Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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स्थानीय संदर्भ और पाठ का तुरंत परिचय
यिर्मयाह 25:19 में प्रस्तुत पाठ मिस्र के राजा फ़िरौन, उसके कर्मचारियों, हाकिमों और समूची प्रजा तक पहुँच रहा है। यह भाग उस व्यापक भविष्यवाणी चक्र का हिस्सा है जिसमें बायबल सलाह देता है कि परमेश्वर के निर्णय कब और कैसे पूरे होते हैं—कभी-कभी सत्ताधिकारी सत्ता के कारण, कभी-न-कभी उन के साथ जुड़ी हुई सामरिक घटनाओं के माध्यम से। यहाँ मिस्र राज्य-व्यवस्था का उल्लेख एक विशिष्ट उदाहरण के रूप में आता है जिससे यह स्पष्ट होता है कि शासन-व्यवस्था के अंतर्निहित घटनाक्रम परमेश्वर की योजना से निर्भर हैं।
पाठ से परमेश्वर या विश्वास के बारे में जो कुछ मिलता है
यह पाठ दिखाता है कि परमेश्वर सभी राष्ट्रों के मामलों पर नियंत्रण रखता है, चाहे वहाँ के राजा हों या प्रजा। यिर्मयाह की बातों में परमेश्वर की न्याय-व्यवस्था स्पष्ट है—किसी भी सत्ता के अंत नहीं होते जब तक वह ईश्वर की इच्छानुसार नहीं चलता। विश्वास की दृष्टि से यह आश्वासन देता है कि संसार के राजनीतिक हालात परमेश्वर के sovereign योजनाओं के अंतर्गत हैं, और उनका उद्देश्य न्याय, दया और विनाश के समय से बचना है जब पात्र धर्मी रहते हैं।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्रों की स्पष्टता
- मिस्र के राजा फ़िरौन: यहाँ एक शक्तिशाली सत्ता के प्रतिनिधि के रूप में माना गया है, जो कि पृथ्वी की राजनीति का केंद्र है।
- कर्मचारियों, हाकिमों: शासन-व्यवस्था के क्रमबद्ध अधिकारी जो राजा के आदेशों को उठाते और लागू करते हैं।
इन शब्दों से यह समझ आता है कि एक बड़े साम्राज्य की संरचना कैसे ऊपर-नीचे सब कुछ नियंत्रित करती है, परन्तु परमेश्वर के सिद्धांत उससे ऊपर रहते हैं।
अन्य प्रासंगिक आयतें और उनके सार
- यिर्मयाह 25:20-21; 25:32-38: ये आयतें दिखाती हैं कि परमेश्वर ने राष्ट्रों के लिए योजनाएँ निर्धारित की हैं और गलत रास्ते पर चलने वाले की निंदा भी वहीं होती है।
- यिर्मयाह 27-29: जहाँ प्रभु का संदेश एक बड़े साम्राज्य के केंद्र से निकलकर दया और उपदेश देता है—यह दर्शाता है कि सत्ता और निर्णय की दिशा परमेश्वर के हाथों में है।
आज के संदर्भ में उपयोगी अनुप्रयोग
Cross-references (संक्षिप्त सार और उनका अर्थ)
- यिर्मयाह 29:7: जहाँ निवासियों के शांति-चाह को परमेश्वर की योजना से जोड़कर देखा गया है; यह प्रेरणा देती है कि अपने शहर के शांति के लिए प्राथना करें।
- डैनिएल 2:21: सत्ता-परिवर्तन पर परमेश्वर का नियंत्रण स्पष्ट है; यह बताता है कि kingdom के नेता किस तरह बदले जाते हैं और परमेश्वर के उद्देश्य पूरे होते हैं।
- मत्ती 6:33: पहले परमेश्वर की राज्या और उसकी righteousness की खोज का आग्रह; जीवन के हर क्षेत्र में ईश्वर राज्य के उत्तरदायित्व का स्मरण कराता है।
संक्षिप्त समेकन
यिर्मयाह 25:19 का पाठ हमें सिखाता है कि परमेश्वर राष्ट्रों के शासन-व्यवस्था को भी अपने नियंत्रण में रखता है। यह विश्वास देता है कि राजनीतिक घटनाक्रम कभी-अभी ईश्वर की उच्च योजना की पूर्ति के लिए चलते हैं। हमारे लिए आवश्यक है कि हम वर्तमान राजनीतिक-समय में भी परमेश्वर की इच्छा को खोजें, न्याय और करुणा के साथ जीवन बिताएं, और अपने समुदाय के लिए दया और शान्ति की प्रार्थना करें।
उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से यदि उपलब्ध सटीक उद्धरण हों, वे नीचे उल्लेखित शर्त के अनुसार विशेष रूप से उद्धृत हो सकते हैं—परन्तु यहां पाठ के भावार्थ को नया बनाकर प्रस्तुत किया गया है ताकि हिंदी पाठक आसानी से समझ सके.