परिणाम पूरे क्षेत्र पर लागू होते हैं, न कि केवल एक समुदाय तक सीमित रहते हैं।
मुख्य अर्थ
यह पद स्पष्ट करता है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए जो दण्ड और निर्णय देता है, वह व्यापक है। विदेशी राजाओं और पथभ्रष्ट राष्ट्रों को चेतावनी मिलती है कि उनका भाग भी उस दंड से अछूता नहीं रहेगा यदि वे परमेश्वर के लोगन के रास्ते से भटकते हैं। यह नीति-आधारित दण्ड नहीं, वरन् यह दिखाने के लिए है कि प्रभु सर्वव्यापी न्याय करता है: हर क्षेत्र, हर जाति, हर सत्ता के लिए एक दिन आ सकता है जब उनका ढांचा टूटेगा।
दो-तीन प्रमुख थीम
संबद्ध पाठ (cross-references) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
व्यावहारिक विचार
धार्मिक समुदाय के लिए यह शिक्षा कि बाहरी राष्ट्रों के साथ भी परमेश्वर का नियम समान रूप से लागू होता है, हमें आस्था और नैतिकता के स्तर पर सचेत रहने की प्रेरणा देती है। विश्व-राजनीति के दबावों के बीच हमारे लिए यह है कि हम ईश्वर के निर्देशों को न केवल अपने समुदाय के भीतर, बल्कि पूरे सामाजिक ढांचे में अपनाने की प्रतिबद्धता रखें। व्यक्तिगत स्तर पर भी यह पूछना उचित है: क्या मैं अपने कार्यों में ईमानदारी, दया और निष्ठा दिखा रहा हूँ?
क्यूरेटिव सार
यिर्मयाह 25:20 का संदेश इस बात को दोहराता है कि परमेश्वर न्यायी है और उसकी दृष्टि सभी राष्ट्रों पर है—पलिश्तियों, अश्कलोन, गाज़ा और अन्य निवास स्थानों के राजाओं तक। यह पाठ(inputs) हमारे लिए एक चेतावनी और एक मार्गदर्शक है कि हम अपने आप को ढालकर नयी दिशा की ओर लौटें और परमेश्वर के नियमों के अनुरूप जीवन जिएं।
उद्धृत उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke): यदि आवश्यक हो तो इन comentarियों के अनुसार निम्न मूल धाराओं का संक्षेप संदर्भ मिलता है; परन्तु यहाँ पूर्ण पाठ उद्धृत नहीं किया गया है।