Old Testament
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आमोस 3:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोवा यह कहता है: “जिस भाँति चरवाहा सिंह के मुँह से दो टाँगें या कान का एक टुकड़ा छुड़ाता है, वैसे ही इस्राएली लोग, जो सामरिया में बिछौने के एक कोने या रेशमी गद्दी पर बैठा करते हैं, वे भी छुड़ाए जाएँगे।”
आमोस 3:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 3:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 शमूएल 17:34 (HINIRV) »
दाऊद ने शाऊल से कहा, “तेरा दास अपने पिता की भेड़-बकरियाँ चराता था; और जब कोई सिंह या भालू झुण्ड में से मेम्ना उठा ले जाता,

रोमियों 11:4 (HINIRV) »
परन्तु परमेश्वर से उसे क्या उत्तर मिला “मैंने अपने लिये सात हजार पुरुषों को रख छोड़ा है जिन्होंने बाल के आगे घुटने नहीं टेके हैं।” (1 राजा. 19:18)

आमोस 9:2 (HINIRV) »
“क्योंकि चाहे वे खोदकर अधोलोक में उतर जाएँ*, तो वहाँ से मैं हाथ बढ़ाकर उन्हें लाऊँगा; चाहे वे आकाश पर चढ़ जाएँ, तो वहाँ से मैं उन्हें उतार लाऊँगा।
आमोस 3:12 का अर्थ: एक सरल उद्घोषणा
यहसूचना देता है कि परमेश्वर इस्राइल पर अपनी चिंता करे हुए है और दंड का ठोस संकेत दिखाते हैं—जैसे सिंह के मुँह से दो टाँग या कान का एक टुकड़ा छुड़ाना। यहाँ यह समझना आवश्यक है कि सामरिया के विश्राम-स्थल (रेशमी गद्दियाँ) में बैठे रहते हुए लोग अपने आराम और अधिकारों को अधिक मानते हैं, जबकि वे परमेश्वर की नैतिक व्यवस्था से दूर हैं। इसलिए दंड उनकी लापरवाही और गलत हिस्सेदारी के कारण आता है।
पृष्ठभूमि और पाठ-परिप्रेक्ष्य
आमोस एक नीतिकथा-प्रधान पैगंबर थे, जो उत्तर सामंत शासन और सामाजिक अन्याय के खिलाफ मुखर थे। यह वाक्यांश “सिंह के मुँह से दो टाँगें” एक कल्पित, दृश्य संकेत है—जो यह दिखाता है कि दंड कितना कठोर और सीधे हो सकता है। इस्राएल और विशेषकर सामरिया के लोग आराम-प्रेमी और पापपूर्ण आचरण में डूबे थे, जहाँ सत्ता और सुख का अहंकार था।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
थीम आधारित सूचियाँ
अन्य समान पद-गत अभिलेख
यहीं तरह के विचार अन्य नबी-ग्रंथों में भी आते हैं जहाँ प्रभु अत्याचार, भ्रष्टाचार या परमेश्वर से दूरी के विरुद्ध चेतावनी देते हैं। ये संदेश यह स्पष्ट करते हैं कि बाहरी पूजा-क्रिया चाहे कितनी भी सजी-संवरी क्यों न हो, अगर भीतरी हृदय और व्यवहार नहीं सुधरे, तो दंड अवश्य आयेगा।
संदर्भ-कंटेक्स्ट (Cross-references)
1) अन्य दण्ड-घोषणाएँ जहाँ सामाजिक अन्याय पर दृष्टि डाली गयी है—ध्यान दें कि देवत्व से दूरी का परिणाम कैसे सामने आता है।
2) धार्मिक आडंबर के विरुद्ध चेतावनियाँ—आंतरिक परिवर्तन को अधिक महत्व दिया गया है, बिना उसे समय-समय पर दर्शाने के संकेत भी मिलते हैं।
3) न्याय और दया के संतुलन पर विचार—न्याय के साथ दया का भी दायित्व है, ताकि दण्ड के साथ सुधार भी संभव हो।
व्यावहारिक निष्कर्ष
इस वाक्य से सीखने योग्य संदेश यह है कि ईमानदार भक्ति और सामाजिक न्याय के बिना धार्मिक चलन मात्र क्षणिक आराम देता है, स्थायी जीवन नहीं। परमेश्वर के न्याय में हिम्मत नहीं डरनी चाहिए, क्योंकि दंड तभी आता है जब आचरण में ठहराव और नैतिक जवाबदेही गायब हो जाती है। व्यक्ति एवं समुदाय के लिए आवश्यक है कि वे अपने घर-परिवार, समाज, और व्यवस्था में सचाई, दया और धर्म-प्रियता को जगह दें।
टिप्पणी: आधुनिक पाठ-करने वालों के लिए यह भी ज़रूरी है कि वे सामरिक आराम की अपेक्षा आंतरिक परिवर्तन को प्राथमिकता दें, ताकि जीवन के सभी क्षेत्र परमेश्वर के अनुरूप ढलें।
ध्यान दें: नीचे दिये गए उद्धरण Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सामान्य सार-नोट्स से लिए जा सकते हैं; पूर्ण वाक्यात्मक उद्धरण इस स्रोत-निर्देशन में नहीं दिए गए।