Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 5:20 — पार्श्वभूमि से उद्घोष
प versos: यह वचन यिर्मयाह नबी के समय की सामाजिक-धार्मिक अस्थिरता के बीच कही गई है। ईश्वरीय संदेश इस्राएल के भीतर फैले भ्रष्टाचार, अविश्वास और पाप के प्रचार-प्रसार को चुनौती देता है। यहाँ कवालीय हालात में यहूदियों के घराने और यहूदा क्षेत्र दोनों में सत्य की घोषणा करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है—यानी ईश्वर के विरुद्ध बढ़ते अंधकार के बीच उसकी सच्ची चेतावनी और उम्मीद फैलाने की जिम्मेदारी।
ईश्वर के बारे में जो पाठ प्रकट करता है
यह पाठ दिखाता है कि परमेश्वर अपने न्याय और करूणा के कारण, समाज के हर स्तर पर सत्य का उद्घोष चाहते हैं। "याकूट के घराने में यह प्रचार करो" और "यहूदा में यह सुनाओ" जैसे शब्द संकेत करते हैं कि पाप केवल बाहर नहीं, भीतर भी घर कर चुका है, और उसे चिह्नित कर के स्पष्ट_frontline पर खड़े होकर सच का संदेश देना होगा। ईश्वर का उद्देश्य सच्चाई के प्रकाश से मानव-जड़ित अंधकार को दूर करना है, ताकि लोग.reflection करें और पलट आएं।
महत्वपूर्ण शब्द और imagery की व्याख्या
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एप्लिकेशन: आज के समय में कैसे अपनाएं
- घर और परिवार के स्तर पर निष्ठा बनाए रखना: अपने भीतर और घर के वातावरण में पवित्रता का प्रचार करें, न कि भ्रष्टाचार और छल-छलावे को बढने दें।
- सामूहिक सचेतना: समाज में सत्य की आवाज़ बनें; गलतफहमियों या दबाव के बावजूद ईश्वर के शब्द को प्रचारित करने से पीछे न हटें।
- संकल्पित आचरण: व्यक्तिगत जीवन में सत्य, न्याय और दया के गुणों को अपनी आदतों में उतारना।
नोट्स: प्रेरक उद्धरण (सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों से)
इस पाठ के संदर्भ में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण संभव हो सके तो नीचे दिया गया सार उनके सामान्य विचारों के अनुरूप है, परन्तु पूर्ण पाठ नहीं उद्धृत किया गया है। खास शब्दों का संक्षिप्त उल्लेख:
– Henry: उन्होंने नैतिक चेतावनी और सामाजिक-नैतिक गिरावट के समय में नबी के संदेश की महत्ता पर बल दिया है (व्यावहारिक संवेग और आस्था के बीच संतुलन की आवश्यकता पर)।
– Barnes/Clarke: संदेश की सार्वजनिक और निजी जगहों में दोनों प्रकार की सच्ची चेतावनी पर जोर देते हैं; पाप के खिलाफ बुलावा और निष्ठा का आह्वान प्रमुख है।
संयुक्त सार
यह पद उच्चारण के साथ एक स्पष्ट दायित्व का स्मरण कराता है: सत्य को हर घर-परिवार और हर राज्य में फैलाना, ताकि लोग पथ पर लौटें। ईश्वर के न्याय के साथ उसकी करूणा भी साथ रहती है; इसलिए उद्घोष एक प्रेम-भरे कारण से किया जाए—ताकि जीवन बदल सके और समाज पुनर्स्थापित हो।