मत्ती 22:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब राजा को क्रोध आया, और उसने अपनी सेना भेजकर उन हत्यारों को नाश किया, और उनके नगर को फूँक दिया।

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मत्ती 22:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 22:7 का प्रमाणगत अर्थ

यह पद कहता है कि राजा का क्रोध इस प्रकार प्रकट हुआ कि उसने अपनी सेना भेजकर वे हत्यारों को नाश किया और उनके नगरों को फूँक दिया। यह दृष्टांत यीशु की कहानी का भाग है जिसमें राजकुमार के निमंत्रण के साथ अपराधी-मन से प्रतिक्रिया को दिखाया गया है। सरल शब्दों में: भगवान के आमंत्रण के प्रति कृतघ्नता के परिणाम गंभीर होते हैं, और अन्यायपूर्ण रुद्धि अंततः दण्ड को जन्म देती है।

प्रीति-परिप्रेक्ष्य (Contextual background)

यह सत्य ऐसी कथा का भाग है जिसमें आदरणीय राजा अपने बेटे के विवाह के निमंत्रण के साथ पहली बार मंदिर-जनसमुदाय को बुलाते हैं और कुछ refused करते हैं। ग़लती से, राजा ने युद्ध के माध्यम से उन नगरों को नष्ट करने का कदम उठाया—जो न सिर्फ व्यक्तिगत प्रतिशोध था, बल्कि उनके बंधुत्व-आचरण और सार्वजनिक दायित्व की अवहेलना का प्रतीक था। इस पाठ में उद्धृत कार्रवाई से यह संकेत मिलता है कि परमेश्वर के पहले निमंत्रण का उल्लंघन शास्त्रीय रूप से गंभीर परिणामों को जन्म देता है।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • यह हिंसात्मक अंत यह दिखाता है कि ईश्वर के न्याय के बिना अवहेलना क्यों वेसी होती है जो वास्तविक आराधना और विश्वास के लिए जरूरी है।
  • नगरों को फूँक देना उन लोगों के समाज पर भी चोट है जो परमेश्वर के राज्य के लिए जिम्मेदार नहीं रहे। इसका उद्देश्य यह है कि अस्वीकृति की कीमत स्थापित हो।
  • संदेशः आह्वान स्वीकार हो तो आशीष, अन्यथा परिणाम पर कठोरता संभव है—पर यह नाटक धार्मिक ध्येयों को पछाड़ नहीं देता; ईश्वर का न्याय भी दया के साथ संगत है।

सार-सार तत्व (Thematic quick take)

अनुसंधान-सम्बन्ध (Cross-references)

1) लूका 14:23—पहचान और निमंत्रण के प्रसार पर प्रकाश डालता है कि दाता की दया कैसे वैश्विक बना दी जाती है, तथा कैसे अस्वीकृति परिणामों को जागृत करती है।

2) मत्ती 21:41—कनिष्ठ-नियोजन और उत्पति के साथ, राजा और अभिषेक-क्रिया से सम्बन्ध।

3) रोम 1:18—स्वीकृति-निषेध के बीच परमेश्वर के न्याय की आवृत्ति का संकेत देता है, ताकि पाठक समझ सके कि अवहेलना आखिर में दण्ड तक जाती है।

प्रयोजनात्मक निष्कर्ष

हमारा जीवन यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर के राज्य के लिए बुलावे का सम्मान करना चाहिए। विचार करें कि कैसे हम प्रार्थना, और सेवक-कार्य के लिए एक सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाते हैं—न कि आत्म-स्वार्थ या निंदात्मक रवैया। साथ ही, यह संदेश याद दिलाता है कि ईश्वर का न्याय और दया एक साथ चलते हैं; अतः निष्ठा से उसकी आवाज़ पर वीणा के साथ चलना चाहिए।

प्रेरणा के लिए एक छोटा मार्गदर्शक सूची

हिंदी भाषा के प्रशंसित पंडित-व्याख्याकारों के विचारों से प्रेरित, यह व्याख्या धीरे-धीरे यह बताती है कि क्रोध-व्याख्याओं के बीच भी सत्य का संदेश स्पष्ट रहता है—कि परमेश्वर के बुलावे पर सजग और विश्वासपूर्वक उत्तर दें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 22:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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परन्तु मेरे उन बैरियों को जो नहीं चाहते थे कि मैं उन पर राज्य करूँ, उनको यहाँ लाकर मेरे सामने मार डालो’।”

लूका 21:24 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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वे तलवार के कौर हो जाएँगे, और सब देशों के लोगों में बन्धुए होकर पहुँचाए जाएँगे, और जब तक अन्यजातियों का समय पूरा न हो, तब तक यरूशलेम अन्यजातियों से रौंदा जाएगा। (एज्रा 9:7, भज. 79:1, यशा. 63:18, यिर्म. 21:7, दानि. 9:26)

1 पतरस 4:17 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 पतरस 4:17 (HINIRV) »
क्योंकि वह समय आ पहुँचा है, कि पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्याय किया जाए, और जब कि न्याय का आरम्भ हम ही से होगा तो उनका क्या अन्त होगा जो परमेश्‍वर के सुसमाचार को नहीं मानते? (इब्रा. 12:24-25, यिर्म. 25:29, यहे. 9:6)

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