Old Testament
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आमोस 9:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
देखो, परमेश्वर यहोवा की दृष्टि इस पाप-मय राज्य पर लगी है, और मैं इसको धरती पर से नष्ट करूँगा; तो भी मैं पूरी रीति से याकूब के घराने को नाश न करूँगा,” यहोवा की यही वाणी है।
आमोस 9:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 9:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 30:11 (HINIRV) »
क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, तुम्हारा उद्धार करने के लिये मैं तुम्हारे संग हूँ; इसलिए मैं उन सब जातियों का अन्त कर डालूँगा, जिनमें मैंने उन्हें तितर-बितर किया है, परन्तु तुम्हारा अन्त न करूँगा। तुम्हारी ताड़ना मैं विचार करके करूँगा, और तुम्हें किसी प्रकार से निर्दोष न ठहराऊँगा।

यिर्मयाह 44:27 (HINIRV) »
सुनो, अब मैं उनकी भलाई नहीं, हानि ही की चिन्ता करूँगा*; मिस्र देश में रहनेवाले सब यहूदी, तलवार और अकाल के द्वारा मिटकर नाश हो जाएँगे जब तक कि उनका सर्वनाश न हो जाए।

यिर्मयाह 5:10 (HINIRV) »
“शहरपनाह* पर चढ़कर उसका नाश तो करो, तो भी उसका अन्त मत कर डालो; उसकी जड़ रहने दो परन्तु उसकी डालियों को तोड़कर फेंक दो, क्योंकि वे यहोवा की नहीं हैं।
आ Amos 9:8 पर लेखापरीक्षित पुनरावलोकन
यह वाक्य महत्वपूर्ण क्यों है? परमेश्वर की दृष्टि इस पाप-मय राज्य पर टिकती है, और फिर भी यहोवा अपने विषयों के बीच एक विशेष आश्वासन भी देता है: याकूब के घराने को पूरी रीति से नष्ट नहीं किया जाएगा। यह संदेश परमेश्वर की पवित्रता के साथ उसकी वचनबद्धता, न्याय और दया के संतुलन को उजागर करता है। यह न केवल तत्काल ऐतिहासिक नज़रिए से है बल्कि भविष्य के उद्धारकार्य और परमेश्वर की वैश्विक योजना से जुड़ा एक दृश्यमान संकेत है।
परिवेश और मूल संदेश
यह वाक्य आठवें अध्याय के संदर्भ में आता है, जहां नबी आमोस नीत देश-राज्यों की अन्यायपूर्ण गतिविधियों, सामाजिक भ्रष्टाचार और धार्मिक दिखावा पर चोट करता है। परमेश्वर की यह दृष्टि पाप-युग के एक गहरे में झांकती है: प्रजा के लिए न्याय और नीतियों के प्रति विश्वसनीयता की कमी। परन्तु अंततः जो संदेश मिलता है, वह यह है कि दिव्य न्याय के साथ योजना भी है—याकूब के घराने के प्रति नष्ट न कर पाने की riječ, एक निश्चित उद्धार के संकेत के साथ।
मुख्य विचार और निष्कर्ष
पवित्र ग्रंथीय थिम्स से समर्थन
यह संदेश उसी नदी से जुड़ता है जिसमें अन्य नबियों ने कहा है कि परमेश्वर न्याय के साथ दया भी करता है और उसका वचन स्थिर रहता है। साथ ही, दुष्चक्रों के बीच भी वह चयनित समुदाय के लिए रक्षक की भूमिका निभाता है।
संदर्भ-कोष्ठ: कुछ उपयोगी cross-references
1) इब्रानियों 13:8 के साथ विचार-सम्बन्ध: यद्यपि समय बदला, प्रभु यीशु मसीह वही रहता है—समयानुसार उसकी कृपा और न्याय का संतुलन बना रहता है। यह Amos 9:8 में परमेश्वर की स्थिरता से मेल खाता है।
2) परमेश्वर के चयनित समुदाय की सुरक्षा की धारणाएँ: पतरस 2:9 में वर्णित “चुनिंदा पीढ़ी” और “राजकुमारों का राष्ट्र”—यहां भी दया और सुरक्षा के संकेत मिलते हैं।
3) निर्बलों की सहायता और असमानताओं के विरुद्ध न्याय: इसहाक 1:17 आदि प्रेषित पंक्तियाँ दर्शाती हैं कि परमेश्वर न्याय के साथ करुणा भी करता है—यही Amos के संदेश को पूर्णता देती है।
आध्यात्मिक चिंतन: एक संक्षिप्त व्यवहारिक तत्त्व
हम कैसे समाहित करें कि परमेश्वर की दृष्टि पाप पर स्पष्ट हो, पर वह अपने चयनित लोगों के लिए वचन-पुष्टि के साथ सुरक्षा भी दे रहे हैं? इसका उत्तर: भीतर की पवित्रता और बाहर की नितियों में सत्य और करुणा का संयोजन। हमारे समाज में अन्याय के विरुद्ध खड़े रहते हुए भी हमें विश्वासपूर्वक आश्वस्त रहना चाहिए कि परमेश्वर की योजना विश्व-परिवर्तन में कार्यशील है और वह अपने प्रजा का उद्धार चाहता है।
व्यावहारिक देवotional विचार
जब हमें लगता है कि स्थिति गम्भीर है, तब हमें स्मरण रखना चाहिए कि प्रभु की दृष्टि पाप पर टिकी है, पर उसका वादा भी साथ है—याकूब के घराने के लिए सुरक्षा और आशीष से भरा भाग। प्रतिदिन की निष्ठा, अन्याय के बीच ईमानदारी, और दयालुता के साथ व्यवहार करने से हम भी इस आशीषपूर्ण आँचल का भागीदार बनते हैं।
सूक्ष्म उद्धरण (जहाँ सन्निकट रहे)
यदि उपलब्ध हो तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण छोटे रूप में उद्धृत हो सकते हैं, लेकिन पूर्ण पाठ नहीं। इन टिप्पणियों में उनके विचार पारस्परिक रूप से एकीकृत रूप से प्रस्तुत किये गए हैं ताकि पाठक एक साफ-सुथरी, एकीकृत व्याख्या पाएँ।
Cross-reference संकेतों के साथ, इस विश्लेषण का उद्देश्य पाठकों को Amos 9:8 के पीछे की गहराई समझाने में सहायक और प्रोत्साहित करना है—निष्कर्षतः यह वाक्य यह दर्शाता है कि परमेश्वर की न्याय-योजना और उसकी दया, दोनों मिलकर इतिहास को एक दिशा देती हैं।