Old Testament
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आमोस 9:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“क्योंकि चाहे वे खोदकर अधोलोक में उतर जाएँ*, तो वहाँ से मैं हाथ बढ़ाकर उन्हें लाऊँगा; चाहे वे आकाश पर चढ़ जाएँ, तो वहाँ से मैं उन्हें उतार लाऊँगा।
आमोस 9:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
आमोस 9:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 51:53 (HINIRV) »
चाहे बाबेल ऐसा ऊँचा बन जाए कि आकाश से बातें करे और उसके ऊँचे गढ़ और भी दृढ़ किए जाएँ, तो भी मैं उसे नाश करने के लिये, लोगों को भेजूँगा, यहोवा की यह वाणी है।

ओबद्याह 1:4 (HINIRV) »
परन्तु चाहे तू उकाब के समान ऊँचा उड़ता हो*, वरन् तारागण के बीच अपना घोंसला बनाए हो, तो भी मैं तुझे वहाँ से नीचे गिराऊँगा, यहोवा की यही वाणी है।

आमोस 9:2 परिक्रमा: क्यों यह वचन मायने रखता है
यह वचन यह दिखाता है कि परमेश्वर का न्याय निर्भय है और उसकी पकड़ सभी जगह तक फैलती है। भीतरी और बाहरी उच्चताओं के बावजूद—अंदर के गहरे अंधकार या आकाश की ऊँचाइयों—कोई ऐसी जगह नहीं जहाँ परमेश्वर की सांस रोक सके। Amos 9:2 कहता है कि चाहे लोग अधोलोक में खोदकर उतर जाएँ या आकाश पर चढ़ कर छिप जाएँ, परमेश्वर उनसे दूर नहीं रह सकता; वह उनकी हर चाल से परिचित है और उनकी राहों को पलट सकता है। इस वचन से निष्कर्ष निकलता है कि दया और कारण दोनों मिलकर उनके कर्मों के अनुसार उचित परिणाम लाती हैं।
पारंपरिक संदर्भ—उस दिन का संदर्भ
आमोस का संदेषक नॉर्थर्न इजराइल के नैतिक गिरावट के समय बोलता है—धर्म–अर्थ और सामाजिक अन्याय के प्रति कठोर सचेतना देते हुए। इस अध्याय में प्रभु की न्यायसंगत क्रिया स्पष्ट है: वे अपने लोगों के दमन और पापों को कभी अनदेखा नहीं करते। संदर्भ इस बात का संकेत है कि दया की उम्मीद तभी टिकेगी जब लोग दिल से पलटकर परमेश्वर के निर्णय के सामने आत्म-निवेदन करें।
मुख्य संदेश
1) परमेश्वर हर जगह तक पहुंच सकता है—आंतरिक गहराइयों से लेकर आकाश तक—क्योंकि उसकी ज्ञान और सत्ता सभी जगह फैली है।
2) न्याय के साथ दया की भी भूमिका है: जो लोग अपने पापों से पलटकर ईश्वर के संरक्षण को खोजते हैं, उन्हें वह उद्धार और सुधार दिखाता है।
3) प्रत्यक्ष चेतावनी के साथ आशाजनक समीक्षा: परमेश्वर जल्दबाजी में नहीं है; वह क्षमा के अवसर देता है, परन्तु वह पाप पर स्थिर नहीं रहता।
विश्वास-आधार के साथ समेकित पाठ
इस वचन में दो प्रमुख सिद्धांत एक साथ चलते हैं: ईश्वर की सार्वभौमिक सत्ता और उसकी न्याय-सुसंगति। परमेश्वर का न्याय किसी व्यक्ति या स्थान पर टिक नहीं जाता; वह हर स्थिति को देखता है और उसकी कार्रवाई योग्य होती है। साथ ही, वह जिन्हें साक्षात्कार देता है, उन्हें मार्ग दिखाता है।
संदर्भ-क्रॉस-रेफ़रेंस
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की व्यवस्था हर स्थान और हर स्थिति पर लागू होती है, और उसका उत्साहपूर्ण वचन मानव इतिहास के लिए उद्धार का मार्ग बनता है।
संक्षिप्त नीतिगत टिप्पणी (Devotional reflection)
यह वचन हमें सचेत करता है कि कोई भी स्थिति दूरी पर नहीं रहती जहाँ परमेश्वर नहीं पहुँच सकता। अगर आप किसी गहरे दुख या ग़लतियों के पथ पर हों, तो याद रखिए: परमेश्वर की पकड़ कभी ढीली नहीं होती; वह आपके पलटने की राह दिखाता है। आत्म-परिवर्तन और प्रार्थना के साथ, आप अपने जीवन में उसकी नयी रोशनी और मार्गदर्शन पा सकते हैं।
महत्त्वपूर्ण टिप्पणी स्रोत याद दिलाती है
आमतौर पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पब्लिक-डोमेन टिप्पणियों से उद्धरण मिलते हैं ताकि पाठ के अर्थ को गहराई में समझने में मदद मिले। नीचे उपलब्ध संक्षिप्त सार इन विचारों का समन्वय करता है, परन्तु इस प्रविष्टि में किसी पूर्ण उद्धरण को नहीं दोहराया गया है।
Cross-referenced themes: न्याय–दया, हर जगह ईश्वर की सत्ता, पश्चाताप के अवसर.