Old Testament
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आमोस 3:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इस कारण परमेश्वर यहोवा यह कहता है: “देश का घेरनेवाला एक शत्रु होगा, और वह तेरा बल तोड़ेगा, और तेरे भवन लूटे जाएँगे।”
आमोस 3:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 3:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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आमोस 6:14 (HINIRV) »
इस कारण सेनाओं के परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, “हे इस्राएल के घराने, देख, मैं तुम्हारे विरुद्ध एक ऐसी जाति खड़ी करूँगा, जो हमात की घाटी से लेकर अराबा की नदी तक तुमको संकट में डालेगी।”

2 राजाओं 18:9 (HINIRV) »
राजा हिजकिय्याह के राज्य के चौथे वर्ष में जो एला के पुत्र इस्राएल के राजा होशे के राज्य का सातवाँ वर्ष था, अश्शूर के राजा शल्मनेसेर ने शोमरोन पर चढ़ाई करके उसे घेर लिया।

2 राजाओं 17:3 (HINIRV) »
उस पर अश्शूर के राजा शल्मनेसेर ने चढ़ाई की, और होशे उसके अधीन होकर, उसको भेंट देने लगा।
आमोस 3:11 का संक्षेप व्याख्यान (HINIRV)
पश्चिमी आकाशगंगा-सी सन्धि की चेतावनी के साथ Amos का यह संदेश न सिर्फ dháन के विनाश या राजनीतिक हार की बात नहीं है, बल्कि परमेश्वर के न्याय की सुई धर्म-आचरण से विचलित-हो चुके समाज पर सीधी चोट करती है। उपलक्षित संदर्भ में यह दर्शाता है कि इस्राएल-समाज में सुरक्षा के साधन (बनियादी संस्थाएं, शहरों की रक्षा, शक्तिशाली सेना) जब भौतिक सुरक्षा से आगे नहीं बढ़तीं—तब परमेश्वर के निर्णय से घेरो-घेरा हुआ देश असुरक्षित हो सकता है।
मुख्य अर्थ
यह वाक्य एक स्पष्ट चेतावनी है: परमेश्वर यहोवा देश के शत्रु को भेजकर उसका घेराव करेगा ताकि उनका बल टूटे और उनके घर-बार लूट जाएँ। यह מציאות-परक तानाबानी परमेश्वर की न्याय-संरचना का हिस्सा है: पाप के परिणामों में सुरक्षा के मिथक टूटते हैं जब समाज आत्म-विश्वास और अन्याय के साथ बढ़ता है।
दो मुख्य थीम
सम्बन्धित भाग
- इशायाह 5:5-6 जैसे संदेशों में भी क्रमशः यह विचार मिलता है कि सामाजिक असमानता और धार्मिक भ्रष्टाचार परमेश्वर के निर्णयों को आकर्षित कर सकते हैं।
- यरमियाह 21:7-10 में भी यह चेतावनी है कि राजा और जनता दोनों मिलकर गलत मार्ग पर जाएँ तो परमेश्वर उनके कारण भी निर्णय लेते हैं।
- जोएल 2 में भी यह विचार दिखता है कि स्वर्गीय दंड कभी-न-कभी सामाजिक-संरचना पर प्रभाव डालता है यदि पाप से वापस नहीं आते।
व्यावहारिक विचार
- व्यक्तिगत और सामाजिक नैतिकता की संवेदना बनाए रखना: शक्ति, सम्पन्नता या सुरक्षा साधनों के बजाय ईश्वर के वचन की दिशा में स्थिर रहने से ही समाज टिकाऊ रहता है।
- न्याय, करुणा और सत्य की संस्थाओं पर आस्था बनाए रखना ताकि जब कठिन समय आए, लोग भरोसा कर सके कि परमेश्वर शासन कर रहा है और पथ-सुधार की दिशा दिखा रहा है।
संক্ষेप सार
आमोस 3:11 में राजा-गृहण, शहर-घेरा और सामाजिक संरचनाओं के भीतर की अस्थिरता के समय परमेश्वर की चेतावनी आती है: यदि पाप, दुष्ट व्यवहार, और धार्मिक-कठोरता बनी रहे, तब देश पर शत्रु आकर उसका बल तोड़ेंगे और घर-बार लूटेंगे। यह संदेश एक स्पष्ट स्मरण कराता है कि सुरक्षा केवल युद्ध-सामग्री नहीं, बल्कि सत्य-निष्ठा और दायित्व-पूर्ण जीवन पर टिकती है।
पवित्र लेख से संक्षिप्त उद्धरण (ध्यान दें)
Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे छोटे उद्धरणों का उल्लेख आवश्यक है तो वे यदि उपलब्ध हों, नीचे बताए गए।