Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
यिर्मयाह 5:1 यिर्मयाह 5:2 यिर्मयाह 5:3 यिर्मयाह 5:4 यिर्मयाह 5:5 यिर्मयाह 5:6 यिर्मयाह 5:7 यिर्मयाह 5:8 यिर्मयाह 5:9 यिर्मयाह 5:10 यिर्मयाह 5:11 यिर्मयाह 5:12 यिर्मयाह 5:13 यिर्मयाह 5:14 यिर्मयाह 5:15 यिर्मयाह 5:16 यिर्मयाह 5:17 यिर्मयाह 5:18 यिर्मयाह 5:19 यिर्मयाह 5:20 यिर्मयाह 5:21 यिर्मयाह 5:22 यिर्मयाह 5:23 यिर्मयाह 5:24 यिर्मयाह 5:25 यिर्मयाह 5:26 यिर्मयाह 5:27 यिर्मयाह 5:28 यिर्मयाह 5:29 यिर्मयाह 5:30 यिर्मयाह 5:31



यिर्मयाह 5:10 पर एक स्पष्ट अर्थ
यह वाक्य यह बताता है कि खतरे में पड़े शहरों की स्थिति को सुधारने के बजाय उनके अवयव छोड़ना सही है: उनके नगर-आवासों को नष्ट कर डालो, परन्तु जड़ को नहीं काटो ताकि वे फिर उग सकें यदि यहोवा की अनुमति हो, परन्तु डालियाँ तोड़ दी जाएँ ताकि पुनः खड़ा न हो सकें।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यिर्मयाह के समय यरूशलेम के बाहर के नगरों में तौसी और विनाश का संदेश दिया गया। धर्म-घटना के लिए कुछ जगहें छोड़ना था ताकि दुश्मन के लिए उदाहरण बने और लोग लौटें। यहाँ “शहरपनाह” एक प्राचीन शहर का नाम है, जो नाश के लिए चुना गया, पर न पूरी तरह जड़ समाप्त करने के बजाय उसकी जड़ रहने दी जाए ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़े तो पुनः विचार किया जा सके। यह न्याय की एक विशिष्ट द्रष्टि है: दायित्वपूर्ण दंड, जो पुनर्चिंतन और सुधार के अवसर भी देता है।
विश्लेषणात्मक अवलोकन
- नगरों की पहचान: नाश के उपाय के साथ भी कुछ संरचनात्मक बचत बनी रहे ताकि योजना के अनुसार पुनः क्रिया संभव हो।
- जड़ बनाम डालियाँ: जड़ को छोड़ना दर्शाता है कि कुछ आस्थागत या सामाजिक संरचनाओं को पूरी तरह नष्ट नहीं किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में सुधार संभव हो।
- यहोवा की नहीं होना: यह संचेतन बोध कि वास्तविक धारणा और उत्तरदायित्व केवल परमेश्वर के अधिकार क्षेत्र में है; मनुष्य अपने प्रयासों में भी पूरक विवेक अपनाए।
मूल संदर्भ से कुछ विचार
यहाँ एक नीतिगत संतुलन दिखता है: कठोर दंड, लेकिन पुनर्वास की संभावना। यह पाठ प्रेरित करता है कि हम टूट-फूट में भी अवसर देखें—व्यक्ति-समुदाय के लिए जब तक क्रोध शांत न हो जाए, तब तक शांति और सुधार के मार्ग बनते हैं।
संयुक्त रूप से उपयोगी विचार
अनुच्छेदित क्रॉस-रेफरेंसेज़ और उनसे जुड़े विचार
1) यह संदेश अन्य"You shall utterly... but leave the root" जैसी विवेकपूर्ण दृष्टीकरण देता है कि दंड के साथ संरक्षण का तत्व संभव हो। (उद्धरण नहीं दिए गए आयतन)
2) समान विचारधारा वाले पासेज़, जहाँ दंड के साथ पुनर्निर्माण की उम्मीद बंधी है, जैसे कुछ अन्यProphetic निर्देश।
3) नीतिगत छात्रों के लिए यह स्पष्ट करता है कि सजा-प्रबन्धन और पुनर्वास का संतुलन अर्जित करना चाहिए ताकि समाज में स्थायित्व बना रहे।
व्यावहारिक निष्कर्ष
जीवित समाज में जब जोखिम और दुष्कर्म दिखे, तब कठोर कदम उठाने पड़ते हैं; परन्तु शेष जड़ें बची रहने दें ताकि भविष्य की पुनर्जीवन की संभावना बनी रहे। यह शास्त्रीय पाठ व्यक्तिगत नैतिकता और सामाजिक नीति दोनों के लिए संतुलित मार्गदर्शन देता है।
अनुमित उद्धरण (एतिहासिक टिप्पणीकारों से आवश्यक तुकबंदी)
यदि उपलब्ध हो तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के छोटे-छोटे उद्धरण शामिल किए जा सकते हैं; यहाँ संदर्भ में उनके पूर्ण विवरण या उद्धरण explicitly नहीं दिखाए गए हैं। नीचे वे टिप्पणीकारों के नाम हैं जिनसे शोधार्थी प्रेरणा ले सकते हैं: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke.