Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 5:8 का तत्कालीन संदर्भ और उसका अर्थ
यह वचन यिर्मयाह के काल की पतित सामाजिक स्थिति को उजागर करता है: उस समय के लोग ईश्वर के भय और कानून के अनुरूप जीवन जीने के बजाय अपनी इच्छाओं के पीछे दौड़ रहे थे। वचन कहता है कि वे “खिलाएँ-पिलाए बे-लगाम घोड़ों के समान हो गए” और “अपने-अपने पड़ोसी की स्त्री पर हिनहिनाने लगे।” यह न केवल नैतिक अपकर्ष का चित्रण है, बल्कि इस्लाम होते-होते सामाजिक अनुशासन के पतन को दर्शाता है, जहाँ व्यवसायिक भ्रष्टाचार और पारिवारिक आदर्शों की मर्यादा टूट चुकी है।
क्या दर्शाता है यह पाठ परमेश्वर और विश्वास के बारे में
यहाँ परमेश्वर की करुणा के बावजूद निंदा और चेतावनी स्पष्ट है। घोड़ों के अरण्य–सी उड़ान और “हिनहिनाना”—यह बाह्य आवेगों के नियंत्रण के अभाव की चित्कार है। परमेश्वर चाहते हैं कि अपने लोगों की आंतरिक नीयत और व्यवहार को नियंत्रित करें; जब नैतिक अनुशासन टूटता है, तब सामाजिक असंगति और अन्याय पनपते हैं। इस पाठ के माध्यम से विश्वास में स्थिरता, ईमानदारी और neighbor-love का आग्रह उभरता है और कहता है कि आस्तिक जीवन व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों स्तरों पर एक समान नैतिक कसौटी पर खड़ा हो।
महत्वपूर्ण शब्दों/चित्रों की स्पष्ट व्याख्या
संबंधित बाइबल पाठ (Cross-references)
आज के प्रकाश में अनुप्रयोग
यिर्मयाह 5:8 हमें यह स्मरण कराता है कि आंतरिक नियंत्रण, नैतिकता और समुदाय के प्रति सम्मान—ये तीन बातें एक दूसरे से जुड़ी हैं। आज के समय में इसका सीधा अर्थ है: व्यक्तिगत नैतिक अनुशासन बनाए रखना, दूसरों के अधिकारों और सम्मान की सुरक्षा करना, और समाज के भीतर भ्रष्टाचार, हिंसा या शोषण के किसी भी स्वरूप का विरोध करना। ईमानदार जीवन वेदना का नहीं, परंपरागत मान-प्रतिष्ठा को भी पुनर्जीवित कर सकता है।
सार रूप से, यह पाठ हमें याद दिलाता है कि विश्वास की गिरती हुई पकड़ को फिर से मजबूत करना है: प्रभु के नियमों के अनुरूप जीवन, पड़ोसियों के आहत होने से बचना, और समाज में सत्य, न्याय और दयालुता को पुनर्स्थापित करना।
संक्षेप टिप्पणी (जोड़ियाँ और कारण)
Matthew Henry-आधारित संक्षेप: “जहाँ आत्म-नियमन नहीं, वहाँ दुष्कर्मों के लिए स्थान खुला है; परमेश्वर की ओर से सुरक्षा तब तक रहती है जब तक मनोभाव पवित्र रहते हैं।”
Albert Barnes-आधारित टिप्पणी: पाप के इस बर्ताव से समाज में असंतुलन बढ़ता है; यह राज्य-व्यवस्था और परिवार के जीवन दोनों को प्रभावित करता है।
Adam Clarke-आधारित टिप्पणी: यह चित्रण बताता है कि आस्था का ढाँचा कैसे टूटे तो व्यवहार में कड़वाहट और अन्याय बढ़ते हैं; चेतावनी है कि नीति-परिवर्तन नहीं, आंतरिक परिवर्तन आवश्यक है।