यिर्मयाह 25:26 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और क्या निकट क्या दूर के उत्तर दिशा के सब राजाओं को एक संग पिलाया, इस प्रकार धरती भर में रहनेवाले जगत के राज्यों के सब लोगों को मैंने पिलाया। और इन सबके बाद शेशक के राजा को भी पीना पड़ेगा।

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यिर्मयाह 25:26 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 25:26 का संदर्भ और अर्थ

यिर्मयाह के भाग में पूरब के विशाल दलों के विरुद्ध परमेश्वर की इच्छा प्रकट होती है: यह भविष्यसूचक विरोधाभास है कि निष्ठुर शासन और अन्य राष्ट्रों के राजा एक-एक कर दुष्ट शासन के सामने झुकेंगे। इस पद में, यह दिखाया गया है कि परमेश्वर के निर्णय से सभी राजाओं और राष्ट्रों को एक साथ पिलाने की नीति चलती है—यानी दुष्टता के उपरान्त एक न्यायपूर्ण परिणाम। लेकिन यह भी एक तात्कालिक चेतावनी है कि परमेश्वर की योजना के अनुसार सबकुछ नियंत्रण में है, और वह हर जाति, हर राजा के साथ कानूनी क्रम स्थापित कर रहा है।

केंद्रीय अर्थ — यह आयत दिखाती है कि परमेश्वर की न्याय-योजना में भौगोलिक सीमाएं नहीं रहतीं। नजदीकी और दूरस्थ राजाओं को एक ही चेतावनी और दायित्व के अधीन किया गया है: वे सब अपने कर्मों के अनुसार उत्तरदायी ठहरते हैं। संदर्भ के अनुसार यह एक मिथिल-आक्रामकता के समय की चेतावनी है, जहाँ बर्बास के समय देश-देश के राजाओं को एकत्र कर ‘शेशक’ के राजा (पश्चिमी प्रतीक) के साथ वही परिणाम मिलेगा, जो उनके कर्मों का परिणाम है।

मुख्य विषय

  • कायदे-बाह्य न्याय: परमेश्वर सभी राष्ट्रों को एक ही क्रिया-प्रक्रिया के तहत पूछताछ के लिए प्रस्तुत करता है, चाहे वे किस दिशा से हों या कितने शक्तिशाली हों।
  • प्रतीबद्ध सामंजस्य: सभी राजा एक साथ “पिलाए” जाते हैं—यह दुष्ट शासन के अंत का प्रतीक है और पालनहार के न्याय का उद्घोष है।
  • गुण-आचरण के परिणाम: यह दर्शाता है कि कर्म के अनुसार ही परिणाम आते हैं; न कोई बड़े राज्य बच सकता है न छोटे राज्य—सबके कर्म महामहिम के सामने जवाबदेह हैं।

संबद्ध बिंदु (cross-references) और उनका संक्षिप्त स्पष्टीकरण

  • यिर्मयाह 27-28: परमेश्वर के राज्य बनने की पूर्व-आग्रह-सी जुड़ी चेतावनी—सभी राजाओं के लिए एक समान नियम।
  • यशाय 2:2-4: अंतिम-days मेंजातियों के राज्य सत्यान्वेषण और शांति-न्याय का प्रतीकात्मक चित्र, जो एक सार्वभौम प्रभु के शासन का संकेत देता है।
  • दानिएल 4:17: सभी राज्यों के निर्णय परमेश्वर की वही महिमा तय करती है; गवर्नमेंट का वास्तविक नियंत्रण परमेश्वर के हाथ में है।

व्यावहारिक चिंतन

यह पद हमें याद दिलाता है कि सत्ता और प्रभुत्व कभी भी मानव स्थिति के आधार पर अचल नहीं मानी जानी चाहिए। जब हम सत्ता के साथ व्यवहार करते हैं, तो हमें धर्म-निष्ठा, न्याय और दयालुता का पालन करना चाहिए, न कि अपनी स्थिति का दुरुपयोग। एक ऐसी दृष्टि बनाए रखें जिसमें लोग और राष्ट्र परमेश्वर के न्याय के धार को समझें और सचेत रहें कि हर निर्णय के पीछे एक उत्तरदायित्व है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

यिर्मयाह 25:26 परमेश्वर की सार्वभौमिक न्याय-योजना की पुष्टि करता है: दूरस्थ-निकट, सभी राजाओं से एक समान सवाल है, और अंततः “शेशक के राजा” तक भी वही न्याय पहुँचता है। यह हमें विश्वास और विवेक के साथ परमेश्वर के नियंत्रण में रहने की शिक्षा देता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 25:26 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“शेशक, जिसकी प्रशंसा सारे पृथ्वी पर होती थी कैसे ले लिया गया? वह कैसे पकड़ा गया? बाबेल जातियों के बीच कैसे सुनसान हो गया है?

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यिर्मयाह 25:9 (HINIRV) »
इसलिए सुनो, मैं उत्तर में रहनेवाले सब कुलों को बुलाऊँगा, और अपने दास बाबेल के राजा नबूकदनेस्सर को बुलवा भेजूँगा; और उन सभी को इस देश और इसके निवासियों के विरुद्ध और इसके आस-पास की सब जातियों के विरुद्ध भी ले आऊँगा; और इन सब देशों का मैं सत्यानाश करके उन्हें ऐसा उजाड़ दूँगा कि लोग इन्हें देखकर ताली बजाएँगे; वरन् ये सदा उजड़े ही रहेंगे, यहोवा की यही वाणी है।

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यशायाह 47:1 (HINIRV) »
हे बाबेल की कुमारी बेटी, उतर आ और धूल पर बैठ; हे कसदियों की बेटी तू बिना सिंहासन भूमि पर बैठ! क्योंकि तू अब फिर कोमल और सुकुमार न कहलाएगी।

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